• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Blogs Posts

Impact Summit Sessions at Various Locations

Blog Home Page

कृपया कथा : एक शिष्य की कलम से गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी।

Jan. 15, 2026, 12:33 p.m.

मेरे नाना जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर आसनसोल जेल में बंदी बना दिया गया।


जेल के बैरक में प्रवेश करते ही एक दुबला-पतला किंतु ऊँची कद-काठी वाला तेजस्वी युवक उनके पास आया। उसके चेहरे पर अद्भुत शांति और नेत्रों में विलक्षण तेज था। वह हाथ में पानी का गिलास लिए हुए बोला—

“आओ मित्र, पानी पी लो।”

नाना जी ने पानी ग्रहण किया। कुछ क्षण बाद सहज जिज्ञासा से कहा—
“आपने मुझे मित्र कहा, जबकि मैं आपको जानता तक नहीं।”

युवक मंद मुस्कान के साथ बोला—
“तुम नहीं समझ पाओगे। तुम्हारी तो कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेंगी।”
समय बीत गया। जेल से मुक्ति मिली, देश स्वतंत्र हुआ और जीवन अपनी गति से आगे बढ़ता गया।
वर्ष 1953 में नाना जी को एक पत्र प्राप्त हुआ। पत्र में लिखा था—

“राष्ट्र निर्माण के लिए एक बहुत बड़ा अभियान आरंभ होने जा रहा है। इसमें तुम्हारी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। शीघ्र मथुरा आ जाओ। घर की चिंता मत करना, उसकी व्यवस्था मैं स्वयं देख लूँगा।”
नाना जी अपनी डायरी में लिखते हैं कि उस व्यक्ति से कभी उन्होंने अपने घर का पता तक साझा नहीं किया था। फिर भी पत्र उनके हाथों में था—पूर्ण विश्वास के साथ।


(आगे की कथा नाना जी के शब्दों में)
“पत्र पढ़ते-पढ़ते मैं जैसे सम्मोहित हो गया। घर में जो कपड़ा मिला, उसे एक प्लास्टिक की टोकरी में डाल लिया और बिना कुछ सोचे निकल पड़ा। पत्नी ने पूछा—‘कहाँ जा रहे हो?’
मैं बस इतना ही कह सका—‘तीन-चार दिन में लौट आऊँगा।’

बैलगाड़ी से स्टेशन पहुँचा। बैलगाड़ी वाले ने कहा—‘मेरा काम यहीं तक था, आगे स्टेशन पर एक आदमी मिलेगा, वही तुम्हें ट्रेन में बैठाएगा।’


स्टेशन पर सचमुच एक व्यक्ति खड़ा था। उसने कहा—‘बहुत से लोगों को अभी इकट्ठा करना है, जल्दी चढ़ो, यह ट्रेन मथुरा जाएगी।’


ट्रेन चल पड़ी। मथुरा पहुँचने से कुछ पहले ट्रेन जंगल के बीच रुक गई। नीचे खड़ा एक व्यक्ति बोला—‘आगे बैलगाड़ी वाला तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।’
जंगल के रास्तों से होता हुआ मैं मथुरा पहुँचा।


जैसे ही गुरुदेव के सामने पहुँचा, उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—
‘तुम बहुत सीधे हो। तुम्हारे पीछे चार-चार आदमी लगाने पड़े। अगर सबके पीछे इतने लोग लगाने पड़ें तो काम कैसे चलेगा?’


फिर उन्होंने गंभीर स्वर में कहा—
‘यहाँ एक बहुत बड़ा यज्ञ होने वाला है। तुम्हें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी है। घर की चिंता मत करना, उसकी व्यवस्था मैंने कर दी है।’”


समय ने सिद्ध कर दिया कि गुरुदेव का कथन अक्षरशः सत्य था। घर की व्यवस्था सचमुच स्वयं बनती चली गई—उसका उल्लेख फिर कभी।
गुरुदेव के वचनों के अनुसार, नाना जी के बाद मेरी माँ, फिर मेरे पिता और आज मैं स्वयं इस मिशन के कार्य में संलग्न हूँ।


आज जब इन घटनाओं पर चिंतन करता हूँ, तो यह अनुभव होता है कि भगवान महाकाल, जिसे चुनते हैं, उसे अपने समीप बुलाने के लिए कितनी अदृश्य व्यवस्थाएँ करते हैं। अपनी कृपा का प्रसाद ऐसे प्रदान करते हैं कि जीवन तृप्त हो उठता है।


जब ईश्वर किसी एक को चुनता है, तो केवल वही नहीं—
उसकी अनेक पीढ़ियाँ, जन्म-जन्मांतर तक, सँवर जाती हैं।
यही है पूज्य गुरुदेव की अवतारी चेतना—
जो समय, स्थान और व्यक्ति से परे जाकर
युग निर्माण की धारा प्रवाहित करती है।

Recent Post

हमारी होली (होली विशेषांक— 1)
Mar, 1, 2026

मैं चाहता हूँ कि आप इस होली पर खूब आनंद मनाएँ और साथ ही यह भी चिंतन करें कि जिसकी यह छाया है, उस अखंड आनंद को मैं कैसे प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी युग-युग की प्यास कैसे बुझ सकती है? इस अँधेरे में कहा...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 149): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Mar, 1, 2026

एक लाख अशोक वृक्ष लगाने का संकल्प पूरा करने में यदि प्रज्ञापरिजन उत्साहपूर्वक प्रयत्न करें तो इतना साधारण निश्चय इतने बड़े जनसमुदाय के लिए तनिक भी कठिन नहीं होना चाहिए। उसकी पूर्ति में कोई अड़चन दीखत...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 148): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Feb, 7, 2026

जीवन की बहुमुखी समस्याओं का समाधान, प्रगति-पथ पर अग्रसर होने के रहस्य भरे तत्त्वज्ञान के अतिरिक्त इसी अवधि में भाषण, कला, सुगम संगीत, जड़ी-बूटी उपचार, पौरोहित्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह-उद्योगों का स...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 147): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Feb, 7, 2026

Read More

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 146): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Feb, 6, 2026

एक-एक लाख की पाँच शृंखलाएँ सँजोने का संकेत हुआ। उसका तात्पर्य है— कली से कमल बनने की तरह खिल पड़ना। अब हमें इस जन्म की पूर्णाहुति में पाँच हव्य सम्मिलित करने पड़ेंगे। वे इस प्रकार हैं—

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 145): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Feb, 5, 2026

हमारे निजी जीवन में भगवत्कृपा निरंतर उतरती रही है। चौबीस लक्ष के चौबीस महापुरश्चरण करने का अत्यंत कठोर साधनाक्रम उन्हीं दिनों से लाद दिया गया जब दुधमुँही किशोरावस्था भी पूरी नहीं हो पाई थी। इसके बा...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 144): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Feb, 5, 2026

बड़ी और कड़ी परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही किसी की महिमा और गरिमा का पता चलता है। प्रतिस्पर्द्धाओं में उत्तीर्ण होने पर ही पदाधिकारी बना जाता है। खेलों में बाजी मारने वाले ही पुरस्कार पाते हैं। खरे...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 143): ‘विनाश नहीं सृजन’— हमारा भविष्यकथन
Feb, 4, 2026


वर्तमान समस्याएँ एकदूसरे से गुँथी हुई हैं। एक से दूसरी का घनिष्ठ संबंध है। चाहे वह पर्यावरण हो अथवा युद्ध सामग्री का जमाव; बढ़ती अनीति-दुराचार हो अथवा अकाल-महामारी जैसी दैवी आपदाएँ। एक को सुल...

Read More
विज्ञान की छलाँग मात्र शरीर तक ही क्यों?
Feb, 3, 2026

बौद्धिक दृष्टि से आज का मानव प्राचीनकाल की तुलना में कई गुना आगे है। प्रतिभा के चमत्कार सर्वत्र दिखाई पड़ रहे हैं। एक सदी की वैज्ञानिक उपलब्धियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे मानवी प्रगति ने स...

Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 142): ‘विनाश नहीं सृजन’— हमारा भविष्यकथन
Feb, 3, 2026

उपासना का वर्तमान चरण सूक्ष्मीकरण की सावित्री-साधना के रूप में चल रहा है। इस प्रक्रिया के पीछे किसी व्यक्तिविशेष की ख्याति, संपदा, वरिष्ठता या विभूति नहीं हैं। एक मात्र प्रयोजन यही है कि मानवीसत्ता...

Read More

Categories
11
20261
51 Kundiya Gayatri Mahayagya1
Aadhyatmikta1
Ai Summit4
Akhand Deep8
Akhand Jyoti975
Article1
Artificial Intelligence1
Awakening2
Awgp8
Awgp News3
Awgp Videos | Hariye Na Himmat | हारिये न हिम्मत1
Bal Sanskar1
Bal Sanskar Shala1
Bal_Sanskar_Shala_Abhiyan1
Bhartiya Sanskriti Gyan Pariksha2
Blood Donation1
Blood Donation And Check Up Camps1
Book विचारों की सृजनात्मक शक्ति1
Book संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे1
Book हमारी युग निर्माण योजना 1
Catalist Of Change5
Chetna Kendra1
Delhi - Ncr2
Dr. Chinmay Pandya3
Dsvv14
Environment1
Exhibition1
Festival1
Gahna Karmanogati1
Gayatri Mahayagya1
Gayatri Pariwar7
Gayatri Yagya1
Gujarat5
Gurudev138
Gurudev368
Gurudev Amrut Vanni8
Guru Ji1
Hamari Vasiyat Aur Virasat151
Haridwar6
Holi1
Holi Festivel1
Janmshatabdi10
Jeevan Jine Ki Kala148
Jeevan Ka Arth148
Jeevan Kaushal149
Jeevan Lakshya150
Jeevan Mantra147
Jeevan Mulya145
Jeevan Parichay150
Jeevan Path145
Jeevan_Sadhana144
Jeevan Sadhna146
Jeevan Shaily146
Jeevan Shakti144
Jharkhand4
Jss6
Kalash Yatra2
Karma1
Katha And Purans1
Kripa Katha8
Kumbh1
Madhya Pradesh7
Maharashtra16
Mata Bhagwati Devi Sharma3
Mata Ji2
Mataji1
Mata Ji2
Mumbai Ashwamedh Yagya 40
Nari Jagran1
Odisha1
Parv / Festival3
Prachar - Prasaar1
Pragya Abhiyan10
Rajasthan4
Rishichintan1
Rishi Tradition2
Rishi Wisdom2
Sadhna Abhiyan4
Sanskar3
Sanskar Parampara2
Sanskrati1
Services1
Shantikunj27
Shishy Ki Kalam Se1
Shok Sandesh2
Spirituality 3
Spirituality3
Students1
Tradition1
Transformation1
Tree Plantation1
Uttarakhand8
Uttar Pradesh7
Vaigyanik Adhyatma3
Vangmay4
Vichar Kranti Abhiyan1
Videsh / Abroad7
West Bengal1
Yagya20
Yagya Campaign2
Yoga And Indian Culture1
Yug Sahitya95
अदभुत आश्चर्यजनक किन्तु सत्य88
अध्यात्म 524
आज का सद्चिंतन278
आत्मचिंतन के क्षण77
कहानियां 70
कहानियाँ प्रज्ञा पुराण से60
गायत्री और यज्ञ 27
जीवन जीने की कला570
नवरात्रि 19
पर्व एवम त्योहार2
प्रज्ञा पुराण (भाग 1)1
विचार क्रांति323
स्वास्थ्य2

View count

150499493

Popular Post

मौनं सर्वार्थ साधनम
Dec. 22, 2023, 12:13 p.m.

मौन साधना की अध्यात्म-दर्शन में बड़ी महत्ता बतायी गयी है। कहा गया है “मौनं सर्वार्थ साधनम्।” मौन रहने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। महात...

Read More
प्रयागराज महाकुम्भ में 13 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है गायत्री परिवार का शिविर
Jan. 9, 2025, 5:59 p.m.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हो रहे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन महाकुंभ में गायत्री परिवार द्वारा शिविर 13 जनवरी स...

Read More
अध्यात्मवाद
Dec. 9, 2023, 4:10 p.m.

वर्तमान की समस्त समस्याओं का एक सहज सरल निदान है- ‘अध्यात्मवाद’। यदि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक जैसे सभी क्षेत्रों में अध्यात्मवा...

Read More
आद डॉ पंड्या आबूधाबी UAE में -संयुक्त राष्ट्र के अंग AI Faith & Civil Society Commission के मुख्य प्रवक्ता
Feb. 27, 2024, 6:14 p.m.

मुम्बई अश्वमेध महायज्ञ के सफल आयोजन के उपरान्तअखिल विश्व गायत्री परिवार प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्य...

Read More
जहर की पुड़िया रखी रह गई
April 19, 2024, 12:25 p.m.

मेरे दादा जी की गिनती इलाके के खानदानी अमीरों में होती थी। वे सोने-चाँदी की एक बड़ी दुकान के मालिक थे। एक बार किसी लेन-देन को लेकर दादाजी और पिताजी ...

Read More
मूर्खता के लक्षण
July 1, 2024, 9:55 a.m.

मूर्खता के लक्षण छोड़ेंगे तब सद्गुण धारण कर सकेंगे. आगे ऐसे कई मुर्ख के लक्षण बताए गए थे, और भी कुछ लक्षण यहाँ बताए है, श्री समर्थ रामदास स्वामी कहत...

Read More
शताब्दी वर्ष-2026 के निमित्त विशिष्ट अभियान : ज्योति कलश यात्राएँ
April 25, 2024, 10:42 a.m.

हम स्वयं जागें, सौ-सौ को जगाएँ, इस ऐतिहासिक वेला में पावन गुरूसत्ता को दें एक सार्थक...

Read More
आत्मबल
Jan. 14, 2024, 10:44 a.m.

महापुरुष की तपस्या, स्वार्थ-त्यागी का कष्ट सहन, साहसी का आत्म-विसर्जन, योगी का योगबल ज्ञानी का ज्ञान संचार और सन्तों की शुद्धि-साधुता आध्यात्मिक बल...

Read More
स्नेह सलिला, परम श्रद्धेया जीजी द्वारा एक विशाल शिष्य समुदाय को गायत्री मंत्र से दीक्षा
Feb. 23, 2024, 4:03 p.m.

गुरु का ईश्वर से साक्षात संबंध होता है। गुरु जब अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा का कुछ अंश शिष्य को हस्तांतरित करता है तो यह प्रक्रिया गुरु दीक्षा कहलाती है।...

Read More
देश दुनिया में हो रहा युग चेतना का विस्तार ः डॉ चिन्मय पण्ड्या
July 12, 2024, 5:53 p.m.

आदरणीय डॉ चिन्मय पण्ड्या जी अपने सात दिवसीय विदेश प्रवास के बाद आज स्वदेश लौटे।

हरिद्वार 12 जुलाई।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प...

Read More
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj