ADHYATMA
विज्ञान ने समस्याएँ सुलझाई कम, उलझाईं अधिक
विज्ञान की एक शाखा रसायनशास्त्र ने लाखों-करोड़ों कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों की खोज कर ली। इतनी औषधियाँ बन चुकी हैं कि डॉक्टर उन सबको याद भी नहीं रख सकता। जीव विज्ञान ने यहाँ तक पहल की कि सूक्ष्मतम जीवाणु (बैक्टीरिया) और विषाणु (वायरस) की सैकड़ों जातियों तक का पता लगा लिया। एनाटॉमी और फिजियोलॉजी ने मनुष्य शरीर की एक-एक हड्डी, एक-एक नस की बनावट और उनके कार्यों का पता लगाने में सफलता प्राप्त की। वनस्पति विज्ञान ने वृक्ष-वनस्पतियों में भी जीवन के अंश की शोध कर ली। भौतिक विज्ञान का तो कहना क्या? चंद्रमा, मंगल, शुक्र और बृहस्पति की दूरियाँ अब पृथ्वी में बसे पड़ोसी देशों की तरह होने जा रही हैं। वैज्ञानिक प्रगति के पीछे मानवीय पुरुषार्थ और पराक्रम की जो गाथाएँ छिपी पड़ी हैं, उन्हें जितना सराहा ...
विज्ञान और उसकी अस्थिरता
ईसा से 200 वर्ष पूर्व नीसिया के वैज्ञानिक ‘हिप्पार्कस’ ने बताया कि, “ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। अन्य ग्रह-उपग्रह उसके चारों ओर केंद्रीय शक्ति (एक्सेंट्रिक) कक्षाओं में— अधिचक्रों (एपिसाइकिल्स) में घूमते हैं।” प्रसिद्ध यूनानी वैज्ञानिक ‘टालेमियस’ (संक्षिप्त नाम टालेमी) ने इसी सिद्धांत को स्वीकार कर सौरमंडल की शोध की और 1028 ग्रह-नक्षत्रों को पृथ्वी के क्रम से इस तरह स्थापित किया कि बीच में पृथ्वी, दूसरे वृत्त में चंद्रमा, तीसरे में बुध, चौथे में शुक्र, पाँचवें में सूर्य, छठवें में मंगल, सातवें में बृहस्पति, आठवें में शनि, नवें में स्फटिकीय पिंड व तारे और दसवें में प्राइमम मोबाइल रखे। इसी आधार पर ही ज्योतिष शास्त्र का बहुचर्चित ग्रंथ 'अलमागेस्ट' तैयार किया गया था। 1400 वर्षों तक यह सिद्धां...
विज्ञान की अपूर्णताएँ
विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, प्रकाश, विद्युत्, ताप, चुंबक आदि से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ विज्ञान देता है, उसमें कामवासना की तरह का क्षणिक आकर्षण भी है; क्योंकि हम उससे कुछ शक्ति-सुविधा पाते और प्रसन्नता अनुभव करते हैं, किंतु जब हम जीव विज्ञान की ओर चलते हैं, तो पता चलता है कि यह जानकारियाँ नितांत एकांगी और भ्रमपूर्ण हैं। वह जीव चेतना के मूल उद्देश्य के बारे में कुछ नहीं बता पातीं।
उदाहरण के लिए जीवाणु (लिविंग आर्गनिज्म) को विज्ञान पूर्ण मानता है, चेतना सूक्ष्म से सूक्ष्मकण में भी विद्यमान है, यह एक महत्त्वपूर्ण जा...
विज्ञान की अपूर्णता और अस्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है। इस परिधि को किसी प्रकार कम महत्त्व का नहीं माना जा सकता। अन्य सभी प्राणी अपनी शारीरिक क्षमता भार से निर्वाह के साधन जुटाते रहने भर में सक्षम होते हैं, पर मनुष्य अगणित सुख-सुविधाओं का उपभोग करता है। उसे विज्ञान की उपलब्धि ही कहनी चाहिए। अग्नि का जलाना और उसका उपयोग करना जिस दिन मनुष्य ने जाना, उस दिन उसने प्रगति के एक नए लोक में प्रवेश किया। शक्ति का बहुत बड़ा द्वार उसके लिए यहीं से खुला। नोंकदार औजार, पहिया, कृषि, पशुपालन, आच्छादन जैसी वैज्ञानिक उपलब्धियों ने उसे नर-वानर के वर्ग से निकालकर प्राणियों का मुकटमणि ही बना दिया। चेतनात्...
