ADHYATMA
विज्ञान की अपूर्णताएँ
विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, प्रकाश, विद्युत्, ताप, चुंबक आदि से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ विज्ञान देता है, उसमें कामवासना की तरह का क्षणिक आकर्षण भी है; क्योंकि हम उससे कुछ शक्ति-सुविधा पाते और प्रसन्नता अनुभव करते हैं, किंतु जब हम जीव विज्ञान की ओर चलते हैं, तो पता चलता है कि यह जानकारियाँ नितांत एकांगी और भ्रमपूर्ण हैं। वह जीव चेतना के मूल उद्देश्य के बारे में कुछ नहीं बता पातीं।
उदाहरण के लिए जीवाणु (लिविंग आर्गनिज्म) को विज्ञान पूर्ण मानता है, चेतना सूक्ष्म से सूक्ष्मकण में भी विद्यमान है, यह एक महत्त्वपूर्ण जा...
विज्ञान की अपूर्णता और अस्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है। इस परिधि को किसी प्रकार कम महत्त्व का नहीं माना जा सकता। अन्य सभी प्राणी अपनी शारीरिक क्षमता भार से निर्वाह के साधन जुटाते रहने भर में सक्षम होते हैं, पर मनुष्य अगणित सुख-सुविधाओं का उपभोग करता है। उसे विज्ञान की उपलब्धि ही कहनी चाहिए। अग्नि का जलाना और उसका उपयोग करना जिस दिन मनुष्य ने जाना, उस दिन उसने प्रगति के एक नए लोक में प्रवेश किया। शक्ति का बहुत बड़ा द्वार उसके लिए यहीं से खुला। नोंकदार औजार, पहिया, कृषि, पशुपालन, आच्छादन जैसी वैज्ञानिक उपलब्धियों ने उसे नर-वानर के वर्ग से निकालकर प्राणियों का मुकटमणि ही बना दिया। चेतनात्...
