• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • अपने को पहचानो!
    • अखण्ड ज्योति के नियम
    • मनुष्य को देवता बनाने का प्रयत्न
    • धन्यवाद!
    • अखण्ड ज्योति के कुछ अमूल्य रत्न
    • प्रार्थना
    • प्रार्थना
    • अभेद्य रक्षित दुर्ग
    • Quotation
    • अमर बनने के उपाय
    • स्वप्न सिद्धि का अनुभव
    • भजन से रोग मुक्ति
    • धर्म का परिपालन
    • दुःख से सुख की उत्पत्ति
    • Quotation
    • स्वदेशी व्रत
    • जीवन संगीत
    • भक्ति-योग
    • Quotation
    • वेदों का अमर सन्देश
    • अहंभाव का प्रसार करो
    • आवश्यकताओं की पूर्ति
    • थूकने योग्य स्थान
    • इच्छा और सफलता
    • मन के संयम का अनुभव
    • आत्मविश्वास का अभाव
    • Quotation
    • आत्म शक्ति का विकास
    • धर्म प्रचारक की साधना
    • स्वर योग से रोग निवारण
    • माता की ममता
    • परलोकगत आत्माएँ कैसे सहायता करती हैं?
    • Quotation
    • साधकों के कुछ पत्र
    • माधव!
    • माधव!
    • अनुरोध
    • अनुरोध
    • उस ओर
    • उस ओर
    • समालोचना
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Magazine - Year 1941 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN


दुःख से सुख की उत्पत्ति

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 13 15 Last
(ले.—भारतेन्दु वेदालंकार गुरु कुल, सूपा)

प्रायः देखा जाता है कि मनुष्य दुःख अथवा अन्य किसी प्रकार की आपत्ति आने पर घबरा जाता है। उस समय उसका मन बहुत ही डाँवाडोल स्थिति में होता है, विवेक शक्ति नष्ट सी हो जाती है और उसे समझ नहीं आता कि मैं क्या करूं। यह तो मनुष्य का स्वभाव है, एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई है। इस सच्चाई के होते हुए भी हमें देखना है कि इस दुःख और आपत्ति से हमारी नैतिक उन्नति हो सकती है। यह हमारे लिए एक बहुत श्रेष्ठ एवं स्थायी सुख को जन्म देने वाला है, यदि हम यह सोचें कि यह दुःख हमें क्यों आया-इसका कारण क्या है? हम साधारण मानव इसके असली कारण को शायद न जान सकें, परन्तु इतना तो मालूम ही होता है कि हरेक अच्छे या बुरे कम का फल जरूर मिलता है। अच्छे का अच्छा फल-सुख तथा बुरे का बुरा फल-दुःख। कर्म फल का यह अटूट सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त को ध्यान में रख कर हम आये हुये दुःख या आपत्ति का कारण हमारे बुरे काम हैं, यह बात समझ जाएंगे। उदाहरणार्थ एक व्यक्ति को दस रुपये चुराये जाने पर या अमुक प्रिय वस्तु के गुम हो जाने पर दुःख होता है-वह रोता है और गई वस्तु पर बार-बार अफसोस करता है। परन्तु यदि वह उस समय यह समझ ले कि ये रुपये या वस्तु मैंने अधर्म से ली थी, इसी लिए मैं इसका उपभोग नहीं कर सका, जरूर ही किसी समय यह पाप किया होगा, क्योंकि उसका कारण होना ही चाहिये। इसी प्रकार संसार में हरेक दुःख और आपत्ति के समय धैर्यपूर्वक इसको सोचें, तो हमें ये दुःख, दुःख मालूम नहीं होंगे, परन्तु इसके विपरीत हमारा नैतिक जीवन बहुत ही उन्नत हो जायगा। हम असली सुख को पायेंगे। इस सुख की ओर बढ़ने के लिए हमें एक सूत्र याद रखना चाहिये और वह यह कि, ‘ईश्वर जो कुछ भी करता है, वह अच्छा ही करता है’। अर्थात् जो भी सुख या दुःख आता है, वह परमात्मा के न्यायानुसार होता है। अतः हमें उसको सहन करना चाहिये। ऐसा समझ लेने पर हम कभी भी किसी का रुपया, धन या अच्छी लगने वाली वस्तु को हड़पने या अधर्म से लेने को नहीं ललचाएंगे। हमारी प्रवृत्ति अधर्म (पाप) से हट कर धर्म (पुण्य) की और हो जायगी ओर इस प्रकार निश्चय ही हम सच्चे सुख और ऐश्वर्य के भागी बनेंगे। इसीलिये कहते हैं कि सुख या दुःख मन की कल्पना से बनाई हुई है, वास्तव में कोई वस्तु नहीं हैं। इसको हम ठीक-2 तभी समझ सकते हैं, जब इस सूत्र पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा हो—’ईश्वर जो कुछ करता है, वह अच्छा ही करता है’। यह है सुख की असली कुंजी।

First 13 15 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • अपने को पहचानो!
  • अखण्ड ज्योति के नियम
  • मनुष्य को देवता बनाने का प्रयत्न
  • धन्यवाद!
  • अखण्ड ज्योति के कुछ अमूल्य रत्न
  • प्रार्थना
  • प्रार्थना
  • अभेद्य रक्षित दुर्ग
  • Quotation
  • अमर बनने के उपाय
  • स्वप्न सिद्धि का अनुभव
  • भजन से रोग मुक्ति
  • धर्म का परिपालन
  • दुःख से सुख की उत्पत्ति
  • Quotation
  • स्वदेशी व्रत
  • जीवन संगीत
  • भक्ति-योग
  • Quotation
  • वेदों का अमर सन्देश
  • अहंभाव का प्रसार करो
  • आवश्यकताओं की पूर्ति
  • थूकने योग्य स्थान
  • इच्छा और सफलता
  • मन के संयम का अनुभव
  • आत्मविश्वास का अभाव
  • Quotation
  • आत्म शक्ति का विकास
  • धर्म प्रचारक की साधना
  • स्वर योग से रोग निवारण
  • माता की ममता
  • परलोकगत आत्माएँ कैसे सहायता करती हैं?
  • Quotation
  • साधकों के कुछ पत्र
  • माधव!
  • माधव!
  • अनुरोध
  • अनुरोध
  • उस ओर
  • उस ओर
  • समालोचना
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj