समालोचना
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तरुण-(मासिक पत्र) सम्पादक श्री कृष्ण नन्दन प्रसाद। प्राप्ति स्थान-तरुण कार्यालय, इलाहाबाद। (वार्षिक मूल्य 3) एक प्रति का।)
पत्र में तरुणों की समस्याओं पर गंभीरता पूर्वक चर्चा की जाती है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने योग्य काफी मसाला रहता है। अधिकारी लेखकों की मननीय रचनाएं इसमें रहती हैं। छपाई सफाई बहुत ही सुन्दर है।
शक्ति दर्शन-लेखक श्री शंकरलाल तिवारी प्रकाशक, प्राकृतिक स्वास्थ्य गृह 30 बाई का बाग इलाहाबाद पृष्ठ संख्या 156। मूल्य॥)
पुस्तक में मानसिक विकास और शारीरिक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में छोटे छोटे विचार हैं। अनेक विषयों पर थोड़ा थोड़ा प्रकाश डाला गया है। जो लिखा गया है, सुन्दर और पठनीय है।
आनन्दमय जीवन का ह्रास और उसके कारण-लेखक-श्री शंकरलाल तिवारी सागर। प्रकाशक प्राकृतिक स्वास्थ्य गृह 30 बाई का बाग इलाहाबाद पृष्ठ, संख्या 104 मुल्य। : )
इसमें उपरोक्त पुस्तक की तरह जीवन की गहरी समस्याओं पर स्फुट विचार है। लेखक का उत्साह और प्रकाशकों का प्रयत्न सराहनीय है। दोनों ही पुस्तकें पृष्ठ संख्या को देखते हुए सस्ती हैं। पाठकों को इन्हें अपनाना चाहिए।
कब्ज या कोष्ठ बद्धता-ले0-डॉक्टर बालेश्वर-प्रसाद सिंह, प्राकृतिक स्वास्थ्य गृह, 30 बाई का बाग, इलाहाबाद। प्रकाशक लीडर प्रेस प्रयोग पृष्ठ संख्या 64 मूल्य । ) 10 चित्र छपाई सफाई बहुत उत्तम।
डॉक्टर बोलश्वर प्रसार सिंह प्राकृतिक चिकित्सा शास्त्र के मर्मश हैं। उनके अनुभवों का यह सार बहुत ही खोज पूर्ण है। आज कल अधिकाँश मनुष्य कब्ज से पीड़ित रहते हैं। वे इस पुस्तक में बताये हुए प्राकृतिक उपायों को काम में लावें तो कोष्ठ बद्धता की महाव्याधि से छुटकारा पाकर दीर्घ जीवन प्राप्त कर सकते हैं। लेखन शैली ऐसी सरल और सुबोध है कि मामूली पढ़े लिखे लोग भी लाभ उठा सकते हैं। पुस्तक सर्वथा संग्रहणीय और माननीय है।
शरीर से अमर होने का उपाय-लेखक योगिराज मुनीश्वर पं0 शिवकुमार शास्त्री। प्रकाशक-ज्ञानशक्ति प्रेस गोरखपुर। पृष्ठ संख्या 170 मूल्य 1॥)
पुस्तक में बताया गया है, कि मनुष्य अपनी इच्छानुसार जीवन धारण करता है और इच्छानुसार ही मर जाता है। यदि वह मरना न चाहे तो न मरेगा। अपनी इच्छा शक्ति के बल पर वह शरीर सहित अमर हो सकता है। यदि योगिराज जी के सिद्धान्त व्यवहार रूप भी दृष्टि गोचर होने लगें तो संसार की सारी समस्याएं एक दूसरे ही ढांचों में ढल जावेंगी।
मैस्मेरिज्म वा भूत विद्या-लेखक और प्रकाशक उपरोक्त। पृष्ठ संख्या 72 मूल्य॥)
करामानी दर्पण, त्रिकालदर्शी अंगूठी, प्लेन चिट, भूत बाहिनी मेज आदि की आड़ में कई बार धूर्त लोग भी अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं, पुस्तक में उसकी चर्चा की गई है और बताया गया है, कि मैस्मरेजम योग का एक बहुत ही छोटा कौतुक है, जिसका आधार इच्छा शक्ति है।
आत्म बल, मनोबल और इच्छा शक्ति-लेखक और प्रकाशक उपरोक्त। पृष्ठ संख्या 118। मूल्य।
इस पुस्तक में ईश्वर, आत्मा, भाग्य, देवता आदि सब का मूल कारण इच्छा शक्ति को ही बताया गया है। अपनी इच्छानुसार मनुष्य चाहे जो कर सकने में स्वतन्त्र है, इस सिद्धान्त का प्रतिपादन खूबी के साथ किया गया है। लेखक के तर्क प्रशंसनीय हैं।
इस पुस्तक में ईश्वर, आत्मा, भाग्य, देवता आदि सब का मूल कारण इच्छा शक्ति को ही बताया गया है। अपनी इच्छानुसार मनुष्य चाहे जो कर सकने में स्वतन्त्र है, इस सिद्धान्त का प्रतिपादन खूबी के साथ किया गया है। लेखक के तर्क प्रशंसनीय हैं।
*समाप्त*

