नींबू की उपयोगिता
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(ले. श्री जयदत्त त्रिपाठी आयुर्वेद शास्त्री)
“नींबू” भारत का एक उत्तम फल है। यह थोड़ा बहुत भारत के सभी भागों में पाया जाता है। यह एक ऐसा फल है कि जिसके प्रयोग में किसी प्रकार का डर नहीं रहता। जब जहाँ जो भी चाहे, बेखटके व्यवहार करे; हानि की आशंका ही नहीं। किसी भी रूप में इसका प्रयोग कीजिए, सभी रीति से लाभ करता है। नींबू में कौन सा गुण नहीं इसका बताना कठिन है, यह फलों का सिरमौर, औषधि में प्राणदाता, भोजन की जान, सुन्दरता का साथी है। यह जितना लोकप्रिय तथा सहज प्राप्य फल है उतना और कोई फल नहीं है। गरीब और अमीर सभी के यहाँ मिल सकता है।
भोजन के साथ नींबू का सेवन भी बहुत लाभदायक है। नींबू की अनेक जातियों में से कागजी नींबू तो प्रायः हर अवस्था के आदमियों के लिए लाभकारी है। जहाँ कागजी नींबू न हो वहाँ कोई भी खट्टा नींबू ले सकते हैं। भोजन के बाद तथा रात के समय आधा नींबू गिलास भर पानी में निचोड़ कर पीने से कैसी भी मन्दाग्नि हो दूर हो जाती है। नींबू के रस के प्रभाव से विशूचिका तथा आंतरिक-ज्वर के कीटाणु शीघ्र नष्ट हो जाते है। उनमें जिगर की बीमारी या वात (गठिया) रोग में लाभ पहुँचाने की अपूर्व शक्ति होती है। पानी में नींबू की थोड़ी सी बूँदें मिलाकर एक प्याला रोज भी पी लेने से पेट के लिए अत्यंत हितकारी है। मेदा साफ रहता है और बदहजमी का रोग सहसा नहीं होता। कब्ज के मरीज को एक काँच या चीनी के प्याले में थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ और एक चुटकी सेंधा नमक डालकर प्रातः उठते समय तथा शाम को सोते समय पीने से थोड़े ही दिनों में आश्चर्य प्रद लाभ होता है। मौसमी बुखार के लिए नींबू बहुत ही उपयोगी है। दूध में नीबू निचोड़ कर रात को या प्रातःकाल मुख पर उबटन के रूप में उपयोग करने से चेहरे का रंग निखरता है। खूबसूरती बढ़ती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। सिर के बाल गिर जाते हों तो नींबू का टुकड़ा सिर पर घिसने से बाल गिरना रुकता है। सिर की अधिक पीड़ा में माथे पर नींबू घिसने से पीड़ा में शीघ्र आराम होता है। किसी जन्तु ने काटा हो तो उस जगह इसके रस की बूँदें लगाकर घिसने से आराम होता है। जुकाम हो, गला दुखता हो, कोष्ठबद्धता हो अथवा जोड़ों में दर्द हो तो नींबू बहुत हितकारी है। किन्तु नींबू के प्रयोग में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसका रस गुड़ में मिलाकर न खाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इसका प्रभाव बहुत बदल जाता है। इसका शरबत बहुत गुणकारी होता है। जिस समय शहर में कोई संक्रामक रोग फैल रहा हो उस समय रोजाना दिन में 2-3 बार नींबू का शरबत पी लेने से रोग के आक्रमण का भय नहीं रहता। क्योंकि नींबू अपने अद्भुत गुणों के कारण कृमि नाशक तो है ही, यह संक्रमण विरोधक भी है। यह विशूचिका, पेचिश, टाइफ़ाइड, संग्रहणी के कीटाणु नष्ट करता है। दाँत के रोगियों को पानी में नींबू निचोड़ कर कुल्ला करना और मलना अच्छा रहता है, यदि उसमें सोडा बाईकार्बोनेट भी मिला लिया जाय तो दाँतों का हिलना व दुखना बंद हो जाता है।
नींबू के रस में 89.30 प्रतिशत पानी होता है। यह प्रकृति का बनाया हुआ सबसे साफ जल है और दिमाग और खून को लाल कोषों का मुख्य योग्य होकर स्नायविक शक्ति के उत्पादन में उपयोगी होता है। 2.13 प्रतिशत सोडियम, 3.24 प्रतिशत चूना, 5.15 प्रतिशत मैग्नेशियम जो कि दाँतों की पालिश को कड़ापन देता है, फेफड़ों के रग रेशों की रक्षा करता है, शरीर के कोषों विशेषतः स्नायविक कोषों को बनाता है और खून को लाल रखता है। .11 प्रतिशत लोहा, 3.62 प्रतिशत तेजाब, 3.08 प्रतिशत गंधक और 0.48 प्रतिशत क्लोराइड तत्व होते हैं। इनके सिवाय .12 प्रोटीन व 0.1 प्रतिशत चर्बी होती है। यह ठीक है कि नींबू में चर्बी और प्रोटीन कुछ विशेष नहीं हैं, लेकिन ये दोनों चीजें अन्य खाद्यों में काफी और प्रायः अक्सर अंदाज से अधिक मिला करती हैं। 85 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और काफी तौर पर फास्फोरस भी पाया जाता है। श्वास क्रिया को ठीक रखने के लिए लेसिथीन बहुत आवश्यक है और लेसिथीन बनाने के लिए फास्फोरस चाहिए। इसलिए यह प्रत्यक्ष है कि फास्फोरस युक्त खाद्य दमा या खाँसी में ब्रोंकाइटिस बड़ा उपयोगी सिद्ध होता है। नींबू में कैल्शियम भी है जो कि दाँतों और हड्डियों की बनावट और मरम्मत में काम आता है। जीवन शक्ति भी इसमें बहुत होती है—विशेषकर विटामिन सी. तो इसमें बहुत ही अधिक मात्रा में पाया जाता है। नींबू में यों तो कई प्रकार के अम्ल विद्यमान हैं, किन्तु साइटिक अम्ल का प्रतिशत एक बड़े अंश में होता है।
कुछ विशेष उपयोग :- 1—शराब पीने के पश्चात् यदि नींबू का रस पी लिया जाय तो शराब का नशा नहीं चढ़ता।
2—यदि नींबू को सूँघा जाय तो नजला को दूर करता है और नजले को उत्पन्न नहीं होने देता।
3—सिर के दर्द हर—काले रंग की चाय में दूध के बजाय नींबू का रस डाल कर पीने से सिर का दर्द जाता रहता है। नींबू के सूँघने से गर्मी का सरदर्द जाता रहता है।
4—आँखों की फूली पर—नींबू के रस में हरे रंग की काँच की चूड़ी को महीन पीस कर फूले वाली आँख में लगाने से फूला और जाला कट जाता है।
5—नक्शीर पर—ताजा नींबू के रस को नाक से सूँघने से नक्शीर का आना तुरंत बंद हो जाता है। नक्शीर को बंद करने लिए इससे अच्छी और कोई दवा नहीं है।
6—कान दर्द पर—समुद्र-झाग को बारीक पीस कर थोड़ा चूर्ण कान में डाल दें। उसके ऊपर नींबू का रस डालने से एक प्रकार का जोश पैदा होगा— जिससे कान साफ होकर कान का दर्द दूर हो जाता है। यदि कान में जख्म हो—तो उपरोक्त प्रकार से कान साफ करके—फिर कोई तेल डालने से जख्म ठीक हो जावेगा।
7—हैजा पर—नींबू के रस में हैजे के कीड़े मारने की शक्ति है, इसलिए जो व्यक्ति नित्य नींबू के रस का सेवन करता है—उसे हैजा नहीं होता। नींबू का रस कै को रोकता है; प्यास को बंद करता है, भूख को बढ़ाता है, जिगर को साफ रखता और मेदे के मल को दूर करता है। हैजे के कीड़े नींबू के रस से 15 मिनट में दूर हो जाते हैं।

