• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • वेदों के स्वर्णिम सूक्त
    • पूजा का थाल (Kavita)
    • धर्म की मूल भूत एकता
    • अद्वैतवाद या सर्वेश्वरवाद
    • Quotation
    • नित्य प्रति के व्यवहार में असत्य का प्रयोग
    • सुखी होने का राजमार्ग
    • गीता और भावी वर्ण व्यवस्था
    • वेद ही भारतीय संस्कृति का मूल है।
    • जीवन को सुखी बनाने का सहज मार्ग-अपरिग्रह
    • प्रार्थना द्वारा अपना अभीष्ट सिद्ध कीजिए।
    • चिर यौवन का स्रोत
    • मनुष्य मात्र की समानता
    • सौंदर्य बनाम कुरूपता
    • आलस्य तो-छोड़िए ही।
    • पेट को कब्र मत बनाइए।
    • गायत्री महामंत्र की मूलभूत प्रेरणा
    • गायत्री उपासना के अनुभव
    • धर्मात्माओं के सराहनीय सत्प्रयत्न
    • Quotation
    • तपोभूमि समाचार
    • महादेव-महामानव
    • महादेव-महामानव (Kavita)
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Magazine - Year 1957 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN


महादेव-महामानव (Kavita)

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 26 28 Last
मैं त्रिशूल लेकर चलता हूँ, मेरे डमरू में विनाश है!

पर है चन्द्र भाल पर मेरे, वहाँ सुधा है, नव-प्रकाश है!

मेरा एक और लोचन है, जिस में सर्वनाश सोता है!

वह तो भी खुला करता है, जब मन अति विचलित होता है!

मैंने जग में बहा रखी है, अपने सर से सुरसरि धारा!

जिस में करके ॥न बहाया, करता पाप जगत् है सारा!

यश की होड़ लगी है, ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र आदिक सब भागे।

मैं तो इस कैलाश शिखर पर बैठा, रहा सभी से आगे।

मैंने नहीं छिपाई भूलें, मैं रहता हूँ खुल कर नंगा।

गौरी की तो बात कहूँ क्या, कभी नहीं शरमाई गंगा।

साथ पिशाचों के रहता हूँ, जो लाशों का लोहू पीते।

मेरी प्रिया चंडिका बनती, जिस से कभी न दानव जीते।

जिस दिन सिंधु मथा देवों ने, पाकर गरल सभी घबराए।

किस में इतनी शक्ति, गरल को पीले और पचाने पाए?

जिसे न जीने की इच्छा है, उसे अमृत की चाह रहे क्यों?

जो आवे पी डाले हँसकर, अपने मुँह से ‘नहीं’ कहे क्यों?

जो थे लड़े अमृत की खातिर, वे थे देव, और थे दानव।

जो औरों का विष पी लेता, मैं हूँ महादेव- मैं मानव।

मैं चलता हूँ बैठ वृषभ पर, जिसके सर पर जुआ जगत् का।

जिसकी प्रिया दूध देती है, घटा रहा जो मान अमृत का।

मुझ को सब के शिशु प्यारे हैं, गया नंद के घर भिक्षुक बन।

मुझे ईश के दर्शन मिलते, मानव के सुत के कर दर्शन।

मुझे लोग ईश्वर भी कहते, पर मैं उसका एक पुजारी।

है बर्फीली गहन गुफा में, बैठ साधना मेरी जारी।

परशुराम हो, या कि राम हो, या रावण हो, सब मेरे हैं।

मैं तो उनका हूँ जो मुझ से, आकर कहते हम तेरे हैं।

मेरे बसुँधरा से उर में, दोनों ही हैं आग व पानी।

मेरी आँखों में दोनों हैं, पानी और तड़ित दीवानी।

मैं जग को वैभव देता हूँ, स्वयं दिगंबर रहने वाला।

मैं फूलों की नहीं पहनता, कभी-कभी मुँडों की माला।

(श्री हरिकृष्ण ‘प्रेमी’)

*समाप्त*

First 26 28 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • वेदों के स्वर्णिम सूक्त
  • पूजा का थाल (Kavita)
  • धर्म की मूल भूत एकता
  • अद्वैतवाद या सर्वेश्वरवाद
  • Quotation
  • नित्य प्रति के व्यवहार में असत्य का प्रयोग
  • सुखी होने का राजमार्ग
  • गीता और भावी वर्ण व्यवस्था
  • वेद ही भारतीय संस्कृति का मूल है।
  • जीवन को सुखी बनाने का सहज मार्ग-अपरिग्रह
  • प्रार्थना द्वारा अपना अभीष्ट सिद्ध कीजिए।
  • चिर यौवन का स्रोत
  • मनुष्य मात्र की समानता
  • सौंदर्य बनाम कुरूपता
  • आलस्य तो-छोड़िए ही।
  • पेट को कब्र मत बनाइए।
  • गायत्री महामंत्र की मूलभूत प्रेरणा
  • गायत्री उपासना के अनुभव
  • धर्मात्माओं के सराहनीय सत्प्रयत्न
  • Quotation
  • तपोभूमि समाचार
  • महादेव-महामानव
  • महादेव-महामानव (Kavita)
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj