• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • आकांक्षाएं उचित और सोद्देश्य हों
    • ईमानदारी विवेक की कसौटी पर
    • सफलताओं का मूलभूत आधार—लगन एवं उत्कट अभिलाषा
    • नियमितता का अभ्यास—एक श्रेष्ठ गुण
    • वैभव नहीं महानता कमायें
    • सम्पदाएं सत्कार्यों में नियोजित हों
    • चरित्र एक सर्वोपरि सम्पदा
    • व्यक्तित्व की कसौटी-आदर्शनिष्ठा
    • बड़प्पन का मापदण्ड—सादगी और शालीनता
    • शालीनता और सदाशयता को प्रश्रय मिले
    • गायत्री यज्ञ अभियान
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Books - बड़े आदमी नहीं महामानव बनें

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN EPUB KINDLE


बड़प्पन का मापदण्ड—सादगी और शालीनता

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 8 10 Last

सामान्य जनों की बड़प्पन की परिभाषा यह है कि अधिक से अधिक लोगों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो। ज्यादा लोग उनकी चर्चा करें। इसके लिए वे फैशन, सजधज, ठाट-बाट, और अमीरों जैसा खर्च करके लोगों पर यह प्रभाव जमाने की असफल चेष्टा करते हैं कि वे विशिष्ट हैं। परोक्ष रूप में इस सजधज के पीछे यह आग्रह रहता है कि उनकी विशेष स्थिति को स्वीकार किया जाये, उनके बारे में बार-बार सोचा जाये। यह उद्देश्य पूरा करने के लिए जितना आडम्बर रचना पड़ता है, जितना सरंजाम जुटाना पड़ता है और जितना समय खर्च करना पड़ता है, उसे सामान्य रूप से नहीं किया जा सकता। उसके लिए असामान्य तरीके अपनाने पड़ते हैं। अतिरिक्त साधन जुटाने के लिए सीधे तरीकों से तो काम नहीं चलता। उसके लिए अपनानी पड़ती है—धूर्तता, नाटकीयता, उच्छृंखलता, आडम्बर और पाखण्ड। क्योंकि इतने साधन और सरंजाम बिना छद्म नीति अपनाये तो जुटाये नहीं जा सकते, इतना बड़ा ढांचा बिना बेईमानी किये तो खड़ा नहीं किया जा सकता, जिसे कि लोग घूर-घूर कर देखें और उस सम्बन्ध में बार-बार सोचें।

लोग यह भूल जाते हैं कि बड़प्पन और महानता केवल सादगी तथा शालीनता अपनाने से ही प्राप्त होती है। यह बात अलग है कि सीधी, सरल और सज्जनता की नीति अपनाकर तत्काल ही चर्चा का विषय नहीं बना जा सकता। इसमें देर लगती है, परन्तु बड़ा बनने का राजमार्ग यही है। महानता या बड़प्पन वट वृक्ष की तरह हैं, जिसका विकास क्रमबद्ध ढंग से ही होता है। उसकी अभिवृद्धि एवं सुरक्षा के लिए लम्बे समय तक तत्परता और सतर्कता का खाद पानी मिलना चाहिए। जिन्हें वाहवाही की आतुरता है, वे इतनी प्रतीक्षा क्यों करेंगे और सज्जनता एवं प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए कष्ट क्यों सहेंगे? आतुरता के लिए इतने महंगे मूल्य पर वाहवाही खरीद सकना कठिन ही है। उसके लिए धूर्तता ही सरल उपाय रह जाता है। उसमें कहीं कोई त्याग करने या शौर्य, साहस प्रदर्शित करने की आवश्यकता पड़ती है तो वह नाटकीयता और उच्छृंखलता के ऐसे तरीके अपनाने भर से पूरी हो जाती है जो सर्वसाधारण के स्वभाव में सम्मिलित नहीं है। ऐसे काम जिनमें दूसरों की हानि में भी अपने लाभ की दृष्टि प्रमुख रखी जाती है अनैतिक ही कहे जायेंगे। अनैतिक न सही क्षुद्रता से भरे तो होते ही हैं। उन्हें ओछे, बचकाने एवं छिछोरे भी कहा जा सकता है। नाटकीय सजधज बनाने वाले लोग प्रायः ऐसी आत्महीनता से ग्रस्त होते हैं।

इस तरह की आत्महीनता से ग्रस्त लोगों की क्षुद्रता का मनोरंजक वर्णन अंग्रेजी उपन्यासकार सामरसेट माम ने अपनी पुस्तक ‘दि सामंग अप’ में किया है। इस पुस्तक में माम ने ऐसे बचकाने लोगों की मनःस्थिति, तर्क एवं मान्यताओं का विवरण देते हुए उन पर करारा व्यंग किया है और यह भी बताया है कि ऐसे आतुर व्यक्ति ही आतंकवादी बनते, उद्धत आचरण करते और गुण्डागर्दी अपनाते हैं। यहां तक कि अपराधी बन कर फांसी पर चढ़ने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। चर्चा बुरी ही क्यों न हो, पर होनी अवश्य चाहिए, यह उनकी धारणा होती है। अनेकों आततायी और अपराधी किसी अभाव के कारण नहीं बल्कि इसी उद्धत ओछेपन से पीड़ित होकर कुकृत्य करने पर उतारू हो जाते हैं और अपनी गणना शूरवीरों में कराने की सनक लेकर इस कदर अनाचार-दुराचार करने की पैशाचिकता अंगीकार करते हैं।

कई लोग अपनी शक्ति और प्रभाव की सार्थकता इसी बात में समझते हैं कि उसके द्वारा वे दूसरों को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह एक भ्रान्त धारणा ही कही जाएगी कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता का नाम शक्ति है। ऐसे कृत्य प्रायः लुक छिपकर ही किये जाते हैं। असावधान व्यक्ति पर छिपकर पीछे से हमला करके तो कोई अदना सा आदमी भी किसी सशक्त व्यक्ति के प्राण हरण कर सकता है। पीठ पीछे से वार करने में क्या दिक्कत है? विश्वास घात करने की धूर्तता में कौन-सा बड़प्पन है? इसकी तुलना में सज्जनता और शालीनता से दूसरों को प्रभावित करने की रीति-नीति अपनाई जाये तो यह अनुभव का ही विषय है कि वह कितनी असरकारक होती है और यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि बड़प्पन के लिए जिस सज्जनता की आवश्यकता पड़ती है वह नाटकीयता, बनावटीपन से पूरी नहीं होती, बल्कि उसे स्वभाव का, चरित्र का एक अंग बनाना होता है। यह काम समय और श्रम साध्य ही नहीं है, इसके लिए आदर्शवादिता पर दृढ़ रहने का मनोबल आत्मबल भी चाहिए। कहना नहीं होगा कि इस स्तर का बड़प्पन साधनात्मक जीवन अपना कर ही प्राप्त किया जा सकता है।

सौजन्यता और शालीनता को कुंठित करने वाले कई कुसंस्कार हैं जो हमें असभ्य और भ्रष्ट बनाते चले जाते हैं। दूसरों को छोटा बनाकर अपने आपको बड़ा सिद्ध करने का तरीका गलत है। सच्चाई की दृष्टि से औरों से आगे बड़ा जाए यही स्वस्थ प्रतियोगिता है। श्रेष्ठता की प्रतियोगिता में आगे निकलने के उत्साह को सराहा जा सकता है, पर साथियों को लात मार कर गिरा देना और इस स्थिति का लाभ उठा कर अपने को विजेता घोषित करना न तो सराहनीय है तथा न ही यथेष्ट। इसी प्रकार अपनी वर्तमान स्थिति से खीझे रहना भी शील सौजन्य के विपरीत है। जो उपलब्ध है उस पर प्रसन्नता भरा सन्तोष अनुभव करें और साथ ही आगे बढ़ने का उत्साह भी जारी रखें। इतना कर लिया जाये तो प्रसन्न रहने और शील सदाचार का पालन करने के लिए पर्याप्त है किन्तु जो सदा असन्तुष्ट ही रहते हैं, खीझते रहते हैं उनकी खीझ और खिन्नता उनकी शक्तियों को नष्ट करती है।

अहंकार व्यक्ति को दूसरों से प्राप्त होने वाली सद्भावनाओं से वंचित करता है। दूसरों का व्यंग उपहास करके कई व्यक्ति अपना बड़प्पन सिद्ध करने की चेष्टा करते हैं। कई सम्वेदन शून्य सहानुभूति रहित और निर्भय प्रकृति के व्यक्ति दूसरों की स्थिति समझे बिना ही उनके व्यवहार और आचरण पर उलटी-सीधी टिप्पणियां करते रहते हैं। उन्हें दूसरों की स्थिति समझने का अवकाश ही नहीं रहता और न उनका हृदय इतना विशाल होता है कि किस कारण किस पर क्या बीत रही है? यह अनुभव कर सके। इन प्रवृत्तियों के रहते उस शील सौजन्य का विकास नहीं हो सकता, जिससे मनुष्य अपनी तथा दूसरों की आंखों में ऊंचा उठता तथा सम्मानित बनता हो।

यदि तत्काल बड़प्पन पाने या बड़ा बनने की आतुरता न हो और सम्पर्क क्षेत्र में अपने लिए भावभरा सम्मान प्राप्त करने की सच्ची आकांक्षा हो तो उसका सुनिश्चित मार्ग है सज्जनता अपनाई जायें। अपने सम्पर्क क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से व्यवहार सहानुभूतिपूर्ण रखा जाए। व्यवहार और आचरण न्याय संगत रहें। यदि स्वार्थों में कहीं कोई टकराव होता हो, पीछे हटने से थोड़ा बहुत घाटा भी पड़ता हो तो उसे सह लिया जाये किन्तु सद्भाव गंवा देने की क्षति ऐसी है जो अन्ततः अधिक घाटे को सिद्ध होगी। जब तक टकराव का कोई बहुत ही बड़ा कारण न हो, सामने वाले का पथ अनैतिकतापूर्ण न हो तब तक व्यवहार कुशलता इसी में है कि सद्भावों को बनाये ही रखा जाये।

सौजन्यता का प्रभाव निजी जीवन में सादगी के रूप में दीखता है और व्यवहार क्षेत्र में वह विनयशीलता के रूप में दिखाई पड़ता है। उसमें दूसरों के सम्मान का भाव है न कि छोटापन प्रदर्शित करने का। किसी का सम्मान करने का अर्थ है बदले में उसका सम्मान पाना। दूसरे कम कीमत में सम्मान पाने की बात बन ही नहीं सकती। सादगी से रहा जाए, शालीनता बरती जाये और दूसरों को सन्तुष्ट रख कर उन पर अपना प्रभाव छोड़ने की कला सीखी जाये, इससे बढ़कर अपने आपको बड़ा बनाने ऊंचा उठाने का कोई श्रेष्ठ उपाय है ही नहीं। 

First 8 10 Last


Other Version of this book



बड़े आदमी नहीं महामानव बनें
Type: TEXT
Language: HINDI
...

बड़े आदमी नही महामानव बनें
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books



जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: SCAN
Language: HINDI
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: TEXT
Language: HINDI
...

જીવન સાધનાનાં સોનેરી સૂત્રો
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

मन: स्थिति बदले तो परिस्थिति बदले
Type: TEXT
Language: HINDI
...

मनस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले
Type: SCAN
Language: HINDI
...

મન: સ્થિતિ બદલો તો પરિસ્થિતિ બદલાશે
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

The Summum Bonum of Human Life
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

தவ வாழ்க்கைக்கான
Type: SCAN
Language: TAMIL
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: SCAN
Language: HINDI
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: TEXT
Language: HINDI
...

જીવન સાધનાનાં સોનેરી સૂત્રો
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

સિદ્ધિદાત્રી વાક઼્સાધના
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

सिद्धिदात्री वाक्-साधना
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मित्रभाव बढ़ाने की कला
Type: TEXT
Language: HINDI
...

मित्रभाव बढ़ाने की कला
Type: SCAN
Language: HINDI
...

માનવ જીવન એક અમૂલ્ય ઉપહાર
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

मानव जीवन : एक बहुमूल्य उपहार
Type: SCAN
Language: HINDI
...

समग्र प्रगति सहकारिता पर निर्भर
Type: SCAN
Language: HINDI
...

शिष्ट बनें सज्जन कहलायें
Type: SCAN
Language: HINDI
...

शिष्ट बनें सज्जन कहलायें
Type: TEXT
Language: HINDI
...

why suicide
Type: TEXT
Language: ENGLISH
...

Why Suicides ?
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

शिष्टाचार और सहयोग
Type: SCAN
Language: HINDI
...

தவ வாழ்க்கைக்கான
Type: SCAN
Language: TAMIL
...

Articles of Books

  • आकांक्षाएं उचित और सोद्देश्य हों
  • ईमानदारी विवेक की कसौटी पर
  • सफलताओं का मूलभूत आधार—लगन एवं उत्कट अभिलाषा
  • नियमितता का अभ्यास—एक श्रेष्ठ गुण
  • वैभव नहीं महानता कमायें
  • सम्पदाएं सत्कार्यों में नियोजित हों
  • चरित्र एक सर्वोपरि सम्पदा
  • व्यक्तित्व की कसौटी-आदर्शनिष्ठा
  • बड़प्पन का मापदण्ड—सादगी और शालीनता
  • शालीनता और सदाशयता को प्रश्रय मिले
  • गायत्री यज्ञ अभियान
Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts

Report website issues at -
websupport@awgp.org

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj