• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • यज्ञाग्नि की शिक्षा तथा प्रेरणा
    • यज्ञ में पालन करने योग्य नियम
    • ब्रह्मदेव कृत सामूहिक यज्ञ
    • हवन सम्बन्धी कुछ आवश्यक बातें
    • हवन सामाग्री
    • समिधाएँ
    • यज्ञ का मुहूर्त
    • कुण्ड एवं मण्डप निर्माण
    • कुण्डों की रचना तथा भिन्नता
    • कुण्डों की संख्या
    • यज्ञीय पदार्थ तथा पात्र परिचय
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Books - गायत्री यज्ञ विधान

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT TEXT


हवन सामाग्री

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 4 6 Last
    
प्रत्येक ऋतु में आकाश में भिन्न-भिन्न प्रकार के वायुमण्डल रहते हैं । सर्दी, गर्मी, नमी, वायु का भारी पन, हलकापन, धूल, धुँआ, बर्फ आदि का भरा होना । विभिन्न प्रकार के कीटणुओं की उत्पत्ति, वृद्धि एवं समाप्ति का क्रम चलता रहता है । इसलिए कई बार वायुमण्डल स्वास्थ्यकर होता है । कई बार अस्वास्थ्यकर हो जाता है । इस प्रकार की विकृतियों को दूर करने और अनुकूल वातावरण उत्पन्न करने के लिए हवन में ऐसी औषधियाँ प्रयुक्त की जाती हैं, जो इस उद्देश्य को भली प्रकार पूरा कर सकती हैं । वर्षा में हैजा, दस्त, फुन्सी, खुजली, आदि रोग फैलते हैं, शरद ऋतु में मलेरिया, जूड़ी, हड़फूटन, शिरदर्द आदि का जोर चलता है । शीत ऋतु में वातरोग, दर्द, खाँसी, जुकाम, निमोनियाँ आदि बढ़ते हैं, गर्मियों में लू लगना, दाह, दिल की धड़कन, कब्ज आदि की अधिकता रहती है । क्योंकि इस समय वायुमण्डल में वैसे ही तत्वों की अधिकता रहती है । हवन के धूम से आकाश की आवश्यक सफाई हो जाती है । हानिकारक पदार्थ नष्ट होते और लाभदायक तत्व बढ़ते हैं । फलस्वरूप वायुमण्डल सब किसी के लिए आरोग्य वर्धक हो जाती है ।

किस ऋतु में किन वस्तुओं का हवन करना लाभदायक है, और उनकी मात्रा किस परिणाम से होनी चाहिए, इसका विवरण नीचे दिया जाता है । पूरी सामग्री की तोल १०० मान कर प्रत्येक ओषधि का अंश उसके सामने रखा जा रहा है । जैसे किसी को १०० छटांक सामग्री तैयार करनी है, तो छरीलावा के सामने लिखा हुआ २ भाग (छटांक) मानना चाहिए, इसी प्रकार अपनी देख-भाल कर लेनी चाहिए । बहुआ खोटे दुकानदार सड़ी-गली, घुनी हुई, बहुत दिन की पुरानी, हीन वीर्य अथवा किसी की जगह उसी शकल की दूसरी सस्ती चीज दे देते हैं । इस गड़बड़ी से बचने का पूरा प्रयत्न करना चाहिए । सामग्री को भली प्रकार धूप में सुखाकर उसे जौकुट कर लेना चाहिए ।

बसन्त-ऋतु
छरीलावा २ भाग, पत्रज २ भाग, मुनक्का ५ भाग, लज्जावती एक भाग, शीतल चीनी २ भाग, कचूर २.५ भाग, देवदारू ५ भाग, गिलोय ५ भाग, अगर २ भाग, तगर २ भाग, केसर १ का ६ वां भाग, इन्द्रजौ २ भाग, गुग्गुल ५ भाग, चन्दन (श्वेत, लाल, पीला) ६ भाग, जावित्री १ का ३ वां भाग, जायफल २ भाग, धूप ५ भाग, पुष्कर मूल ५ भाग, कमल-गट्टा २ भाग, मजीठ ३ भाग, बनकचूर २ भाग, दालचीनी २ भाग, गूलर की छाल सूखी ५ भाग, तेज बल (छाल और जड़) २ भाग, शंख पुष्पी १ भाग, चिरायता २ भाग, खस २ भाग, गोखरू २ भाग, खांस या बूरा १५ भाग, गो घृत १० भाग ।

ग्रीष्म-ऋतु
तालपर्णी १ भाग, वायबिडंग २ भाग, कचूर २.५ भाग, चिरोंजी ५ भाग, नागरमोथा २ भाग, पीला चन्दन २ भाग, छरीला २ भाग, निर्मली फल २ भाग, शतावर २ भाग, खस २ भाग, गिलोय २ भाग, धूप २ भाग, दालचीनी २ भाग, लवङ्ग २ भाग, गुलाब के फूल ५॥ भाग, चन्दन ४ भाग, तगर २ भाग, तम्बकू ५ भाग, सुपारी ५ भाग, तालीसपत्र २ भाग, लाल चन्दन २ भाग, मजीठ २ भाग, शिलारस २.५० भाग, केसर १ का ६ वां भाग, जटामांसी २ भाग, नेत्रवाला २ भाग, इलायची बड़ी २ भाग, उन्नाव २ भाग, आँवले २ भाग, बूरा या खांड १५ भाग, घी १० भाग ।

वर्षा-ऋतु
काला अगर २ भाग, इन्द्र-जौ २ भाग, धूप २ भाग, तगर २ भाग देवदारु ५ भाग, गुग्गुल ५ भाग, राल ५ भाग, जायफल २ भाग, गोला ५ भाग, तेजपत्र २ भाग, कचूर २ भाग, बेल २ भाग, जटामांसी ५ भाग, छोटी इलायची १ भाग, बच ५ भाग, गिलोय २ भाग, श्वेत चन्दन के चीज ३ भाग, बायबिडंग २ भाग, चिरायता २ भाग, छुहारे ५भाग, नाग केसर २ भाग, चिरायता २ भाग, छुहारे ५ भाग, संखाहुली १ भाग, मोचरस २ भाग, नीम के पत्ते ५ भाग, गो-घृत १० भाग, खांड या बूरा १५ भाग,

शरद्-ऋतु
सफेद चन्दन ५ भाग, चन्दन सुर्ख २ भाग, चन्दन पीला २ भाग, गुग्गुल ५ भाग, नाग केशर २ भाग, इलायची बड़ी २ भाग, गिलोय २ भाग, चिरोंजी ५ भाग, गूलर की छाल ५ भाग, दाल चीनी २ भाग, मोचरस २ भाग, कपूर कचरी ५ भाग पित्त पापड़ा २ भाग, अगर २ भाग, भारङ्गी २ भाग, इन्द्र जौ २ भाग, असगन्ध २ भाग, शीतल चीनी २ भाग, केसर १ का ६ वां भाग, किशमिस ६ भाग, वालछड़ ५ भाग, तालमखाना २ भाग, सहदेवी १ भाग,धान की खील २ भाग, कचूर २.७५ भाग, घृत १० भाग, खांड या बूरा १५ भाग ।

First 4 6 Last


Other Version of this book



gytri yagya vidhan part 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

गायत्री यज्ञ विधान
Type: TEXT
Language: HINDI
...


Releted Books



પરિવર્તનની મહાન ક્ષણ
Type: SCAN
Language: EN
...

The Great Moments of Change
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

परिवर्तन के महान क्षण
Type: SCAN
Language: EN
...

परिवर्तन के महान् क्षण
Type: TEXT
Language: EN
...

परिष्कृत अध्यात्म हमारे जीवन में उतरे
Type: SCAN
Language: HINDI
...

પરિષ્કૃત અધ્યાત્મ આપણા જીવનમાં ઉતરે
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

જીવન સાધનાનાં સોનેરી સૂત્રો
Type: SCAN
Language: EN
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: TEXT
Language: EN
...

தவ வாழ்க்கைக்கான
Type: SCAN
Language: EN
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: SCAN
Language: EN
...

మానసిక సంతులనం
Type: SCAN
Language: TELUGU
...

Mental Balance
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

மன சமநிலை
Type: SCAN
Language: TAMIL
...

मन: स्थिति बदले तो परिस्थिति बदले
Type: TEXT
Language: EN
...

મન: સ્થિતિ બદલો તો પરિસ્થિતિ બદલાશે
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

मनस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले
Type: SCAN
Language: EN
...

गायत्री साधना से कुण्डलिनी जागरण
Type: TEXT
Language: HINDI
...

गायत्री साधना से कुण्डलिनी जागरण
Type: SCAN
Language: HINDI
...

गायत्री साधना के दो स्तर
Type: TEXT
Language: HINDI
...

गायत्री सर्वतोन्मुखी समर्थता की अधिष्ठात्री
Type: TEXT
Language: HINDI
...

ઇન્દ્રિય સંયમ
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

इंद्रिय संयम
Type: SCAN
Language: HINDI
...

इन्द्रिय संयम
Type: TEXT
Language: HINDI
...

प्रज्ञा परिजनों में नव जीवन संचार
Type: SCAN
Language: HINDI
...

Articles of Books

  • यज्ञाग्नि की शिक्षा तथा प्रेरणा
  • यज्ञ में पालन करने योग्य नियम
  • ब्रह्मदेव कृत सामूहिक यज्ञ
  • हवन सम्बन्धी कुछ आवश्यक बातें
  • हवन सामाग्री
  • समिधाएँ
  • यज्ञ का मुहूर्त
  • कुण्ड एवं मण्डप निर्माण
  • कुण्डों की रचना तथा भिन्नता
  • कुण्डों की संख्या
  • यज्ञीय पदार्थ तथा पात्र परिचय
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj