Saturday 08, November 2025
मन को शांत करने के लिये प्रार्थना, शान्ति कीजिए, शान्ति कीजिए | Man Ko Shant Karne Ki Prarthna
जब ईश्वर साथ है तो मनुष्य पर निर्भर क्यों? | महात्मा और बादशाह की प्रेरक कहानी
“सोने नहीं… प्रतिभा का दीपक! | प्रेरणादायक कहानी | सीख जो जीवन बदल दे”
सच्चे कथावाचक पद्यनाभ | Sacche kathavachak Padamnath | #shots #Motivational #story
कर्म का फल | Karm Ka Phal
गायत्री के पांच मुख पांच दिव्य कोश | गायत्री की पंचकोशी साधना एवं उपलब्धियां | Rishi Chintan
अमृत सन्देश:- अन्त सोचोंगे तो जीवन सुधरेगा । Ant Sochoge To Jivan Sudhrega पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 08 November 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी:- क्या आप जानते हैं आप कौन हैं परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आप और हम उसकी किरणें हैं, किसकी? प्राची की। प्राची कौन? भारतीय संस्कृति। भारतीय संस्कृति की किरणें हैं आप। हिंदुस्तान में रहते हैं या हिंदुस्तान से बाहर रहते हैं, इससे क्या लेना-देना। आप तो भारतीय संस्कृति के अनुयायी हैं ना। आप नागरिक कहाँ के हैं, देश की दृष्टि से, सिटीजन कहाँ के हैं, मैं क्या कहूँ आपसे। आप तो भारतीय संस्कृति के पुत्र हैं और वही रहेंगे।
आपकी ऋषियों में, आपकी नसों में ऋषियों का खून था और वह ज्यों का त्यों बना रहेगा। आप ज़मीन के किसी कोने पर रहिए, किसी मुल्क में रहिए, किसी की सिटीजनशिप ले लीजिए, कोई धंधा कीजिए, इससे क्या बनता-बिगड़ता है। आपके ऊपर बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं और बड़ी जिम्मेदारियों की आगाही करने के लिए हम लोग आपकी सेवा में हाज़िर हुए हैं।
स्वामी प्रज्ञानंद आपके पास बार-बार चक्कर काटते हैं। क्यों काटते हैं? उनका कोई अपना काम है क्या? ना, अपना काम नहीं है। भारतीय संस्कृति के संदेशवाहक के रूप में, सतयुग की वापसी के संदेशवाहक के रूप में, इंसानी उज्ज्वल भविष्य के संदेशवाहक के रूप में वह दौड़-दौड़कर आपके पास आते हैं अथवा भेजे जाते हैं। भगवान भेजता है या हम भेजते हैं या उनकी अंतरात्मा भेजती है, बहरहाल किसी न किसी मजबूरी से आपकी सेवा में वह बार-बार उपस्थित होते हैं।
यह बताने के लिए कि आप महान हैं, आपकी संस्कृति महान है, आपकी परंपराएँ महान हैं और उस महान परंपरा को आपको ज़िंदा रखना ही रखना है। इसीलिए ज़िंदा रखना है कि न केवल हिंदुस्तान में, बल्कि सारे संसार भर में जो हवा पैदा की जाने वाली है, फिज़ा पैदा की जाने वाली है, वह आप लोगों के द्वारा ही तो होगी। और कौन करेगा, बताइए।
आप इंग्लैंड में रहते हैं, इंग्लैंड में यहाँ भारतवासी कैसे पहुँच पाएँगे, वह आपको ही तो उठाना है। आप हॉलैंड में रहते हैं, आप जर्मनी में रहते हैं, आप स्विट्ज़रलैंड में रहते हैं, आप यूरोप के किसी हिस्से में रहते हैं, वहाँ की जिम्मेदारियाँ हम कैसे संभाल पाएँगे। इतनी दूर जाकर के वह सारा काम अब आपको हमारे राजदूत के रूप में वहीं करना पड़ेगा।
आप कहाँ रहते हैं? अफ्रीका में रहते हैं, केन्या में रहते हैं, युगांडा में रहते हैं, तंज़ानिया में रहते हैं, ज़ाम्बिया में रहते हैं, रोडेशिया में रहते हैं। आप कहाँ रहते हैं, किसी जगह भी रहते हैं। अफ्रीका में रहते हैं तो क्या हुआ? अफ्रीका हिंदुस्तान से कहीं बाहर है क्या?
आप कनाडा में रहते हैं, आप कैलिफ़ोर्निया में रहते हैं, आप सूरीनाम में रहते हैं, आप ट्रिनिडाड में रहते हैं, कहीं भी रहते हैं, न्यूयॉर्क में रहते हैं, अमेरिका के किसी हिस्से में रहते हैं, इससे क्या हुआ। आप हैं तो प्रवासी भारतीय। आप हैं तो भारतीय संस्कृति के पक्षधर। आप हैं तो वह जिम्मेदार आदमी, जिसको हम चाहे और आप चाहे तो आपको राजदूत कह सकते हैं।
परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
गायत्री खतरे की घंटी है, चौराहे पर खड़ी पुलिस है। वह बताती है कि पाप की ओर मत चलो। ईश्वर सर्व व्यापक है, वह किसी का पक्षपात नहीं करता, उससे तुम्हारा कोई पाप छिपा नहीं रह सकता। और तुम किसी पाप के प्रतिफल से बच नहीं सकते। ‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ के अक्षर निरन्तर हमें यही शिक्षा देते हैं। रेल की पटरी के किनारे पर जो सिग्नल खड़े होते हैं, वे बताते हैं कि किधर जाना चाहिए किधर नहीं।
यदि सिग्नल का आदेश न मानकर कोई ड्राइवर अपनी रेल गाड़ी को मनमानी रीति से दौड़ा ले जाय तो परिणाम कितना भयंकर होगा, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। वह रेल किसी से टकरा जायगी या उलट जायेगी और ड्राइवर को अपनी हेकड़ी का नतीजा भोगना पड़ेगा। गायत्री का सिग्नल हमें सावधान करता है कि अपनी जीवन नीति की रेल को सही मार्ग पर ले चलो अन्यथा अपने स्वाभाविक सुखों से हाथ धोना और दुखों की यातनाओं से पीड़ित होना पड़ेगा।
गायत्री के प्रथम चरण में दूसरों के प्रति आत्मीयता, ममता, प्रेम, उदारता, ईमानदारी, सेवा एवं मधुरता का व्यवहार करने की शिक्षा जिसके अन्तःकरण में विराज गई होगी, माता ने जिसको अपने प्रथम चरण का स्पर्श करने दिया होगा, वह अनेक सामाजिक कष्टों से अनायास ही छूट गया होगा।
अपने कुटुम्बियों, पड़ौसियों, समीपवर्ती लोगों, के साथ यदि विरोध, मनोमालिन्य, द्वेष, संघर्ष, कलह, चलता हो तो वे हमें इतना सहयोग नहीं देंगे जितना कि देना चाहिए। जबकि उनकी सद्भावना की आशा की जाती है, तब भी वह प्राप्त नहीं होगी। इसके अतिरिक्त वे विरोधी होने के कारण तरह-तरह की बाधाएं उत्पन्न करते रहेंगे और हानि पहुँचाने वाले आयोजन, षड़यन्त्र या आक्रमण करने का जब भी उन्हें अवसर मिलेगा, न चूकेंगे। मुकदमा, फौजदारी, चोरी, डकैती, कत्ल, बहिष्कार, अपमान, शिकायत, चुगली, निन्दा, दोष प्रदर्शन आदि हानियाँ अकस्मात तो कभी कभी ही होती है, अधिकाँश उनके पीछे पुरानी शत्रुता या किसी विरोधी का गहरा मनोमालिन्य काम करता रहता है। जो व्यक्ति अपने से असंतुष्ट हैं या द्वेष रखते हैं, बहुधा उन्हीं का ऐसे कार्यों में विशेष हाथ रहता है।
क्रमश जारी........
अखण्ड ज्योति 1951 अगस्त
| Newer Post | Home | Older Post |
