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Friday 10, October 2025

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विचार ही जीवन की आधार शिला हैं | विचारों की अपार और अद्भुद शक्ति | Shantikunj Rishi Chintan Channel

विचार ही जीवन की आधार शिला हैं | विचारों की अपार और अद्भुद शक्ति | Shantikunj Rishi Chintan Channel

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जिनेवा स्थित IPU मुख्यालय में डॉ. चिन्मय पंड्या जी का सार्थक संवाद | Geneva Visit

जिनेवा स्थित IPU मुख्यालय में डॉ. चिन्मय पंड्या जी का सार्थक संवाद | Geneva Visit

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अंत समय के विचार: धन नहीं, ईश्वर स्मरण ही सार है

अंत समय के विचार: धन नहीं, ईश्वर स्मरण ही सार है

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अमृतवाणी:- जीवन में श्रद्धा का महत्व : साधना के सूत्र - भाग 3 | पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

अमृतवाणी:- जीवन में श्रद्धा का महत्व : साधना के सूत्र - भाग 3 | पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

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चन्द्र गायत्री | Chandra Gayatri Mantra | उद्विग्नताओं की शान्ति, शोक, क्रोध, काम, लोभ का निवारण,

चन्द्र गायत्री | Chandra Gayatri Mantra | उद्विग्नताओं की शान्ति, शोक, क्रोध, काम, लोभ का निवारण,

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कर्मों की तीन श्रेणियाँ, गहना कर्मणोगतिः Gahana Karmano Gati | Pt Shriram Sharma Acharya

कर्मों की तीन श्रेणियाँ, गहना कर्मणोगतिः Gahana Karmano Gati | Pt Shriram Sharma Acharya

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भारत से उठ रही है एक नई लहर क्या यह दुनिया को बदल देगी?

भारत से उठ रही है एक नई लहर क्या यह दुनिया को बदल देगी?

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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
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गायत्री माता - अखंड दीपक
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चरण पादुका
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चरण पादुका
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सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
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प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
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शिव मंदिर - शांतिकुंज
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हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
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आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

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आज का सद्वाक्य

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नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 10 October 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

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परिवार नियोजन इतना क्यों जरूरी है ? | Pariwar Niyojan Itna Zaruri Kyun Hai

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परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



हमने परिवार नियोजन के बारे में खुलेआम कहा है, हर एक से कहा है, बहुत जोर देके कहा है कि बच्चे पैदा न होने चाहिए।

यहाँ हमारी संस्था शांतिकुंज में है, यहाँ इसमें से 60 फीसदी आदमियों ने फैमिली प्लानिंग करा रखा है।

कोई-कोई और आदमी आते हैं, कोई हमसे मिलता है, कोई हमारे व्याख्यान होते हैं, तो हमने फैमिली प्लानिंग का जिक्र जरूर किया है कि अगर बच्चे ज्यादा बढ़ेंगे तो देश की गरीबी बढ़ेगी, मुसीबत बढ़ेगी और देश तबाह हो जाएगा।

इसलिए यह काम, यह काम भी हमारे कार्यक्रम में है।

और दूसरा — जाति और लिंग।

ये हम बनिए हैं, हम बामण हैं, हम ठाकुर हैं, हम नाई हैं, हम धोबी हैं — नहीं।

ना आप नाई हैं, ना धोबी हैं, आप मनुष्य हैं।

और ये स्त्री है, ये घूंघट में रहेंगी, पर्दे में रहेंगी, घर से बाहर नहीं जा सकती, स्त्रियों को पढ़ाएंगे नहीं, वो लड़के भाग्यवान होते हैं, लड़कियाँ अभागी होती हैं — नहीं।

बिल्कुल गलत बात है।

जैसे लड़का, वैसे लड़की।

जैसा बामण, वैसा नाई।

कोई जात-बिरादरी नहीं। जाति और लिंग को दूर करना — ये दस कार्यक्रम हमारे हैं।

इन्हीं के ऊपर हमने व्याख्यान बनाए हुए हैं, इन्हीं के ऊपर हमने वीडियो बनाए हुए हैं, इन्हीं के ऊपर हम लोगों को टीवी दिखाते हैं, इन्हीं पे संगीत गाते हैं।

और किसी न किसी तरीके से — ये हमारी दस कार्य पद्धति है।

इन्हीं को हम चलाते हैं और इसी के लिए उद्घाटन करने पे, समय-समय पर कांग्रेस के नेताओं को, दूसरे नेताओं को हम बुलाते हैं कि हमारे कार्यक्रमों में आप आइए, हमारे कार्यक्रमों को देखिए, हमारे कार्यक्रमों में सहयोग कीजिए।

हमारी वाणी में अगर असर कम है, तो आप अपनी वाणी का असर शामिल कीजिए।

हमारे में तो हमारा कार्य और आपका कार्य एक है।

हमने इतना सीमित कर रखा है — 20 सूत्री कार्यक्रमों में, जिसमें कि पैसा खर्च करना पड़ता है, वो कार्य क्यों हमारे पास नहीं है।

जिसमें पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, विचारों पे दबाव डालना पड़ता है, केवल विचारों से काम बन सकता है — वो काम हम करते हैं।

ये हमारे काम करने की शैली है।

इसी के लिए ये संस्था बनी हुई है और इसी के लिए हमारे सारे कार्यक्रम चलते हैं।

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अखण्ड-ज्योति से



काशी के एक ब्राह्मण के सामने से एक गाय भागती हुई किसी गली में घुस गई. तभी वहां एक आदमी आया. उसने गाय के बारे में पूछा. . पंडितजी माला फेर रहे थे इसलिए कुछ बोला नहीं बस हाथ से उस गली का इशारा कर दिया जिधर गाय गई थी. पंडितजी इस बात से अंजान थे कि वह आदमी कसाई है और गौमाता उसके चंगुल से जान बचाकर भागी थीं. कसाई ने पकड़कर गोवध कर दिया।

अंजाने में हुए इस घोर पाप के कारण पंडितजी अगले जन्म में कसाई घर में जन्मे नाम पड़ा, सदना. पर पूर्वजन्म के पुण्यकर्मो के कारण कसाई होकर भी वह उदार और सदाचारी थे. कसाई परिवार में जन्मे होने के कारण आजीविका के लिये और कोई उपाय न होने से दूसरों के यहाँ से मांस लाकर बेचा करते थे, स्‍वयं अपने हाथ से पशु-वध नहीं करते थे। सदना की भगवान का भजन करने में बड़ी निष्ठा थी।

 

एक दिन सदना को नदी के किनारे एक पत्थर पड़ा मिला. पत्थर अच्छा लगा इसलिए वह उसे मांस तोलने के लिए अपने साथ ले आए. वह इस बात अंजान थे कि यह वह वही शालिग्राम थे जिन्हें पूर्वजन्म नित्य पूजते थे. सदना कसाई पूर्वजन्म के शालिग्राम को इस जन्म में मांस तोलने के लिए बटखरे के रूप में प्रयोग करने लगे. आदत के अनुसार सदना ठाकुरजी के भजन गाते रहते थे.ठाकुरजी भक्त की स्तुति का पलड़े में झूलते हुए आनंद लेते रहते. बटखरे का कमाल ऐसा था कि चाहे आधे किलो तोलना हो, एक किलो या दो किलो सारा वजन उससे पक्का हो जाता।

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