Friday 11, October 2024
कृष्ण पक्ष नवमी, आश्विन 2081
पंचांग 12/10/2024 • October 12, 2024
आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी, पिंगल संवत्सर विक्रम संवत 2081, शक संवत 1946 (क्रोधी संवत्सर), आश्विन | नवमी तिथि 10:58 AM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र श्रवण 04:27 AM तक उपरांत धनिष्ठा | धृति योग 12:21 AM तक, उसके बाद शूल योग | करण कौलव 10:59 AM तक, बाद तैतिल 10:09 PM तक, बाद गर |
अक्टूबर 12 शनिवार को राहु 09:12 AM से 10:38 AM तक है | चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा |
सूर्योदय6:21 AM | सूर्यास्त5:45 PM | चन्द्रोदय2:39 PM | चन्द्रास्त1:18 AM | अयनदक्षिणायन | द्रिक ऋतुशरद
- विक्रम संवत - 2081, पिंगल
- शक सम्वत - 1946, क्रोधी
- पूर्णिमांत - आश्विन
- अमांत - आश्विन
तिथि
- शुक्ल पक्ष नवमी
- Oct 11 12:07 PM – Oct 12 10:58 AM - शुक्ल पक्ष दशमी
- Oct 12 10:58 AM – Oct 13 09:09 AM
नक्षत्र
- श्रवण - Oct 12 05:25 AM – Oct 13 04:27 AM
- धनिष्ठा - Oct 13 04:27 AM – Oct 14 02:51 AM
SHRAVAN
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
अखण्ड-ज्योति से
यदि हम अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठता के ढांचे में ढालने के लिए सचमुच उत्सुक एवं उद्यत है तो अपने दैनिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट विचारधाराओं को मस्तिष्क में बैठाने का एक नियमित विभाग बना ही लेना चाहिए। मन लगे चाहे न लगे, फुर्सत मिले चाहे न मिले, इसके लिए बलपूर्वक, हठपूर्वक समय निकालना चाहिए।
नित्य नियमित ईश्वर उपासना के बारे में हम सदा से कहते रहे हैं। चरित्र निर्माण की आधारशिला ही आस्तिकता है। ईश्वर विश्वास छोड देने से मनुष्य अंकुश रहित उन्मत्त हाथी की तरह आचरण करता है, अपने लिए तथा दूसरों के लिए विपत्ति का कारण बनता है।इसलिए हममें से हर एक को किसी न किसी रूप में ईश्वर उपासना नित्य ही करनी चाहिए।
प्रत्येक पाठक को व युग निर्माण के प्रत्येक सदस्य को
1- अपने दैनिक जीवन में उपासना को स्थान देना चाहिए।
2- स्वाध्याय के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित करना चाहिए।
3- नित्य युग निर्माण सत्संकल पढना चाहिए।
4- सोते समय आत्मनिरिक्षण का कार्यक्रम नियमित रूप से चलाना चाहिए।
5- दिन में समय समय पर कुविचारो से लड़ते रहने की तैयारी करनी चाहिए।
ये पांच कार्यक्रम आत्मनिर्माण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। युग निर्माण अपने आप से ही आरंभ करना है, इसलिए ये पांच कार्य जितनी जल्दी आरंभ किए जा सके उतना उत्तम है।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अप्रैल 1963 पृष्ठ 24-25
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