Friday 17, January 2025
VID-20250117-WA0067.mp4
VID-20250117-WA0068.mp4
मिशन की सफलता का कारण | Mission Ki Safalta ka Karan
वाणी का संयम | Vani Ka Sanyam
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 17 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
समाज क्या है, जिसको हम ऊंचा उठाना चाहते हैं? देश क्या है, जिसको हम ऊंचा उठाना चाहते हैं? विश्व क्या है, जिसको हम ऊंचा उठाना चाहते हैं? जिसको हम व्यक्ति की कड़ी, व्यक्तियों की श्रंखला से चैन बनी हुई है, जंजीर बंधी हुई है। जंजीर क्या है? जंजीर का एक हिस्सा है। माला क्या है? माला को भी छोटे-छोटे मनकों को मिला करके ऐसी बनाई हुई श्रंखला है। समाज क्या है? कुछ नहीं है, समाज मनुष्यों के समूह का नाम है। देश क्या है? कुछ नहीं है, देश मनुष्यों के समूह का नाम है। और विश्व क्या है? विश्व कुछ नहीं है, मनुष्यों के समूह का नाम है। मनुष्यों की एक-एक कड़ी को और एक-एक अंतरा को बनाने के लिए और निर्माण करने के लिए कोई प्रयत्न किए गए, तो वह हमारे प्रयास निरर्थक हो जाएंगे। जिनके मुकाबले हम समाज को अच्छा बनाने की बात कहते हैं, और देश को अच्छा बनाने की बात कहते हैं, और विश्व को अच्छा बनाने की बात कहते हैं, यह बात जितनी जल्दी दिमाग में से निकाल दी जाए, उतना अच्छा है।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
मुद्दतों से देव परम्पराएं अवरुद्ध हुई पड़ी हैं। अब हमें सारा साहस समेटकर तृष्णा और वासना के कीचड़ से बाहर निकलना होगा और वाचालता और विडम्बना से नहीं, अपनी कृतियों से अपनी उत्कृष्टता का प्रमाण देना होगा। हमारा उदाहरण ही दूसरे अनेक लोगों को अनुकरण का साहस प्रदान करेगा। यही ठोस, वास्तविक और प्रभावशाली पद्धति है।
(महाकाल का युग प्रत्यावर्तन प्रक्रिया)
गर्मी की तपन बढ़ चलने पर वर्षा की संभावना का अनुमान लगा लिया जाता है। दीपक जब बुझने को होता है, उसकी लौ जोर से चमकती है। मरण की वेला निकट आते ही रोगी में हलकी-सी चेतना लौटती है एवं लम्बी सांसें चलने लगती हैं। जब संसार में अनीति की मात्रा बढ़ती है, जागरूकता, आदर्शवादिता और साहसिकता की उमंगें अनय की असुरता के पराभव हेतु आत्माओं में जलने लगती हैं। प्रज्ञावतार की इस भूमिका को युग परिवर्तन की वेला में ज्ञानवानों की पैनी दृष्टि सरलतापूर्वक देख सकती है।
(प्रज्ञा अभियान-1983, जुलाई-17)
सत्साहस अपनाने की गरिमा तो सदा ही रही है और रहेगी, पर इस दिशा में बढ़ने, सोचने वालों में से अत्यधिक भाग्यवान् वे हैं, जो किसी महान् अवसर के सामने आते ही उसे हाथ से न जाने देने की तत्परता बरत सके। बड़प्पन न बड़ा बनने में, न संचय में और न उपभोग में है। बड़प्पन एक दृष्टिकोण है, जिसमें सदा ऊंचा उठने, आगे बढ़ने, रास्ता बनाने और जो श्रेष्ठ है उसी को अपनाने की उमंग उठती और हिम्मत बंधती है।
(प्रज्ञा अभियान का दर्शन, स्वरूप कार्यक्रम-18)
| Newer Post | Home | Older Post |
