Saturday 18, January 2025
क्या खोया और क्या पाया | Kya Khoya Aur Kya Paya
जीवन साधना | Jeevan Sadhna | Pt Shriram Sharma Acharya
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 18 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
सारी की सारी विशेषताएं, जिसको मनुष्य के स्वभाव कहते हैं और कर्म कहते हैं, दूसरे लोग अपना काम करते हैं, उनको करने देना चाहिए। उसमें हम क्यों हस्तक्षेप करेंगे? दूसरे लोग मेडिकल कॉलेज खोलते हैं, हम क्यों उसमें हस्तक्षेप करेंगे? दूसरे आदमी, दूसरे आदमी, दूसरे शिक्षण संस्थान खड़े करते हैं, इंजीनियरिंग कॉलेज खड़ा करते हैं, हम क्यों उसमें शिकायत करेंगे? दूसरे आदमी बेटे कॉलेज खोलते हैं, हमको शिकायत से क्या हर्ज है? हमको कोई शिकायत नहीं, उनको अपना काम करने देना चाहिए। पर एक कार्य है, जिसकी आवश्यकता उनके समझ में नहीं आई है। वह कार्य हमको भी पूरा करना पड़ेगा और आपको भी पूरा करना पड़ेगा। वह कौन सा कार्य है? वह कार्य है व्यक्ति के गुण और व्यक्ति के कर्म और व्यक्ति के स्वभाव का संवर्धन, और वह कहां से शुरू हो सकता है, मित्रों? वह छोटेपन से शुरू होता है। बैखरी मंत्र बच्चे ग्रहण करने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा उसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। बच्चे का स्वभाव छोटेपन से बन जाता है।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
साधना चाहे घर पर की जाय अथवा एकान्तवास में रहकर, मनःस्थिति का परिष्कार उसका प्रधान लक्ष्य होना चाहिए। साधना का अर्थ यह नहीं कि अपने को नितान्त एकाकी अनुभव कर वर्तमान तथा भावी जीवन को नहीं, मुक्ति- मोक्ष को, परलोक को लक्ष्य मानकर चला जाय। साधना विधि में चिन्तन क्या है, आने वाले समय को साधक कैसा बनाने और परिष्कृत करने का संकल्प लेकर जाना चाहता है, इसे प्रमुख माना गया है। व्यक्ति, परिवार और समाज इन तीनों ही क्षेत्रों में बँटे जीवन सोपान को व्यक्ति किस प्रकार परिमार्जित करेंगे, उसकी रूपरेखा क्या होगी, इस निर्धारण में कौन कितना खरा उतरा इसी पर साधना की सफलता निर्भर है।
कल्प साधना में भी इसी तथ्य को प्रधानता दी गयी है। एक प्रकार से यह व्यक्ति का समग्र काया कल्प है, जिसमें उसका वर्तमान वैयक्तिक जीवन, पारिवारिक गठबंधन तथा समाज सम्पर्क तीनों ही प्रभावित होते हैं। कल्प साधकों को यही निर्देश दिया जाता है कि उनके शान्तिकुञ्ज वास की अवधि में उनकी मनःस्थिति एकान्त सेवी, अन्तर्मुखी, वैरागी जैसी होनी चाहिए। त्रिवेणी तट की बालुका में माघ मास की कल्प साधना फूस की झोपड़ी में सम्पन्न करते हैं। घर परिवार से मन हटाकर उस अवधि में मन को भगवद् समर्पण में रखते हैं। श्रद्धा पूर्वक नियमित साधना में संलग्न रहने और दिनचर्या के नियमित अनुशासन पालने के अतिरिक्त एक ही चिन्तन में निरत रहना चाहिये, कि काया कल्प जैसी मनःस्थिति लेकर कषाय- कल्मषों की कीचड़ धोकर वापस लौटना है। इसके लिए भावी जीवन को उज्ज्वल भविष्य की रूपरेखा निर्धारित करने का ताना- बाना बुनते रहना चाहिये।
व्यक्ति, परिवार और समाज के त्रिविध क्षेत्रों में जीवन बंटा हुआ हैं, इन तीनों को ही अधिकाधिक परिष्कृत करना इन दिनों लक्ष्य रखना चाहिये। इस सन्दर्भ में त्रिविध पंचशीलों के कुछ परामर्श क्रम प्रस्तुत हैं। भगवान बुद्ध ने हर क्षेत्र के लिए पंचशील निर्धारित किये थे। प्रज्ञा साधकों के लिए उपरोक्त तीन क्षेत्र के लिए इस प्रकार हैं:-
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
(गुरुदेव के बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक से)
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