Monday 19, January 2026
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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 19 January 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
शक्तिपीठों के प्रति हमें दुख है
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
हमारा भी एक जेवर पहनने का मन है, कौन सा जेवर? हमारा जेवर यह पहनने का मन है। हमारा कुटुंब तो बहुत बड़ा है इसमें 24 लाख आदमी है।लेकिन 24 लाख आदमी हमारे रजिस्टरों में लिखे हुए हैं। उसमें से किसी किसी की मौज आ जाती है, जंग आ जाती है तो, कुछ तो कर बैठता है, पर जो निरंतर चलता रहता है। वह हमारे कदम से कदम हमारे कंधे से कंधा मिलाकर चलता है ऐसे आदमी हैं, तो उसमें से हमारा ऐसा मन है की कितने आदमी हो जाएं, हमने शक्तिपीठें बनाई थी, चैबीस सौ शक्तिपीठें बना करके तैयार कर दी, अब क्या मन है? अब हमारा, वह जो शक्तिपीठें थी, उनसे हमारा पेट खूब भर गया, खूब भर गया क्यों? क्योंकि वह मंदिर बन के रह गए और हमने बनाए थे जनजागृति के केंद्र न वहां जन की बात है, न जागृति की बात है, न किसी की बात है, केवल एक देवी पत्थर की बैठी हुई है। उसके ऊपर सबेरे शाम को आरती उतार देते हैं और ताले में बंद कर देते हैं। उसको यही चल रहा है उससे उससे आपको प्रसन्नता नहीं हैं, हमको प्रसन्नता नहीं हैं, और नाराजगी हैं। और बहुत दुख है। जिन्होंने शक्तिपीठ बनाई हैं उनके प्रति, उनके प्रति हम को दुख है। कारण यह, जनता का इतना पैसा बेकार चला गया, तब-तब एक नई इच्छा इस बात की उसी समय पर पैदा हुई है, क्या इच्छा हुई है? कि 24 लाख तो खैर बनने दीजिए, 24 हजार बनन दीजिए 10 हजार अगर हमारे सहयोगी ऐसे हो जाएं, तो हम पूरी संतोष की सांस लेते हुए जाएंगे, कैसे हो जाएं, जो कदम से कदम मिलाकर चलें, और नियमित रूप से चलें, नियमित रूप किस प्रप्रकार का होता है। अनुष्ठान किसे कहते हैं, जो नियमित रूप से होता है। नहीं साहब पांच माला सोमवार को कर दी और 21 माला शुक्र को कर दी, तीन माला यो या यो नहीं, नियमित रूप से बैठ गए तो ठीक टाइम पर बैठना पड़ता है।
अखण्ड-ज्योति से
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