Thursday 22, January 2026
None None, None None
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SHRAVAN
साधकों का वसन्त | Sadhko Ka Vasant | जीवन पथ के प्रदीप | श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या #meditation
अमृत सन्देश:- हमारापन ही आकर्षण का कारण है | Hamarapan Hi Akarshan Ka Karan Hai
🌸 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌸
🌸 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌸
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 23 January 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
लोकहित के लिए समर्पित 'चलती-फिरती शक्तिपीठें'
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आप घाटे में पड़ेंगे नहीं, हम घाटा पूरा करा देंगे, हमारे गुरु ने घाटा पूरा करा दिया। आपका घाटा हम पूरा करा देंगे, कहीं से करा देंगे आपका पूरा, इस तरीके से आपको समय, समय के अलावा साधन धन चाहिए। आगे के लिए क्या करें? फिर, आगे के लिए यह यह यह इनके कुछ सामान मांगते रहेगें। किताबें, झोला पुस्तकालय की खत्म हो जायंगी। लोग पढ़ लेंगे, फिर आपको मंगानी पड़ेंगी, तो 20 पैसे रोज का ज्ञान घट, आपके यहां रखा ही होगा। वह भी तो ऐसे पड़ा रहता है। कभी बच्चे उठा ले जाते हैं। कभी पैसे फेंक देते हैं। कभी नहीं डालते, तो आप नियमित रूप से 20 पैसे से ही चलिए, 20 पैसे भी कम नहीं होते, 20 पैसे रोज खर्च कर दें तो जो जो आगे वाला मिशन है, जो आपको शक्तिपीठ बनाया है। उसका दैनिक खर्च भी तो चाहिए मेंटेनेंस भी तो चाहिए, पूजा आरती भी तो रोज करनी पड़ती है। बत्ती भी तो रोज जलानी पड़ती है, इसलिए रोजाना का खर्च, खर्च भी लिए बैठे हैं, इंसान रोज खर्च का खर्च लिए बैठा है। हम पानी पीते हैं, खाना खाते हैं। यह रोज खर्च हैं, कपड़े पहनते हैं, यह पुराने हो जाते हैं, फट जाते हैं, फिर नए पहनने पड़ते हैं, रोज रोजाना का खर्चा है, जो मेंटेनेंस है इसको आप स्वयं ही करें, अकेले करें, अकेले करें, अब मैं अकेली शक्तिपीठों को देखना चाहता हूं, अकेला चलो रे,
है। मैं भी अकेला चला हूं, घर से भी अकेला चला, किसी का कहना माना मैंने, किसी का कहना नहीं माना, न मैंने अपने भाइयों का कहना माना, न बाप का कहना माना, न माँ का कहना माना, न भाइयो का कहना माना, न साले का कहना माना, ना बहनोई का कहना माना, किसी का कहना नहीं माना और अपने आत्मा का और एक परमात्मा का दो का कहना माना आप भी ऐसा कर सकते हैं। कि आप कुछ समय नियमित रूप से लगा कर के अपने आपको एक चलती फिरती शक्तिपीठों के रूप में बदल सकते हो, चलती फिरती शक्तिपीठें कितनी चाहिए हमको दस दस दस हजार चाहिए। हमारा मन है, वास्तव में मन है, 24 लाख आदमियों में से 10 हजार आदमी नहीं मिलेंगे, मिलने चाहिए। मेरे ख्याल से 10 हजार प्रतिज्ञा वाले आदमी वचन के धनी आदमी सच्ची लगन वाले आदमी ईमानदार आदमी लोकहित के लिए जो अपने आप को समर्पित कर सके ऐसे आदमी, मेरे ख्याल से 10 हजार मुझे मिल जाने चाहिए।
अखण्ड-ज्योति से
बड़ा विलक्षण व अद्भुत है यह वसंत
कई अर्थों में विलक्षण व अद्भुत है यह वर्ष। इस वर्ष का महत्त्व व मूल्य परमपूज्य गुरुदेव के अंग-अवयवों के लिए बहुत ज्यादा है। यह वर्ष निश्चित रूप से उज्ज्वल भविष्य के आगमन की घोषणा का वर्ष है। इसके आने वाले तीन वर्षों में अँधियारे की विदाई सुनिश्चित है। इसी के साथ सुनिश्चित है- दिव्य कक्षा के प्रकाश का धरती पर अवतरण। धरती पर जो सत्त्व गुण संपन्न व शुभवृत्तियों से युक्त होंगे, वही इसका माध्यम बनेंगे। जैसे-जैसे यह प्रकाश बढ़ता जाएगा, धरती पर क्रमिक रूप से सकारात्मक घटनाक्रम भी बढ़ते जाएँगे। प्रकाश का यह वेगपूर्ण अवतरण धरती की कक्षा से तमस् को हटाएगा, मिटाएगा। प्रकृति के तीन गुणों में जहाँ अभी तम की प्रधानता है, वहीं इसके प्रभाव से सत्त्व की प्रधानता बढ़ेगी।
सत्त्व की इस प्रधानता के बढ़ने से शुभ बढ़ेगा और क्रमशः वे सभी घटनाएँ घटित होंगी, जिनकी चर्चा परमपूज्य गुरुदेव ने सन् १९८७ के जनवरी में लिखे गए कुंडलिनी विशेषांक में लिखी थी। यह परिवर्तन क्रमिक होगा, यानी कि धीरे-धीरे। युगऋषि गुरुदेव के साधना शताब्दी वर्ष अर्थात २०२६ की वसंत पंचमी तक इसे बड़ा साफ-साफ अपनी खुली आँखों से देखा जा सकेगा। गुरुदेव ने जो युग-परिवर्तन के बीज बोए थे, उनकी फसल लहलहाती हुई दीखने लगेगी। हाँ, पर उन बीजों में अंकुर इसी वसंत को फूटने को है। इन अर्थों में सन् २०१४ में नवयुग के आगमन का स्पष्ट संदेश मुखरित है। बस, इसकी ध्वनि को सुनने और अपने कर्त्तव्य निर्वहन में लगने की बारी हम सबकी है।
समाप्त.......
अखण्ड ज्योति 2014 फरवरी, पृष्ठ 7
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