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Magazine - Year 1951 - Version 2

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गाजर खाने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है।

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शरीर के अन्य अंगों की भाँति हमारे नेत्रों पर भी आहार का विशेष रुप से प्रभाव पड़ता है। प्रायः देखा गया है कि भोजन में विटामिन ‘ए’ का अभाव होने पर ही दृष्टिक्षीणता, अन्धता अथवा रतौंधी की शिकायतें हुआ करती हैं। अमेरिका के प्राकृतिक चिकित्सकों ने यह पता लगाया है कि गाजर में पुनः दृष्टि शक्ति प्राप्त कराने के विशेष गुण हैं। अभी हाल ही में अमेरिका प्राकृतिक चिकित्सक मि॰ इमनुइल जोसेफ्रसन का लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक बालक पर, जो करीब करीब अन्धा हो चला था, प्रयोग किया। उन्होंने उसे प्रतिदिन तीन कच्ची या ठीक तौर से पकायी हुई गाजर खाने को बताया। गाजर के साथ ही उस बालक को काड-लिवर आयल (मछली का तेल) भी पिलाया। इससे उसकी आँखे शीघ्र ही निरोग होने लगी। तीन महीने के बाद उसकी आँखों में कोई भी खराबी न रह गई। काड-लिवर आयल में विटामन ‘ए’ रहता है। हरे शाक और भाजियों में एक प्रकार का पीला पदार्थ होता है जो स्वतः विटामिन ‘ए’ उत्पन्न करता है।

घास में विटामिन ‘ए’ और वह पीला द्रव पदार्थ अधिक मात्रा में मौजूद रहता है। पिछले महायुद्ध के समय हँगेरियन सैनिकों को अच्छा भोजन न मिल सकने के कारण रतौंधी आने लगी, जिससे उन्हें रात के समय कुछ सूझता ही न था। इस प्रकार वे रात के समय पहरा देने में असमर्थ हो गए। लेकिन वहाँ के मेडीकल अफसरों को पता लगा कि उनके सैनिक क्षुधा से आतुर होकर घास खाने लगे तो उनकी रतौंधी गायब हो गई।

उक्त प्राकृतिक चिकित्सक ने यह भी पता लगाया है कि यदि बालकों के भोजन में विटामिन ‘ए’ का अभाव हो तो चश्मे से भी उनकी दृष्टि क्षीणता दूर नहीं की जा सकती।

प्रयोग के बाद यह ज्ञात किया गया है कि यदि गर्भणी स्त्री को विटामिन ‘ए’ न मिले, तो उनके बच्चे अपेक्षाकृत मन्द बुद्धि होगें और वे बचपन में ही अपनी आँखें खो बैठेगें। शरीर के स्नायु जाल को लाभ पहुँचाने में भी विटामिन ‘ए’ अत्यधिक उपयोगी साबित हुआ है। यदि माताऐं यह चाहती हैं कि उनके बच्चे सुन्दर और स्वस्थ हो तो उन्हें अपने भोजन में विटामिन ‘ए’ को विशेष रुप से प्रधानता देनी चाहिये।

विटामिन ‘ए’ के अतिरिक्त दृष्टि शक्ति कायम रखने के लिए अन्य प्रकार के भी आहार तथा पौष्टिक पदार्थों का सेवन करना समान रुप से आवश्यक है। सुन्दर स्वस्थ और उपयुक्त भोजन के ही द्वारा काफी समय तक अपनी आँखों की दृष्टि शक्ति अक्षुण्य रखी जा सकती है।

आँखों के जिन स्नायुओं के कारण हम देखते हैं उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के लिए विटामिन ‘बी’ आवश्यक है। विटामिन ‘सी’ आँखों की पुतलियों को अच्छी स्थिति में रखने तथा आँखों की अन्य तरह की बीमारियों से मुक्त करने के लिए बड़ा उपयोगी है। अवसर विटामिन ‘सी’ की कमी होने पर मोतियाबिन्द की बीमारी हो जाया करती है। यह देखा गया है कि भोजन में नारंगी, अंगूर या मुनक्का तथा इसी प्रकार के अन्य फलों की अधिक मात्रा रखने से अनेक संक्रामक रोग दूर किए जा सकते हैं। आँखों के लिए विटामिन ‘सी’ भी गुणकारी हैं। आँखों से कम दिखाई पड़ना यह आजकल बहुत साधारण बीमारी हो गई है। इस दृष्टि क्षीणता के लिए गाजर एक बड़ी लाभदायक और सस्ती औषधि हैं। सिर के बाल सफेद हो जाने या झड़ने लगने अथवा रुखे होने सरीखे रोग भी गाजर सेवन से दूर होते हैं।

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