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Magazine - Year 1953 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
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आप भी लोकप्रिय बन सकते हैं।

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(श्री मोहनलाल वर्मा बी. ए. एल. एल. बी.)

लोकप्रिय मनुष्य के व्यक्तित्व में एक ऐसी गुप्त वस्तु है, जिसका फोटोग्राफर चित्र नहीं खींच सकता, चित्रकार अपनी तूलिका के द्वारा उसे चित्रपट पर अंकित नहीं कर सकता, मूर्तिकार अपनी छेनी से गढ़कर उसका निर्माण नहीं कर सकता। इस गुप्त भाव का हम अपने हृदय में अनुभव करते हैं, किन्तु कोई इसका वर्णन नहीं कर सकता, कोई जीव चरित्र लेखक शब्दों में अभिव्यक्त नहीं कर सकता। इसी गुप्त शक्ति से मनुष्य को जीवन तथा समाज में यह प्रतिष्ठा एवं नेतृत्व प्राप्त होता है।

जब हम श्री राधाकृष्णन, पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती सरोजनी नायडू इत्यादि भारतीय नर रत्नों तथा ब्लेन, लिंकन, रुजवेल्ट, चर्चिल इत्यादि यूरोपीय पुरुषों के विषय में सोचते हैं, तो हमें ज्ञात होता है कि उनमें कुछ ऐसी गुप्त मानसिक एवं चुम्बकीय शक्तियाँ थी और हैं, जिनका अलक्षित प्रभाव हम पर पड़े बिना नहीं रहता। कुछ ऐसे व्यक्ति हुए हैं, जिनकी महत्ता असंदिग्ध है, किन्तु वे जनता में उत्साह और अपने प्रति आदर उत्पन्न न कर सके, इनमें वह माननीय विद्युत न थी। मानवीय चुम्बक अनेक तत्वों का सम्मिश्रित योग है। इनमें व्यक्तिगत संपर्क, मिलनसारी, मस्तिष्क की शक्ति एवं शिक्षा के साथ-साथ अन्य भी अनेक तत्व सम्मिलित हैं। हम देखते हैं कि अनेक व्यक्ति साधारण योग्यता के होकर भी व्यक्तिगत दृष्टि से अनेक आकर्षण लेकर आते हैं। वे समाज में एक दूसरे से बातें करना जानते हैं, मिलनसार रहते हैं, और अपनी मानवीय विद्युत से अनायास ही दूसरों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं।

इस मानवीय विद्युत का एक अच्छा उदाहरण एक कुशल वक्ता है, जो अपनी वकृत्व कला से अनायास ही श्रोताओं को वश में कर लेता है। अच्छे व्यक्तित्व में एक ऐसा जादू, एक मादक आकर्षण होता है, जो क्षण भर में हमें विमुख कर लेता है और हम उनकी बातें मान लेते हैं।

अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति अपनी कुशाग्र बुद्धि विवेक के बल पर यह मालूम कर लेते हैं कि एक विशेष अवसर पर क्या, कैसे, क्योंकर कहना चाहिये? तात्कालिक बुद्धि और सामान्य ज्ञान वे गुण हैं, जिनकी अत्यधिक आवश्यकता है। सुसंस्कृत स्वभाव, परिष्कृत एवं परिपक्व रुचि का निरन्तर विकास होना अनिवार्य है। लोकप्रिय बनने के इच्छुक होकर आप दूसरों के दृष्टिकोण पर तुषारापात नहीं कर सकते। आपको समाज में रह कर लोकप्रियता प्राप्त करनी है। यह लोकप्रियता वह प्रसिद्धि है, जो आपको आपके बन्धु, मित्र, जान-पहिचान के व्यक्ति, समाज के अन्य सदस्य प्रदान करते हैं। आपको अपने अधिक से अधिक सम्बन्ध बढ़ाने और उन्हें निरन्तर बनाये रखना है। आपको समय-समय पर लेन-देन बनाये रखना चाहिये। ऐसे अधिक से अधिक अवसर निकालने चाहिये, जिनमें आप दूसरों को प्रसन्न कर सकें।

लोकप्रियता आपके ज्ञानवर्द्धन पर बहुत कुछ निर्भर है। आपका सामान्य ज्ञान, विशेषतः राजनीति और समाज शास्त्र-ये दोनों ऐसे विषय हैं, जिनका अच्छा ज्ञान होने पर ही आप समाज में आकर्षण होने का केन्द्र बन सकते हैं। अधिक से अधिक सामान्य ज्ञान संग्रह करें, समाचार पत्र पढ़ अपने ज्ञान को चिरनवीन रखें। ये ऐसे विषय हैं जिनसे आपकी यश प्रतिष्ठा का सम्बन्ध हैं। जो इन विषयों पर तथा सामयिक समस्याओं पर बातें कर सकता है, वह अवश्य लोकप्रियता प्राप्त करेगा।

डेल कार्नेगी ने लोकप्रियता प्राप्त करने के जो 6 नियम बनाये हैं, उन्हें स्मरण रखिये और दैनिक जीवन में प्रयुक्त कीजिए। उनके अनुसार आप 1.दूसरों के प्रति रुचि उत्पन्न करें, सहानुभूति को फैलाये, उनकी समस्याओं में दिलचस्पी उत्पन्न करें, 2. स्वाभाविक मुस्कान से सदैव दूसरों का स्वागत करें, 3. उनके नाम स्मरण करें दूसरों को उनके नाम से पुकारने से निकटता और आत्मीयता की अभिवृद्धि होती है। बातचीत के मध्य में कई बार उनके नाम का संकेत कीजिए, 4. अच्छे श्रोता बनिए और वक्ता के विचारों के प्रति हार्दिक सहानुभूति और प्रशंसा के भाव भी यदि श्रोता प्रकट करता चले और दूसरों को उनका दृष्टिकोण समझाने, कहने, बोलने की पूरी आजादी देता चले, तो वह सहज ही वक्ता के हृदय में वास कर लेता है। चार्ल्स डब्ल्यू. इलियट ने सत्य ही लिखा है- “सफल व्यवसायिक बातचीत का कोई रहस्य नहीं है जो व्यक्ति आपसे बात कर रहा है, उसकी बातों पर पूर्ण ध्यान देना ही महत्व की वस्तु है। बातचीत करने वाले व्यक्ति की भावनाओं और विचारों को गुदगुदाने का इससे अधिक सफल कोई दूसरा उपाय नहीं है।” जहाँ संभव हो दूसरों की प्रशंसा करें, अन्यथा सहानुभूति को प्रकट करते ही चलें।

कार्नेगी का एक नियम है कि आप स्वयं आकर्षित बनना चाहते हैं, तो स्वयं भी दूसरों के प्रति आकर्षित हूजिए। दूसरों से ऐसे प्रश्न कीजिए जिनके उत्तर देने में वे आनन्द का अनुभव करें। उन्हें अपने विषय में कहने को प्रोत्साहित कीजिए, उनकी हृदयस्थ भावनाओं को गुदगुदाइये। आपको लोग पसन्द करेंगे।

कार्नेगी ने पुनः पुनः इस बात पर ध्यान आकृष्ट किया है कि हम दूसरों के दृष्टिकोण से देखना सीखें, उन्हीं की रुचियों, दिलचस्पी की बातों के विषय में उनसे बातें करें। कार्नेगी कहते हैं- “दूसरों के हित की भाषा में बात करने से आप सहज ही दूसरों के हृदयों में स्थान बना सकते हैं। किसी मनुष्य के हृदय में प्रवेश करने का राजमार्ग उन बातों की चर्चा करता है, जिन्हें वह बहुत अधिक पसन्द करता है। अतः किसी व्यक्ति के विश्वास और प्रेम का पात्र बनाने के लिये आप यह जानने का प्रयत्न कीजिए कि किस विषय में उसकी विशेष अभिरुचि है और फिर उसी विषय में उससे बातें कीजिए। उसके विचारों को गुदगुदा कर आप सहज ही उसके साथ अपनी आत्मीयता स्थापित कर सकते हैं। लोगों की प्रवृत्तियों और अभिरुचियों को पहिचानने में आप को वर्षों लग सकते हैं।”

लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक व्यक्तियों से संपर्क स्थापित कीजिए अपने स्वार्थ का संकुचित दायरा छोड़कर उदारता, प्रेम तथा सहानुभूति का विस्तृत दायरा बनाइये। विनम्रता एक ऐसा गुण है, जिससे जनता आपके पास खिंचकर आती है। प्रत्येक से मित्रतापूर्ण व्यवहार करने से आप एक ऐसे दर्पण बन जाते है, जिनमें प्रत्येक व्यक्ति अपना प्रतिबिम्ब देखता है जितने अधिक व्यक्ति आपमें आत्मभाव पायेंगे, उतने आपके मधुर सम्बन्ध बढ़ते जायेंगे, उतने ही आप लोकप्रियता प्राप्त कर सकेंगे।

प्रत्येक व्यक्ति एक बन्द पुस्तक के अनुरूप है। आप इस मनुष्य रूपी पुस्तक का एक पृष्ठ उलटिए, आपको नवीन जानकारी प्राप्त होगी, कुछ नए-नए अनुभव तथा ज्ञानत्व तत्व प्राप्त हो जायेंगे। प्रत्येक व्यक्ति के अनुभवों से लाभ उठाने, कुछ सीखने-समझने, सहानुभूति, प्रश्न करने के लिए प्रस्तुत रहिए। प्रत्येक व्यक्ति मनोरंजन ज्ञान से परिपूर्ण है, हर एक के पास आपसे कुछ कहने, आपको कुछ प्रदान करने के लिए मौजूद है। यदि चतुर हैं, तो अपने काम की चीजों को आसानी से उनके मस्तिष्कों में से निकाल सकते हैं। यह रहस्य होंगे, जो आपके लिए सर्वथा नवीन और उपयोगी हैं, जीवन में कभी न कभी काम में आने वाले हैं। अतः अपने संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति का तिरस्कार मत कीजिए। उनसे ज्ञान आप किस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं? इसका उत्तर है, स्वयं उन्हें अपनी समय और सहानुभूति देकर, उनकी व्यक्तिगत समस्याओं में दिलचस्पी लेकर, उनके हितैषी और मित्र बन कर। संसार के अनेक व्यक्ति आपको सहानुभूति का दान चाहते हैं, आपको अपने दुःख दर्द की कहानियाँ सुनाने के इच्छुक हैं। अपनी हिचक और मिथ्या बनावट, कृत्रिमता त्यागकर उनसे तादात्म्य का अनुभव कीजिए। व्यर्थ की लज्जा का परित्याग कर दीजिए। अधिक से अधिक व्यक्तियों से मिलिये, यथा संभव बोलिये, और उनके गर्व को संतुष्ट रखने में प्रयत्नशील रहिए।

सबसे मिलने, उनका दुःख दर्द सुनने वाला व्यक्ति प्रत्येक अनुभव को शिक्षादान देने वाला सन्देश समझ कर ग्रहण करता है। प्रत्येक आदमी प्रसन्न, मिलनसार व्यक्ति से संपर्क स्थापित रखने का इच्छुक होता है। जो व्यक्ति चुपचाप दबा दबा रहस्यपूर्ण सा रहता है, उस पर जनता का विश्वास नहीं होता। जिस व्यक्ति का हृदय आप पढ़ नहीं सके हैं, उसकी सत्यता और ईमानदारी पर आप कैसे विश्वास कर सकते हैं? जनता का ध्यान आकृष्ट करने वाले व्यक्ति प्रायः उदार और विशाल हृदय होते हैं। उन्हें स्वतः प्रेम करने को जी चाहता है, अनायास ही वे हमारा विश्वास प्राप्त कर सकते हैं। गोपनीयता घृणा उत्पन्न करती है, प्रेम आकृष्ट करता है। जो व्यक्ति बातों को बहुत छिपाने, चुगली करने का आदी होता है। उसे देखकर दूसरे व्यक्ति के हृदय में शक-शुबहा उत्पन्न होता है। गोपनीयता त्याग करने वाले, चुपचाप रहने वाले, दूसरों से न मिलने-बरतने वाले व्यक्ति कभी लोकप्रिय नहीं हो सकते। जो सदा आपको अपना हृदय खोलकर दिखा देता है, जिसके रगरेशे, उदारता और प्रेम से आप भलीभाँति परिचित हैं, वह अनायास हमारा प्रेम प्राप्त कर लेता है। अपनी त्रुटि पर वह क्षमा याचना को प्रस्तुत रहता है, हम उसे प्रसन्नतापूर्वक क्षमा कर देते हैं क्योंकि उसकी ईमानदारी और भलमनसाहत पर हमें पूर्ण विश्वास है। आप ईमानदार, प्रेममय, उदार बनें, लोकप्रियता प्राप्त होती जायेगी।

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