माँ (Kavita)
Listen online
View page note
Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
[महावीर प्रसाद विद्यार्थी, एम.ए., साहित्यरत्न (टेढ़ा-उन्नाव)]
प्यार तुम्हारा ही तो माँ ,इन गीतों में साकार हो गया!
बरसाया पीयूष, मरुस्थल, सोने का संसार हो गया!
गला दिया तुमने निज जीवन
विश्व-वाटिका यह लहराई!
आँधी-पानी में आँचल ढक
बुझती दीपक-शिखा बचाई!
क्रोध तुम्हारा उबल पड़ा तो, चंडी का अवतार हो गया!
रोती ठोकर खाकर दुनिया
थपकी खाकर फिर सो जाती,
उमड़ तुम्हारी करुणा-धारा
फूलों पर मोती बिखराती ,
प्यार तुम्हारा तूफानों में, नैया का पतवार हो गया!
किसे भला अवकाश कि सुन ले
क्षणभर मेरी करुण कहानी,
तुम्हीं न हो तो किन प्राणों में
ढालूँ इन आँखों का पानी!
हाथ लगा दो करुणामयि, बस मेरा बेड़ा पार हो गया!
प्यार तुम्हारा ही तो माँ, इन गीतों में साकार हो गया!
*समाप्त*

