हृदयोद्गार (kavita)
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अविकल जगमग रहे दृगों में
देवि, दिव्य स्मृतियाँ,
दिवा-निशा आयें, पर आने पाएँ न दुर्मतियाँ।
विलय घन तम का संशय हो हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। पथ के राग-द्वेष प्रलोभन कण्टक फूल बनें,
जीवन की कल-कल गतियों के विघ्न अमूल बनें।
प्रेम पयोनिधि के परिचय हो। हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। सौ-सौ शरद सुधाँशु हमारे- सुमनों को सीचें,
दबा रहे अविवेक ज्ञान रवि- के पद के नीचे।
स्नेह का दश-दिशि समुदय हो। हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। ----***----
दिवा-निशा आयें, पर आने पाएँ न दुर्मतियाँ।
विलय घन तम का संशय हो हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। पथ के राग-द्वेष प्रलोभन कण्टक फूल बनें,
जीवन की कल-कल गतियों के विघ्न अमूल बनें।
प्रेम पयोनिधि के परिचय हो। हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। सौ-सौ शरद सुधाँशु हमारे- सुमनों को सीचें,
दबा रहे अविवेक ज्ञान रवि- के पद के नीचे।
स्नेह का दश-दिशि समुदय हो। हमारा पथ ज्योतिर्मय हो। ----***----

