सद्विचार प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम
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(पत्रकार, लेखक, वक्ता और गायक बनाने की शिक्षा व्यवस्था)
गायत्री परिवार का प्रधान कार्यक्रम सद्विचारों का प्रचार है। धार्मिक एवं नैतिक क्राँति की आधारशिला यही है। सद्विचारों को फैलाने के लिए लेखनी और वाणी, प्रेस और प्लेटफार्म यही दो प्रधान माध्यम हैं।
भारतवर्ष इतना विशाल देश है कि इसमें सद्विचार फैलाने के लिए बड़ी संख्या में ऐसे धर्मसेवी होने चाहियें जो जन-जन के मन में सत्प्रवृत्तियों को उभारने का कार्य करने की क्षमता से परिपूर्ण हो। ऐसे लोगों की आज भारी आवश्यकता है जो जनता की धार्मिक भावनाओं को रचनात्मक कार्यों की ओर मोड़ सकें। ऐसे जननेता तैयार करने का कार्य हमें हाथ में लेना चाहिए।
लेखनी का प्रचारात्मक रूप साहित्य-निर्माण है। वाणी का प्रचारात्मक रूप वक्ता और गायन, भाषण और भजन है। इन योग्यताओं से सम्पन्न और सुयोग्य व्यक्ति अधिकाधिक संख्या में निकलने चाहिए, जो मानव अन्तरात्मा को अपनी लेखनी और वाणी द्वारा सन्मार्ग, पर प्रवृत्त करने में लगे। हम पत्रकार, साहित्यकारों, लेखक, वक्ता एवं जन गायकों की एक बड़ी सेना तैयार करके ही राष्ट्र की बौद्धिक भूख बुझाने की, उपयुक्त मानसिक भोजन प्रस्तुत करने की योजना में संलग्न हैं।
गायत्री तपोभूमि में एक साँस्कृतिक विद्यालय स्थापित करने की योजना अक्टूबर की गायत्री परिवार पत्रिका में पृष्ठ 31 पर छापी गयी थी। महायज्ञ से निवृत्त होते ही अब उस योजना को कार्यान्वित कर दिया गया है। इस योजना के अनुसार तपोभूमि में एक साँस्कृतिक विद्यालय चालू कर दिया गया है जिसमें लेखक, वक्ता और गायक की शिक्षा देकर देहातों के लिये जन-जागृति पैदा करने वाले छोटे-बड़े जननेता उत्पन्न किये जायेंगे।
लेखनी विभाग
पत्रकार और साहित्यकार बनाने के लिए इन विषयों की क्रियात्मक शिक्षा दी जावेगी। अच्छी हिन्दी जानने वाले मैट्रिक के लगभग शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ही इस कक्षा में प्रविष्ट किए जायेंगे। नियमित पाठ्यक्रम की पुस्तकें पढ़ाई जायेंगी। शिक्षा काल छः महीने रहेगा।
अनुवाद, नये लेख लिखना, दूसरों के लेख सुधारना, सम्पादन, भाषा एवं शैली की उत्कृष्टता, लेख के निर्धारित विषय के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने संबंधी जानकारी लेख को तथ्यपूर्ण बनाने के लिए तर्क एवं प्रमाण की प्रचुरता रखने का तरीका, विभिन्न विषयों का अध्ययन, समालोचना, परस्पर विरोधी विचारों में से उपयोगी तथ्य ढूँढ़ना आदि अनेकों विषयों की शिक्षा दी जायेगी।
छोटे अखबार चलाने के लिये अखबार संबंधी कानूनों का ज्ञान, पत्रकार की नैतिक जिम्मेदारियाँ, समाचारों का सम्पादन, लेखों की काट-छाँट और प्रचार, अखबार का दफ्तर, हिसाब-किताब, ग्राहक रजिस्टर, डाक से अंक भेजने आदि का समुचित ज्ञान कराया जायेगा।
चूँकि साहित्य निर्माण कार्य के लिए प्रेस संबंधी सभी बातों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, इसलिए तपोभूमि में एक बड़ा प्रेस लगाया जा रहा है, जिसमें कई प्रकार की मशीनें तथा अनेकों प्रकार के टाइप रहेंगे। इनको चलाने की पूरी शिक्षा इस लेखन विभाग के शिक्षार्थियों को दी जावेगी। कम्पोजिंग, प्रूफरीडिंग, करेक्शन, छपाई, बाइंडिंग, कटिंग आदि प्रेस संबंधी कुल काम सिखाये जायेंगे, जिससे यदि उस छात्र को अपना स्वतंत्र प्रेस खोलना हो तो वह थोड़ी सी पूँजी लगाकर आसानी से खोलकर अपना स्वतंत्र व्यवसाय चला कर अपनी जीविका आसानी से कमा सकता है। प्रेस में नौकरी तो ऐसा आदमी कभी भी किसी प्रेस में कर सकता है। लेखक बनने के लिये, पत्रकार बनने के लिए यदि अपना निज का प्रेस न चलाना हो तो भी प्रेस संबंधी सभी जानकारियाँ आवश्यक हैं। प्रेस संबंधी शिक्षाएं इस विभाग में दी जायेंगी।
नवीन पत्र का प्रकाशन
गायत्री तपोभूमि से शीघ्र ही ‘जीवनयज्ञ’ नाम का मासिक पत्र निकाला जा रहा है। ‘गायत्री परिवार पत्रिका’ तथा ‘अखण्ड-ज्योति’ यह दो पत्रिकाएं पुरानी हैं, इस प्रकार तीन अखबारों का प्रकाशन जहाँ होता है वहाँ लेखक एवं पत्रकार बनने के इच्छुक को शिक्षा प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर है। इस मार्ग में अभिरुचि रखने वालों के लिए यह स्वर्ण सुयोग है।
वाणी-विभाग
वक्तृत्व कला सम्बंधी विधिवत् शिक्षा देने का प्रबंध किया गया है। निर्धारित विषय संबंधी आवश्यक तथ्यों का संग्रह, व्याख्यान का पूर्ण ढाँचा, वाणी में मधुरता तथा प्रवाह, हाव-भाव, जनता को प्रभावित करने संबंधी आवश्यक तथ्य, थोड़े समय में अधिक बात कहने की शैली, प्रसिद्ध वक्ताओं की भाषण शैली का अन्वेषण कथा-प्रवचन की विशिष्ट शैली, रामायण को आधार मान कर विभिन्न विषयों पर भाषण।
भजन, कीर्तन, संगीत, गायन में जिनकी रुचि हो तथा कंठ काम करता हो उन्हें इसकी भी शिक्षा दी जायेगी। हारमोनियम, तबला, तम्बूरा, करताल, मजीरा आदि बाजों के बजने की साधारण शिक्षा दी जायेगी और गायन करने के उपयुक्त वाणी तथा कंठ से आवश्यक उतार-चढ़ाव पैदा करने की विधि।
निवास की व्यवस्था
शिक्षार्थियों के निवास के लिए तपोभूमि में समुचित व्यवस्था है। नल, बिजली, सोने के लिए तख्त निःशुल्क उपलब्ध है। भोजन खर्च शिक्षार्थी स्वयं करेंगे। सम्मिलित चौका चलाया जायेगा। छात्र इसका प्रबंधन करेंगे। संभवतः 15 रुपये मासिक में भोजन खर्च चल जायेगा।
तपोभूमि द्वारा संचालित इस शिक्षा-व्यवस्था में पहले गायत्री परिवार के सदस्यों को स्थान दिया जायेगा। इसलिये अपने परिवार के सदस्यों में से जो प्रतिभाशाली हों, जननायक बनने की महत्वाकाँक्षा रखते हों, वे अपना पूरा परिचय लिखते हुए आवेदन भेजें। उपयुक्त व्यक्तियों को चुनकर उन्हें आने की स्वीकृति दी जायेगी। विद्यालय की तैयारी जोरों से आरंभ हो गई है। संभवतः अगले महीने में ही शिक्षा आरंभ हो जायेगी। इसलिए इच्छुकों को अपना आवेदन-पत्र शीघ्र ही भेजना चाहिए।
गायत्री परिवार के कार्यकर्ता इस शिक्षा के उपयुक्त शिक्षार्थी ढूँढ़ने और उन्हें इस शिक्षा में सम्मिलित कराने का प्रयत्न करें, क्योंकि यहाँ की शिक्षा प्राप्त किये हुए लोग उस क्षेत्र में संस्था का कार्य बढ़ाने में बहुत उपयोगी साबित होंगे।

