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Magazine - Year 1960 - Version 2

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अवसरों से लाभ उठाना सीखिये।

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(श्री लक्ष्मीनारायण टंडन ‘प्रेमी’)

अपने वर्तमान से अधिकाँश मनुष्य संतुष्ट नहीं होते हैं। जो वस्तु अपने अधिकार में होती है उसका महत्व, उसका मूल्य हमारी दृष्टि में अधिक नहीं दीखता। वर्तमान अपने हाथ में जो होता। अपने गत जीवन की असफलताओं का भी रोना वे यही कह कर रोया करते हैं कि हमें भगवान या भाग्य ने अच्छे अवसर ही नहीं दिए अन्यथा हम भी जीवन में सफल होते। ऐसा कहना उनकी अज्ञानता है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अनेक ऐसे अवसर आते हैं जिनसे वह लाभ उठा सकता है। पर कुछ लोग अच्छे और उचित अवसर को पहिचानने में ही अक्षम्य होते हैं। ठीक अवसर को भलीभांति पहचानना तथा उससे उचित लाभ उठाना जिन्हें आता है जीवन में सफल वे ही होते हैं। पर यह भी सत्य है कि अच्छे अवसर प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अनेक बार आते हैं। अब हम उन्हें न पहचान पावें या पहचानने पर भी उनसे उचित लाभ न उठा पावें तो यह हमारा अज्ञान है। एक पाश्चात्य विद्वान का कहना है “अवसर के सर के आगे वाले भाग में बाल होते हैं, सर के पीछे वह गंजा होता है। यदि तुम उसे सामने से पकड़ सको, उसके आगे बालों को, तब तो वह तुम्हारे अधिकार में आ जाता है, पर यदि वह किसी प्रकार बचकर निकल गया तो स्वयं जुपिटर भी चाहें तो उसे पकड़ नहीं सकते।” एक उर्दू शायर ने भी कहा है - “गया जो वक्त (समय या अवसर) वह फिर कर नहीं आता, नहीं आता, न पाओगे, न पाओगे, कहीं देखो, कहीं ढूंढ़ो।”

आपको अनेक ऐसे मनुष्य मिलेंगे जो बिना सोचे-समझे यह कह देते हैं कि फलाँ - फलाँ को जो जीवन में सफलतायें मिली वह इत्तफाक के कारण। घटनावश उनका भाग्य उनके ऊपर सदय हो गया और यह इत्तफाक है कि आज सफलता पाकर वे इतने बड़े हो सके। पर सच पूछा जाय तो इत्तफाक से प्रायः कुछ नहीं होता। संसार के समस्त कार्यों के पीछे कार्य - कारण-सम्बन्ध होता है। और यदि इत्तफाक से ही वास्तव में किसी को सुअवसर प्राप्त हो जाता है, तो भी हम न भूलें कि यह बात हमें ‘अपवाद’ के अंतर्गत रखनी चाहिए। नियम, नियम है, और अपवाद, अपवाद। अपवाद नियम नहीं हो सकता। श्री सैमडल स्माइल्स ने कहा है” जीवन में किसी बड़े फल की प्राप्ति के पीछे इत्तफाक का बहुत थोड़ा हाथ होता है।” अंधे के हाथ बटेर भी कभी लग सकती है। कभी किसी अललटप्प साहसिक कार्य या योजना से भी सफलता मिल सकती है, पर सफलता प्राप्त करने का सर्वसाधारण और जाना पहिचाना मार्ग है केवल लगन, स्थिरता, परिश्रम, उद्देश्य के प्रति आस्था और समझदारी।

एक बहुत सुन्दर चित्र आपके सामने आता है। यह चित्र इत्तफाक से ही सुन्दर नहीं बन गया है। उसकी सुन्दरता के पीछे चित्रकार का वर्षों का ज्ञान, अनुभव, परिश्रम और अभ्यास है। इस चित्रकला में योग्यता पाने के लिए उसने बरसों आँखें फोड़ी हैं, दिमाग लगाया है तब उसके हाथ में इतनी कुशलता आ पाई है। उसने उन अवसरों को खोजा है जब वह प्रतिभावान चित्रकारों के संपर्क में आकर कुछ सीख सके। जो अवसर उसके सामने आये, उसने उन्हें व्यर्थ ही नहीं जाने दिया वरन् उन अवसरों से लाभ उठाने की बलवती इच्छा उसे थी और क्षमता भी।

मनुष्यों की समझदारी तथा चीजों को देखने परखने की क्षमता में अन्तर होता है। एक मनुष्य किसी एक घटना या कार्य से बिल्कुल प्रभावित नहीं होता, उससे कुछ भी ग्रहण नहीं कर सकता, जब कि एक दूसरा मनुष्य उसी कार्य या घटना से बहुत कुछ सीखता और ग्रहण करता है। एक रूसी कहावत है कि वह जंगल से होकर गुजरता है और उसे लकड़ी नहीं दिखाई देती। दिल्ली में बारह बरस रहे पर झाड़ झोंकते रहे, ऐसे ही आदमियों के लिए कहा गया है।

साधारण रूप से मनुष्य की बुद्धि तथा प्रवृत्ति तीन प्रकार की हो सकती है। मान लीजिये एक नदी के तट पर तीन लड़के खेल रहे हैं। तीनों खेलने के बाद घर वापस आते हैं। आप एक से पूंछते हैं भाई तुमने वहाँ क्या देखा? वह कहता है ‘वहाँ देखा क्या, हम लोग वहाँ खेलते रहे बैठे रहे।’ ऐसे मनुष्यों की आँखें, कान, बुद्धि सब मंद रहती है। दूसरे लड़के से आप पूछते हैं कि तुमने क्या देखा तो वह कहता है कि ‘मैंने नदी की धारा, नाव, मल्लाह, नहाने वाले, तट के वृक्ष, बालू आदि देखी।’ निश्चय ही उसके बाह्य चक्षु खुले रहे, मस्तिष्क खुला रहा था। तीसरे लड़के से पूछने पर वह बताता है कि ‘मैं नदी को देखकर यह सोचता रहा कि अनन्त काल से इसका स्रोत ऐसा ही रहा है। इसके तट के पत्थर किसी समय में बड़ी-बड़ी शिलाएँ रही होंगी। सदियों के जल प्रवाह की ठोकरों ने इन्हें तोड़ा-मरोड़ा और चूर्ण किया है। प्रकृति कितनी सुन्दर है, रहस्यमयी है। तो फिर इनका निर्माता भगवान कितना महान होगा, आदि।’

यह तीसरा बालक आध्यात्मिक प्रकृति का है। उसकी विचारधारा, अन्तर्मुखी है। ऐसे ही प्रकृति के लोग अवसरों को ठीक से पहचानने और उनसे काम लेने की पूरी क्षमता रखते हैं। सालोमन ने कहा है “बुद्धिमान मनुष्य की आँखें उसके सर में होती हैं किन्तु मूर्ख अंधकार में चलते हैं।”

एक बार जॉनसन ने एक सज्जन से कहा था कि ‘कुछ लोग एक घोड़ागाड़ी में बैठकर उतने थोड़े समय में जितना सीख सकते हैं, उतना कुछ लोग पूरा योरोप घूम कर भी नहीं सीख सकते।’ भला ऐसे आदमी अवसर को क्या पहचानेंगे और उनसे क्या लाभ उठावेंगे।

निकोलन पोसीन नामक प्रसिद्ध चित्रकार ने एक बार कहा था कि मेरे जीवन के व्यवहार व नियम यह है कि जो कुछ करने के योग्य है वह बहुत अच्छी तरह से करना चाहिये।” और जब वह अत्यन्त वृद्ध था तब उससे किसी ने पूछा आपके इतने यश का क्या कारण है। इटली चित्रकारों में उसका इतना ऊँचा स्थान क्यों है? उसने जोर के साथ उत्तर दिया कि मैंने किसी चीज को छोड़ा नहीं, उसके प्रति उपेक्षा नहीं दिखाई। यह है सफलता की कुँजी। सतत परिश्रम के फल स्वरूप ही सफलता मिलती है, इत्तफाक से नहीं जो भी अवसर उनके सामने आये उन्होंने दत्तचित्त हो उनसे लाभ उठाया।

यदि हम एक कक्षा के समस्त बालकों को समान अवसर दें, तो भी हम देखते हैं कि सभी बालक एक समान लाभ नहीं उठाते या उठा पाते। बाह्य सहायता या इत्तफाक का भी महत्व होता है पर हम अँग्रेजी कहावत न भूलें ‘भगवान उनकी ही सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करना जानते हैं।’

अतः आलस्य और कुबुद्धि का त्याग कीजिये। अवसर खोइये मत। उनसे लाभ उठाइये।

अनेक ऐसे आविष्कार हैं जिनके बारे में हम कह सकते हैं कि इत्तफाक से आविष्कर्त्ता उन्हें या गया। पर यदि हम ईमानदारी से गहरे जाकर सोंचे तो स्पष्ट हो जायगा कि इत्तफाक से कुछ नहीं हुआ है। उन आविष्कर्त्ताओं ने कितना अपना समय, स्वास्थ्य, धन और बुद्धि खर्ची है आविष्कार करने के लिए। जिन्हें जनसाधारण इत्तफाक कहता है वह वे अवसर हैं जिनकी कि आविष्कर्ता ने अपनी प्रतिभा के बल पर समृद्धि की है। न्यूटन के पैरों के निकट इत्तफाक से वृक्ष से एक सेब टपक कर गिर पड़ा और न्यूटन ने उसी से गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त ज्ञान कर लिया। पर न जाने कितनों के सामने ऐसे टूट-टूट कर सेब न गिरे होंगे। पर सभी क्यों नहीं न्यूटन की भी भाँति गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त ज्ञात कर सके? कारण स्पष्ट है। अवसर आया और न्यूटन ने उस अवसर को पकड़ा और उससे लाभ उठाया। न जाने कितने वर्षों से न्यूटन ने इस सिद्धान्त की खोज में दिन रात एक किये थे। सेब का उसकी आँखों के सामने गिरना एक ऐसा इत्तफाक था जिसने बिजली की भाँति उनके मस्तिष्क में ज्योति दी और वह इस आविष्कार के ज्ञाता बन सके। अतः यदि आप जीवन में सफलता चाहते हैं तो अवसर से लाभ उठाना सीखिये।

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