अन्य आकस्मिक उपचार
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1. नाल का बाहर निकलना (Prolapse of Umbilical Cord)— यदि शिशु से पूर्व नाल का फंदा बाहर निकल आये, तो यह गम्भीर स्थिति मानी जाती है। ऐसी दशा में मां को इस प्रकार लिटाना चाहिए कि उसके नितम्ब कंधों से सदा ऊंचे रहें। टांगों के बीच कोई स्वच्छ तौलिया रख देना चाहिए, ताकि नाल संक्रमित न हो। डॉक्टर को अविलम्ब बुलाना चाहिए।
2. हाथपैर का बाहर निकलना— इस स्थिति में चिकित्सक को तुरन्त बुलाना आवश्यक है। इस प्रकार के उपचार में उपयुक्त होने वाले जरूरी सामान यथा- चिलमची, बाल्टी, प्याला, गरम पानी आदि पहले से ही तैयार रखना चाहिए।
गर्भ की विषाक्तता (Pre-eclamptic Toxaemia of Pregnancy)— गर्भ के आरम्भ अथवा अन्त में मां के पैरों की उंगलियों में सूजन आ जाना इसका प्रमुख लक्षण है। चिकित्सक को विषाक्तता की इस आरम्भिक स्थिति की तुरन्त सूचना देनी चाहिए, ताकि स्थिति को अधिक गम्भीर होने से बचाया जा सके।
4. एक्लैम्पटिक दौरा (Eclamptic Fits)— गर्भ काल की विषाक्तता के कारण यह दौरा आता है। इसमें मां की मृत्यु तक की भी संभावना रहती है। इस दशा में डॉक्टर की शीघ्रातिशीघ्र बुलाना चाहिए।
5. समय से पूर्व रक्त स्राव— गर्भावस्था में किसी प्रकार का रक्त-स्राव अप्राकृतिक माना जाता है। इस काल में रक्त स्राव आना गर्भपात का लक्षण है, अस्तु चिकित्सक को इसकी तुरन्त सूचना देनी चाहिए, ताकि गर्भपात की स्थिति से सगर्भा को बचाया जा सके।
शिशु-जन्म एक प्राकृतिक शारीरिक क्रिया है। इसमें किसी प्रकार का व्यतिक्रम आना अप्राकृतिक है एवं खतरे की निशानी भी, अतः ऐसी कोई भी अवस्था उत्पन्न होने पर चिकित्सक को अविलम्ब बुलाना आवश्यक है, अन्यथा आगे स्थिति और अधिक गम्भीर हो सकती है।
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