Sunday 02, February 2025
Basant_Panchami_Reel_2025_1.mp4
Dhanya hai apka janam 1.mp4
Ek Tumhi Aadhar1.mp4
गुरुदेव की लक्ष्मी सिद्धि Vasant Panchmi Reel 02_1.mp4
गुरुदेव की सरस्वती सिद्धि Vasant Panchmi Reel 01_1.mp4
गुरुदेव जेसा जीवन जिए Vasant Panchmi Reel 04_1.mp4
गुरुदेव जेसा जीवन जिए Vasant Panchmi Reel 05_1.mp4
गुरुदेव ने प्यार ही प्यार बांटा Vasant Panchmi Reel 03_1.mp4
वसंत के गुणों को अपनाएँ Vasant Panchmi Reel 06_1.mp4
भगवान पर अटूट विश्वास और श्रद्धा | Bhagwan Par Atut Shraddha Aur Vishwas
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 02 February 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 02 February 2025 !!
!! गायत्री माता मंदिर Gayatri Mata Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 02 February 2025 !!
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 02 February 2025 !!
!! महाकाल महादेव मंदिर #Mahadev_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 02 February 2025 !!
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 02 February 2025 !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
बच्चों के विकास करने में सबसे बड़ी कठिनाई सबसे बड़ी दिक्कत जो इस समय पाई जाती है वह यह है कि खराब फैमिली के छोकरे जो स्वयं न पढ़ते हैं न पढ़ने देते हैं दोस्त बनाने की फिक्र में बने रहते हैं कुछ बच्चे ऐसे आपको हर जगह मिलेंगे जैसे हर सर में आपको जुएं मिलेंगे हर चारपाई में खटमल मिलेंगे हर जगह गंदगी में आपको मच्छर मिलेंगे इसी तरीके से आपको हर स्कूल में हर समाज में इस तरीके से मच्छर और खटमल और जुएं मिलेंगे बच्चों के रूप में यह आपके बच्चों का खून पी करके खत्म कर देंगे वह कौन है वह है जो पढ़ते नहीं है वह खुराफाती हैं वह शैतान है शैतान और खुराफाती लड़के जो हैं वह क्या काम करते हैं क्योंकि यह मनोरंजन अकेला नहीं होता मनोरंजन के लिए कोई और साथी चाहिए तभी तो काम बनेगा जब तक कोई और साथी न मिल जाएगा जब तक कोई मित्र न मिल जाएगा तब तक कैसे काम बनेगा अकेले तो खेल खेला नहीं जाता न खेलने के लिए तो कई आदमी चाहिए मजाक करने के लिए और तफरी करने के लिए कई आदमी चाहिए इस तरह के खुराफाती बच्चे खुराफाती बच्चे किसी न किसी को दोस्त बनाने के चक्कर में बने रहते हैं और बेचारे भोले भाले बालक उस दोस्ती के चक्कर में आ जाते हैं और दोस्ती के चक्कर में आकर के उनके साथ घूमना फिरना जाना और आना शुरू करते हैं हमारे लड़के अधिकांश 100 में से 80 लड़के जो आजकल तबाह हुए हैं बर्बाद हुए दोस्ती के चक्कर में दोस्ती कितनी खौफनाक और खतरनाक है आपको जानना चाहिए जो जो आदमी काम का होगा जो आदमी समझदार होगा उसके पास टाइम कहां से आएगा हमारे पास कुंभ के मेले वाले आ जाते हैं झगड़ा करते हैं बेटा तुम खराब समय मत खराब करने आया कर गुरु जी आप के दर्शन करने के लिए आया बेटा कोई फायदा नहीं दर्शन कर ले चल हमारा कोई फायदा नहीं होता है मत आया कर यहां मैं न दर्शन करना चाहता हूं ना कराना चाहता हूं तू बेकार में तंग करता है दर्शन करने आया हूं दर्शन करने आया हूं बेटा मेरे देख 8 पेज मैंने लिखा होता तो अखंड ज्योति के 3 लेख लिखे होते और मैंने ढाई सौ चिट्ठियों का जवाब दिया होता और जाने मैंने क्या किया होता तू दर्शन कर ले दर्शन कर ले दर्शन कर ले भाड़ में गए दर्शन कर ले बेकार में टाइम खराब करवाता है मेरा दर्शन करने आया हूं जा निकल जा इसीलिए क्या कहता हूं मित्रों मुझे बहुत बुरा लगता है जब दर्शन करने के लिए लोग आते हैं |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
वसंत प्रकृति एवं मानव मन के संयोग का सुंदर पर्व है। प्रकृति अपने समस्त श्रृंगार के साथ वसंत का अभिनंदन करती है। सुरभित आम के बौर और कोयल की कूक से वसंत के आगमन का संदेश प्रसारित होता है। इस संदेश से मानव मन भी पुलकित एवं उल्लसित हो उठता है। वसंत मन में नव उमंग व हृदय में सजल भाव को जगाता है। नई आशाओं एवं कामनाओं को जन्म देता है। संभवतः इन्हीं सब कामनाओं को परिष्कृत और उदात्त करने के लिए सरस्वती पूजन की परंपरा प्रचलित हुई है। सचमुच ही वसंत उमंग, उत्साह और उल्लास तुथा बुद्धि, विद्या एवं ज्ञान के समन्वय का पर्व है।
ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति का सुंदर स्वरूप निखर उठता है। पतझड़ के पश्चात पेड़ पौधे नई-नई कोपलों, फूलों से आच्छादित हो जाते हैं। धरती सरसों के फूलों की वासंती चादर ओढ़कर श्रृंगार करती है। विभिन्न प्रकार के पुष्पों की मनमोहक छटा के साथ पलाश के रंग तथा कोयल की कूक सर्वत्र छा जाती है। वसंत पुष्पों के माध्यम से प्रसन्नता व आनंद का उपहार सौंपता है। वसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति सजीव, जीवंत एवं चैतन्यमय हो उठती है। वसंती बयार में प्रकृति का रूप 'नवगति-नवलय-तालछंद नव' से समन्वित हो जाता है। प्रकृति कुसुम-कलिकाओं की सुगंध से गमक उठती है। आम के बौर वातावरण को सुरभित कर देते हैं। प्रकृति के इस परिवेश में मानव भी उसके साथ थिरक उठता है, तदाकार हो जाता है। प्रकृति और मानव का यह आनंद वसंतोत्सव के रूप में प्रकट होता है।
इस पुण्य पर्व पर सरस्वती पूजन का विधान है। वसंत के नवपरिवेश में मानवीय इच्छा, आशाएँ एवं कामनाएँ अँगड़ाई लेती हैं। प्रकृतिप्रदत्त इन भावों को परिष्कृत व उदात्त बनाने के लिए ज्ञान की देवी सरस्वती का पूजन किया जाता है, ताकि इन भावों को नूतन दिशा मिल सके। मानव उत्साह और उल्लास के साथ ही आत्मज्योति को प्रज्वलित कर सके। वह तमस से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़कर अमरत्व का दिव्य उपहार प्राप्त कर सके। इसीलिए इस अवसर पर सरस्वती पूजन किया जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वसंत ऋतु में ग्रहों का योग भी मांगलिक प्रकाश में अनुगमन करता है व ग्रहों की ग्रीष्म स्थिति के प्रारंभिक काल के परिचित स्वरूप का आभास कराता है, इसलिए भी सरस्वती पूजन का विधान है।
सरस्वती सरिता एवं कला की वाग्देवी के रूप में सांस्कृतिक आस्था का चिरकाल से संबल रही है। सरस्वती एक ओर जहाँ विलुप्त नदी के रूप में जन-संस्कृति का प्रतीक है, तो दूसरी ओर देशभूमियों में व्याप्त भारती की सांस्कृतिक चेतना का विकास है। सरस्वती पूजन कला-संस्कृति के रूप में सदियों से जनमानस की आध्यात्मिक जिज्ञासा की प्यास बुझाती रही है। यह अनेकता में एकता समेटे हुए चिर प्रेरणास्त्रोत होकर विवेकशील जीवन का आदर्श भी बनी रही है। असंख्य कवि-कलाकारों ने देवी सरस्वती की साकार प्रतिमा को सत्यं शिवं सुंदरम् भाव से भरा है।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति फरवरी 2003 पृष्ठ 39-40
| Newer Post | Home | Older Post |
