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Monday 03, March 2025

शुक्ल पक्ष पंचमी, फाल्गुन 2025




पंचांग 04/03/2025 • March 04, 2025

फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी, पिंगल संवत्सर विक्रम संवत 2081, शक संवत 1946 (क्रोधी संवत्सर), फाल्गुन | पंचमी तिथि 03:16 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र भरणी 02:37 AM तक उपरांत कृत्तिका | इन्द्र योग 02:06 AM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण बालव 03:17 PM तक, बाद कौलव 02:01 AM तक, बाद तैतिल |

मार्च 04 मंगलवार को राहु 03:21 PM से 04:47 PM तक है | चन्द्रमा मेष राशि पर संचार करेगा |

 

सूर्योदय 6:43 AM सूर्यास्त 6:14 PM चन्द्रोदय 9:12 AM चन्द्रास्त 11:18 PM अयनउ त्तरायण द्रिक ऋतु वसंत

 

  1. विक्रम संवत - 2081, पिंगल
  2. शक सम्वत - 1946, क्रोधी
  3. पूर्णिमांत - फाल्गुन
  4. अमांत - फाल्गुन

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष पंचमी   - Mar 03 06:02 PM – Mar 04 03:16 PM
  2. शुक्ल पक्ष षष्ठी   - Mar 04 03:16 PM – Mar 05 12:51 PM

नक्षत्र

  1. भरणी - Mar 04 04:29 AM – Mar 05 02:37 AM
  2. कृत्तिका - Mar 05 02:37 AM – Mar 06 01:08 AM


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गायत्री उपासना के पाँच चरण कौन से हैं? | Gayatri Upasana Ke Panch Charan Koun Se Hai

गायत्री उपासना के पाँच चरण कौन से हैं? | Gayatri Upasana Ke Panch Charan Koun Se Hai

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मुझे चाहिए और कुछ भी न भगवन Mujhe Chahaiye Aur Kuch Bhi Na Bhagwan |

मुझे चाहिए और कुछ भी न भगवन Mujhe Chahaiye Aur Kuch Bhi Na Bhagwan |

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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
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गायत्री माता - अखंड दीपक
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चरण पादुका
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चरण पादुका
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सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
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प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
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शिव मंदिर - शांतिकुंज
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हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
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आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

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आज का सद्वाक्य

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नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! आज के दिव्य दर्शन 04 March 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

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!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!

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परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



अमेरिका के एक किसान भगवान की भक्ति पर अटूट विश्वास रखता था। भगवान की भक्ति से मनुष्य के जीवन में क्या विकास बन सकता है, यह लोगों को बताता। लोग जब यह पूछते, "ऐसी भक्ति जैसी आपकी है, कैसे आ सकती है?" तो वह एक ही जवाब देता, "हमारा अटूट विश्वास और श्रद्धा भगवान पर हो, तो सारे के सारे चमत्कार जो आध्यात्मिकता के साथ जुड़े हुए हैं, मिल सकते हैं।" वह बड़ा चमत्कारी किसान था, थामस जर्सी। लोगों ने पूछा, "आप रहस्य बता दीजिए, भगवान क्यों आपकी सहायता करता है, हमारी क्यों नहीं करता? भगवान के चमत्कार आपमें आते हैं, हममें क्यों नहीं आते? भगवान की विशेषताएं आप में हैं, हममें क्यों नहीं होती? भगवान आपको प्यार करते हैं, हमको क्यों नहीं करते? भजन तो हम भी करते हैं, गिरजे में तो हम भी जाते हैं, आपको क्यों सहायता मिलती है, हमें क्यों नहीं मिलती?"
जर्सी ने बहुत दिन लोगों को तरह-तरह से जवाब दिए, पर समाधान न हो सका। लोग बार-बार कहते रहे, "नहीं साहब, रहस्य की बात हमको बता दीजिए।" वह यही कहता रहा, "श्रद्धा, अटूट श्रद्धा, अगर मनुष्य के पास हो, तो परिणाम निकलने ही चाहिए, और निकल के ही रहेंगे।" जर्सी थामस कहता रहा, लेकिन लोगों को विश्वास नहीं हुआ। फिर उसने कहा, "देखो, विश्वास की शक्ति को मैं तुम्हें बताता हूं, अगर विश्वास हो तो आदमी क्या से क्या पा लेता है, जिसमें भगवान को भी पाया जा सकता है।"
फिर उसने कहा, "आओ, आज मैं तमाशा दिखाऊंगा। अमेरिका का सबसे बड़ा झरना है नियाग्रा। नियाग्रा में पानी की धार इतनी ऊंचे से आती है कि उसकी भारी कोहराम मचता है, मीलों तक कान से सुनाई नहीं पड़ता। बहुत चौड़ी नदी वहां से आती है, इतना बड़ा झरना दुनिया में कहीं नहीं है, अमेरिका में तो है ही नहीं। उस झरने को देखने के लिए लोग आते हैं।"
नियाग्रा के फाल के पास जर्सी ने बहुत से अमेरिकन्स को बुलाया और यह कहा, "मैं आपको श्रद्धा के चमत्कार, भगवान की भक्ति के चमत्कार दिखाता हूं।" वह नाव से गया और रस्सा दूसरे पेड़ से दूसरी तरफ बांध दिया। चार फर्लांग चौड़ा रस्सा, एक पेड़ से इधर बंधा हुआ है और एक इधर से बंधा हुआ है। उसने कहा, "देखो, मैं अपने विश्वास की शक्ति दिखाता हूं, विश्वास के आधार पर, श्रद्धा के आधार पर हम किस तरीके से नाव पार कर लेते हैं और कैसे इसको पार करके चले आते हैं।"फिर उसने रस्से पर खड़े होकर धीरे-धीरे पार करना शुरू कर दिया। खड़े होकर, अकेला किसान थामस जर्सी पार करता हुआ चला गया। 

पं श्रीराम शर्मा आचार्य
 

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अखण्ड-ज्योति से



आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी प्राणियों में एक ही चेतना का अस्तित्व विद्यमान है। शरीर की दृष्टि से वे भले ही अलग-अलग हों, पर वस्तुतः आत्मिक दृष्टि से सभी एक हैं। इस संदर्भ में परामनोविज्ञान की मान्यता है विश्व-मानस एक अथाह और असीम जल राशि की तरह है। व्यक्तिगत चेतना उसी विचार महासागर (यूनीवर्सल माइण्ड) की एक नगण्य -सी तरंग है, इसी के माध्यम से व्यक्ति अनेक विविध चेतनाएँ उपलब्ध करता है और अपनी विशेषताएँ सम्मिलित करके फिर उसे वापस उसी समुद्र को समर्पित कर देता है।

 इच्छा शक्ति द्वारा वस्तुओं को प्रभावित करना अब एक स्वतंत्र विज्ञान बन गया है, जिसे ‘साइकोकिनस्रिस’ कहते हैं। इस विज्ञान पक्ष का प्रतिपादन है कि ठोस दिखने वाले पदार्थों के भीतर भी विद्युत् अणुओं की तीव्रगामी हलचलें जारी रहती है। इन अणुओं के अंतर्गत जो चेतना तत्त्व विद्यमान है, उन्हें मनोबल की शक्ति-तरंगों द्वारा प्रभावित, नियंत्रित और परिवर्तित किया जा सकता है। इस प्रकार मौलिक जगत पर मनःशक्ति के नियंत्रण को एक तथ्य माना जा सकता है।

भारत ही नहीं, अपितु अन्य देशों में भी अभ्यास द्वारा इच्छाशक्ति बढ़ाने और उसे प्रखर बना लेने के रूप में ऐसी कई विचित्रताएँ देखने को मिल जाती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य कुछ विशेष परिस्थतियों में ही शान्त, सन्तुलित, सुखी और संतुष्ट भले ही  रहता हो, परन्तु इच्छाशक्ति को बढ़ाया जाय तथा अभ्यास किया जाय, तो वह अपने को चाहे जिस रूप में बदल  सकता है। इच्छा और संकल्पशक्ति के आधार पर असंभव लगने वाले दुष्कर कार्य भी किए जा सकते हैं।

कुछ वर्ष पूर्व मैक्सिको (अमेरिका) में डॉ. राल्फ एलेक्जेंडर ने इच्छाशक्ति की प्रचण्ड क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन यह था कि आकाश में छाये बादलों को किसी भी स्थान से किसी भी दिशा में हटाया जा सकता है और उसे कैसी भी शक्ल दी जा सकती है। इतना ही नहीं, बादलों को बुलाया और भगाया जा सकता है। एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक ऐलेन एप्रागेट ने साइकोलॉजी पत्रिका में उपरोक्त  प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए बताया कि मनुष्य की इच्छा शक्ति अपने ढंग की एक सामर्थ्यवान विद्युत् धारा है और उसके आधार पर प्रकृति की हलचलों को प्रभावित कर सकना पूर्णतया संभव है।

अमेरिका के ही ओरीलिया शहर में डॉ. एलेग्जेंडर ने एक शोध संस्थान खोल रखा है, जहाँ वस्तुओं पर मनः शक्ति के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन विधिवत् किया जा रहा है। तद्नुसार एक व्यक्ति के विचार दूरवर्ती दूसरे व्यक्ति तक भी पहुँच सकते हैं और वस्तुओं को ही नहीं, व्यक्तियों को भी प्रभावित कर सकते हैं। यह तथ्य अब असंदिग्ध हो चला है। अनायास घटने वाली घटनाएँ ही इसकी साक्षी नहीं है, वरन् प्रयोग करके यह भी संभव बनाया जा सकता है कि यदि इच्छा शक्ति आवश्यक परिमाण में विद्यमान हो या दो व्यक्तियों के बीच पर्याप्त घनिष्ठता हो तो विचारों के वायरलैस द्वारा एक दूसरे से सम्पर्क संबंध स्थापित किया जा सकता है और अपने मन की बात कही-सुनी जा सकती है।

अभी तक ऐसी अनेक घटनाएँ घटी है और ऐसे कई प्रामाणिक तथ्य मिले हैं, जिसके आधार पर यह प्रतिपादित किया गया है कि मनुष्य अपनी बढ़ी हुई इच्छाशक्ति को और बढ़ाकर इस संसार के सिरजनहार की तरह समर्थ और शक्तिमान बन सकता है, क्योंकि अलग-अलग एकाकी इकाई दिखाई पड़ने पर भी वह है तो उसी का अंश।

पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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