Wednesday 05, February 2025
भले ही लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं पर सोच और कर यही रहे हैं कि वे किसी प्रकार अपनी वर्तमान सम्पत्ति को जितना अधिक बढ़ा सकें, दिखा सकें उसकी उधेड़ बुन में जुटे रहें। यह मार्ग निरर्थक है। आज की सबसे बड़ी बुद्धिमानी यह है कि किसी प्रकार गुजारे की बात सोची जाए। परिवार के भरण-पोषण भर के साधन जुटाये जायें और जो जमा पूँजी पास है उसे लोकोपयोगी कार्य में लगा दिया जाए। जिनके पास नहीं है वे इस तरह की निरर्थक मूर्खता में अपनी शक्ति नष्ट न करें।
जिनके पास गुजारे भर के लिए पैतृक साधन मौजूद हैं, जो उसी पूँजी के बल पर अपने वर्तमान परिवार को जीवित रख सकते हैं वे वैसी व्यवस्था बना कर निश्चित हो जायें और अपना मस्तिष्क तथा समय उस कार्य में लगायें, जिसमें संलग्न होना परमात्मा को सबसे अधिक प्रिय लग सकता है।
समय ही मनुष्य की व्यक्तिगत पूँजी है, श्रम ही उसका सच्चा धर्म है। इसी धन को परमार्थ में लगाने से मनुष्य के अन्तःकरण में उत्कृष्टता के संस्कार परिपक्व होते हैं। धन वस्तुतः समाज एवं राष्ट्र की सम्पत्ति है। उसे व्यक्तिगत समझना एक पाप एवं अपराध है। जमा पूँजी में से जितना अधिक दान किया जाए वह तो प्रायश्चित मात्र है। सौ रुपये की चोरी करके कोई पाँच रुपये दान कर दें तो वह तो एक हल्का सा प्रायश्चित ही हुआ। मनुष्य को अपरिग्रही होना चाहिए। इधर कमाता और उधर अच्छे कर्मों में खर्च करता रहे यही भलमनसाहत का तरीका है।
जिसने जमा कर लिया उसने बच्चों को दुर्गुणी बनाने का पथ प्रशस्त किया और अपने को लोभ-मोह के माया बंधनों में बाँधा। इस भूल का जो जितना प्रायश्चित कर ले, जमा पूँजी को सत्कार्य में लगा दे उतना उत्तम है। प्रायश्चित से पाप का कुछ तो भार हल्का होता ही है। पुण्य परमार्थ तो निजी पूँजी से होता है। वह निजी पूँजी है- समय और श्रम। जिसका व्यक्तिगत श्रम और समय परमार्थ कार्यों में लगा समझना चाहिए कि उसने उतना ही अपना अन्तरात्मा निर्मल एवं सशक्त बनाने का लाभ ले लिया।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति -जुलाई 1967 पृष्ठ 53
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंडया जी ने 2 लाख सब्सक्राइबर पूर्ण करने पर ऋषि चिंतन टीम को दी बधाई।
उनकी प्रशंसा करो जो धर्म पर दृढ़ हैं। गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
प्रयागराज महाकुम्भ में गायत्री परिवार शिविर की एक झलक |
भविष्यवाणी जो सच हो रही है- युग बदल रहा है | Bhavishyavani Jo Sach Ho Rahi Hai- Yug Badal Raha Hai |
ब्रह्म मुहूर्त का महत्व | Brahma Muhurta Ka Mahatva | गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
भगवान का रहस्य | क्या हम सच में उसे समझ सकते हैं? |
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 05 February 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
जो भी आदमी और मनुष्य आपको ऐसा मालूम पड़े जिसके पास टाइम नहीं है और काम का नहीं है उसको आप मत आने दीजिए आपके पास छूत की बीमारी लगा देगा और आपको भी ऐसे ही कर देगा कई कई बुड्ढे और कई दूसरे आदमी ऐसे बेकार होते हैं और यहां बैठ जाएंगे और वहां बैठ जाएंगे और यहां गप्प हांकेंगे वहां गप्प हांकेंगे फिर आपका वक्त खराब कर रहे हैं जिसके यहां जा पहुंचेंगे उसका भी वक्त खराब कर देंगे और अपने जैसा वाहियात बना देंगे उनके पास फालतू आदमी हैं वो बहुत भयंकर आदमी हैं जिनके पास फालतू आदमी हैं वो बहुत भयंकर आदमी हैं जिनके पास फालतू आदमी हैं वो बहुत टाइम है बहुत भयंकर आदमी हैं और वह बालक जो खिलाड़ी जिसके पास टाइम है उसके पास पढ़ने के लिए पढ़ने को टाइम नहीं है और फुर्सत है यहां घूमता है और वहां घूमता है वह मित्रों बहुत खौफनाक खौफनाक लड़का है खाली दिमाग शैतान की दुकान आपको याद भी रखना चाहिए जो खाली रहेगा उसके दिमाग में शैतानी और खुराफात के अलावा दूसरी चीज क्या आ सकती है इसीलिए मित्रों क्या होता हुआ चला जाएगा वह बच्चे बच्चे जो होते हैं वह उनको ले जाते हैं कभी सिगरेट पिलाते हैं कभी बीड़ी पिलाते हैं कभी खुराफात कराते हैं कभी सिनेमा दिखाते हैं कोई क्या कर देते हैं हमारे और आपके बच्चे वहीं से तबाह होते हैं और इस तबाही से आपको बचाना चाहिए आपको अपने लड़कों की संगति पर सबसे पहला ध्यान रखना चाहिए कि हमारा लड़का किन लोगों के साथ में घूमता है और कहां जाता है और कोई लड़का घर में बार-बार आता है और किसके घर में हमारा लड़का जाता है अगर आपने इस बात को ध्यान में रखा नहीं तो फिर बड़ी मुश्किल आ जाएगी और फिर आपको सारी की सारी बुराइयां जितनी भी बुराइयां जो कम होती है वह एक और एक आ जाएंगी और लड़के इसके बाद में इस तरह के लड़कों के पास जाने के बाद में दूसरी तरह की वह बुराई सीख पाएंगे कौन सी वाली जो बच्चों के समझ में प्रारंभिक जीवन में नहीं आती है उसकी बुराई नहीं समझ पाते वह बेचारे समझते भी नहीं है नीम का और बबूल का पेड़ नीम के और बबूल के पेड़ में आप जरा सी उसमें निशानियां मार दीजिए उसमें से 2-4 लोहे के टुकड़े मार दीजिए और उसमें से गोंद निकलना शुरू हो जाएगा गोंद लोग पेड़ों में से निकाल लेते हैं ढाक में से गोंद निकाल लेते हैं आम में से गोंद निकाल लेते हैं बबूल में से गोंद निकाल लेते हैं नीम में से गोंद निकाल लेते हैं गोंद को कई बच्चे ले आते हैं और बेच बेच के खा जाते हैं यह नीम के पेड़ों में गए वो निशान मार दिए गोंद आ गया उखाड़ लाए बाजार में बेच दिया दो आने का पकौड़ी खा ली गोंद निकालने से पेड़ का क्या हो जाता है आपने कभी देखा है जिसमें से गोंद निकलना शुरू हो जाता है वह पेड़ कमजोर हो जाता है और दुबला हो जाता है और खोखला हो जाता है और वह सूखता चला जाता है और उबरने नहीं पाता मेरा इशारा आप समझ गए होंगे मेरा इशारा समझ गए होंगे कि मैं क्या कहने वाला हूं गंदी बातों को मैं क्या कहूंगा और गंदी बातों की व्याख्या मुझे क्यों करनी चाहिए बस मैं इशारा में कहता हूं |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
यह समय युग परिवर्तन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य का है। इसे आदर्शवादी कठोर सैनिकों के लिये परीक्षा की घड़ी कहा जाये, तो इसमें कुछ भी अत्युक्ति नहीं समझी जानी चाहिये। पुराना कचरा हटता है और उसके स्थान पर नवीनता के उत्साह भरे सरंजाम जुटते हैं। यह महान् परिवर्तन की-महाक्रान्ति की वेला है।...यहाँ तो प्रसंग हथियारों से सुसज्जित सेना का चल रहा है। वे ही यदि समय की महत्ता, आवश्यकता को, न समझते हुए, जहाँ-तहाँ मटरगस्ती करते फिरें और समय पर हथियार न पाने के कारण समूची सेना को परास्त होना पड़े तो ऐसे व्यक्तियों पर तो हर किसी का रोष ही बरसेगा, जिनने-आपात स्थिति में भी प्रमाद बरता और अपना तथा अपने देश के गौरव को मटियामेट करके रख दिया।
जीवन्तों, जाग्रतों और प्राणवान् में से प्रत्येक को अनुभव करना चाहिये कि यह ऐसा विशेष समय है जैसा कि हजारों-लाखों वर्षों बाद कभी एक बार आता है। गाँधी के सत्याग्रही और बुद्ध के परिव्राजक बनने का श्रेय, समय निकल जाने पर अब कोई किसी भी मूल्य पर नहीं पा सकता। हनुमान और अर्जुन की भूमिका हेतु फिर से लालायित होने वाला कोई व्यक्ति कितने ही प्रयत्न करे, अब दुबारा वैसा अवसर हस्तगत नहीं कर सकता। समय की प्रतीक्षा तो की जा सकती है, पर समय किसी की भी प्रतीक्षा नहीं करता। भगीरथ, दधीचि और हरिश्चन्द्र जैसा सौभाग्य अब उनसे भी अधिक त्याग करने पर भी पाया नहीं जा सकता।
समय बदल रहा है। प्रभातकाल का ब्रह्ममुहूर्त अभी है। अरुणोदय के दर्शन अभी हो सकते हैं। कुछ घण्टे ऐसे हैं उन्हें यदि प्रमाद में गँवा दिये जायें, तो अब वह गया समय लौटकर फिर किस प्रकार आ सकेगा? युग-परिवर्तन की वेला ऐतिहासिक, असाधारण अवधि है। इसमें जिनका जितना पुरुषार्थ होगा, वह उतना ही उच्च कोटि का शौर्य पदक पा सकेगा। समय निकल जाने पर, साँप निकल जाने पर लकीर को लाठियों से पीटना भर ही शेष रह जाता है।
इन दिनों मनुष्य का भाग्य और भविष्य नये सिरे से लिखा और गढ़ा जा रहा है। ऐसा विलक्षण समय कभी हजारों-लाखों वर्षों बाद आता है। इसे चूक जाने वाले सदा पछताते ही रहते हैं और जो उसका सदुपयोग कर लेते हैं, वे अपने आपको सदा-सर्वदा के लिये अजर-अमर बना लेते हैं। गोवर्धन एक बार ही उठाया गया था। समुद्र पर सेतु भी एक ही बार बना था। कोई यह सोचता रहे कि ऐसे समय तो बार-बार आते ही रहेंगे और हमारा जब भी मन करेगा, तभी उसका लाभ उठा लेंगे, तो ऐसा समझने वाले भूल ही कर रहे होंगे। इस भूल का परिमार्जन फिर कभी कदाचित् ही हो सके।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
प्रज्ञा अवतार की विस्तार प्रक्रिया
| Newer Post | Home | Older Post |
