• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Akhandjyoti Magazine
    • Books
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Sunday 05, October 2025

×

VIDEO
यूरोप के सबसे बड़े मंच पर भारत की गूंज | Dr. Chinmay Pandya @ DOLMED.Tech Forum 2025

यूरोप के सबसे बड़े मंच पर भारत की गूंज | Dr. Chinmay Pandya @ DOLMED.Tech Forum 2025

124 views
Like
Share
Comment



VIDEO
आध्यात्मिक पतन का कारण मानसिक असंतुलन

आध्यात्मिक पतन का कारण मानसिक असंतुलन

126 views
Like
Share
Comment



VIDEO
कारण शरीर का उत्कर्ष भक्तियोग से | गायत्री की पंचकोशी साधना एवं उपलब्धियां | Rishi Chintan

कारण शरीर का उत्कर्ष भक्तियोग से | गायत्री की पंचकोशी साधना एवं उपलब्धियां | Rishi Chintan

129 views
Like
Share
Comment



VIDEO
अनीति को सहना कायरता है | साहस और शौर्य का सच्चा अर्थ | Inspirational Speech

अनीति को सहना कायरता है | साहस और शौर्य का सच्चा अर्थ | Inspirational Speech

130 views
Like
Share
Comment



VIDEO
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर  #Prageshwar_Mahadev 05 October 2025 !!

!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर  #Prageshwar_Mahadev 05 October 2025 !!

5 likes 4699 views
Like
Share
Comment



VIDEO
!! #गायत्री_माता_मंदिर #Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

!! #गायत्री_माता_मंदिर #Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

5 likes 4725 views
Like
Share
Comment



VIDEO
अमृत सन्देश:- कम पूंजी में प्रकाशन की व्यवस्था

अमृत सन्देश:- कम पूंजी में प्रकाशन की व्यवस्था

13 likes 7907 views 1 comments 3 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
हमारा दृष्टिकोण भी तो सुधरे | Hamara Drishtikon Bhi To Sudhre | Change your approach #inspiration

हमारा दृष्टिकोण भी तो सुधरे | Hamara Drishtikon Bhi To Sudhre | Change your approach #inspiration

13 likes 7907 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Comment



गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
21 likes 8197 views 3 comments 36 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
14 likes 7933 views 2 comments 13 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
13 likes 7923 views 2 comments 5 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
13 likes 7955 views 2 comments 10 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
16 likes 7976 views 2 comments 12 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
13 likes 7928 views 1 comments 7 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
12 likes 7928 views 1 comments 6 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
11 likes 7915 views 2 comments 7 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
12 likes 7907 views 1 comments 6 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
12 likes 7911 views 7 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
14 likes 7967 views 1 comments 19 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
14 likes 7967 views 1 comments 16 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
10 likes 7911 views 1 comments 6 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
11 likes 7930 views 1 comments 7 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
14 likes 7961 views 1 comments 13 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
14 likes 7960 views 1 comments 12 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
13 likes 7962 views 1 comments 8 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
12 likes 8000 views 1 comments 26 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


अमृतवाणी:- गायत्री मंत्र की व्याहृतियाँ | Gayatri Mantra Ki Vahatiyan

9 likes 7488 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Comment



!! अखण्ड दीपक #Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

9 likes 7489 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment



!! #गायत्री_माता_मंदिर #Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

4 likes 4717 views
Like
Share
Comment



!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

9 likes 7482 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! महाकाल महादेव मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 05 October 2025 !!

4 likes 4706 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



गायत्री मंत्र जो है, तीन व्याहृतियाँ हैं।
कितनी व्याहृतियाँ हैं? तीन।
कौन-कौन सी तीन व्याहृतियाँ हैं?
तीन व्याहृतियों के नाम हैं — भूः, भुवः, स्वः।

यही लगाता है न गायत्री में?
हाँ महाराज जी, मैं तो यही तीन लगाता हूँ।
बस, यह तीन हैं बेटे!
"फिर क्यों साहब, तीन ही हैं?"
नहीं बेटे, अभी और रह गईं।
"धत्त तेरे का! तो आपने पहले क्यों नहीं बता दी?"

बेटे, दो खंडों में बताई हैं।
कितनी व्याहृतियाँ हैं?
सात।
सात व्याहृतियाँ कौन-सी हैं?

जो हम प्राणायाम का मंत्र आपसे कराते हैं, तो हम तीन-तीन व्याहृतियाँ वो बताते हैं — शुरू वाली।
और चार और बता देते हैं।
चार कौन-सी?
बेटे, तपः, महः, जनः, सत्यं।
"और पहले क्यों नहीं बताई?"

यह दो खंड हैं।
एक इसका एक खंड वो है — त्रिपदा।
त्रिपदा वो खंड है जो आदमी के अध्यात्म से, आदमी के चिंतन से, दृष्टिकोण से संबंधित है।
और चार चरण, चार और भाग रह गए।
वो कौन-से हैं?

यह है क्रियायोग, और वो है ज्ञानयोग।
यह है विज्ञान भाग, वो है ज्ञान भाग।
दो खंडों में बँटा हुआ है।
गायत्री मंत्र की व्याहृतियाँ दो खंडों में बँटी हुई हैं।

आप यहाँ जाना — सप्तर्षि आश्रम।
उसमें सात ऋषियों की मूर्तियाँ बनी हुई हैं।
आप देखना, बीच में शंकर जी बैठे हुए हैं, और चारों ओर घूम जाना।
वहाँ सात ऋषियों की मूर्तियाँ बनी हुई हैं।

सात ऋषियों की मूर्तियों के ऊपर गायत्री मंत्र की सात व्याहृतियाँ लगी हुई हैं।
सात व्याहृतियाँ क्या हैं?
सात ऋषि हैं यह!
"सात व्याहृतियाँ क्या हैं?"
सात ऋषि हैं!
"ऋषि तो एक मनुष्य होते हैं।"
हाँ बेटे, मनुष्य।
"तो भगवान भी मनुष्य थे?"
हाँ, भगवान मनुष्य भी थे।

ऋषि मनुष्य थे, मान लिया।
बेटे, मनुष्य भी ऋषि हुए हैं।
और ऋषि जो बादलों में से रात को निकलते हैं — ये मनुष्य नहीं हैं।
मनुष्य मर जाते हैं।
मनुष्य जला दिए जाते हैं।
मनुष्य की एक सीमा होती है।

श्रीकृष्ण भगवान की एक सीमा थी।
देवकी के यहाँ, वसुदेव के घर में पैदा हुए थे — जेलखाने में।
और देखो, डेरावन में — गुजरात में डेरावन नाम की एक जगह है।
डेरावन के पास श्रीकृष्ण भगवान जब पेड़ के नीचे बैठे हुए थे, तब एक बहेलिया आया।
बहेलिए ने समझा यह हिरण का पैर है, और उसने तीर चलाकर मारा।
श्रीकृष्ण भगवान के पैर में लगा, और पैर से श्रीकृष्ण भगवान घायल हो गए।
घायल होकर उनको सेप्टिक हो गया और वहीं उनकी मृत्यु हो गई।

मृत्यु होने के बाद वहीं पर पड़े रहे।
अर्जुन जब बाद में गए — "गुरुजी उठो, गुरुजी!"
मिलना चाहा, तो वो चले गए।

भाई जो थे, उनमें अतिशयोक्ति कथा आती है।
उनके भाई बलराम ने कहा — "हमारा भैया कहाँ चला गया? हमारा भैया कहाँ चला गया?"
पता लगाते-लगाते श्रीकृष्ण भगवान के पास वो भी पहुँचे।
और वहीं देखा — उनकी लाश पड़ी हुई थी, और कुत्ते खा रहे थे।
वहाँ कोई जलाने वाला भी नहीं था, और वहाँ पर मरे हुए पड़े थे।

यह देखकर भाई को बड़ा दुख हुआ।
उसने वहीं अपना प्राण त्याग दिया — किनने? बलराम ने।
स्कंद पुराण की कथा कह रहा हूँ।

दोनों भाइयों की जब मृत्यु हो गई, तो बस वहीं पड़े रहे।
माँस, माँस गिद्धों ने खा लिया, कुत्तों ने खा लिया, कौवों ने खा लिया।
और अर्जुन को जब यह पता चला — "श्रीकृष्ण भगवान का क्या हुआ?"
तब वो तलाश करने के लिए गए।
स्कंद पुराण की कथा के मुताबिक, उन्होंने दोनों भाइयों की हड्डियों को इकट्ठा करके उनका दाह कर्म किया है।
संस्कार किया है।
श्राद्ध किया है।
तर्पण किया है।

श्रीकृष्ण भगवान क्या हो गए बेटे?
मर गए।
"महाराज जी, मर गए भगवान?"
हाँ, मर गए भगवान।
जो शरीरधारी हैं, सब मरे हैं।
सबको मरना पड़ेगा।

12 likes 7935 views 1 comments 3 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



इस अद्भुत संसार में विभिन्न प्रवृत्तियों तथा मनोदशाओं के लोग पाये जाते हैं। एक ही स्थिति, परिस्थिति तथा दशा वाले अनेक लोगों में से कोई अत्यधिक दुःखी और व्यग्र देखे जा सकते हैं और अनेक यथासम्भव प्रसन्न तथा संतुष्ट।

निःसन्देह, ऐसे व्यक्ति विचित्र होने के साथ दयनीय भी कम नहीं होते, जो हर समय दुःखी और क्लान्त ही बने रहते हैं। मिलते ही दुःखों, कष्टों तथा कठिनाइयों का रोना लेकर बैठ जाते हैं। आय कम है, खर्चा पूरा नहीं होता, बीवी बच्चे स्वस्थ ही नहीं रहते, दफ्तर में तनाव बना रहता है, तरक्की के चांस आते ही नहीं या आकर निकल जाते हैं, कोई लाभ ही नहीं होता, बेचारे ऑफिसर के अन्याय, रोष अथवा पक्षपात के शिकार बने हुये हैं—इस प्रकार की व्यक्तिगत और समय बहुत खराब आ गया है, संसार विनाश के मुख पर खड़ा है, भ्रष्टाचार चरम-सीमा पर जा पहुंचा है,

मानव जाति का भविष्य खतरे में है, समाज बहुत दूषित हो चुका है, सुधार की सम्भावनायें क्षीण हो गई हैं, बढ़ती हुई वैज्ञानिक प्रगति हानि के सिवाय लाभ तो कर ही नहीं सकती, किसी समय भी युद्ध हो सकता है, मनुष्य का घोर-पतन हो गया है, सदाचार तथा सज्जनता तो कहीं दीखती ही नहीं, मर्यादा और अनुशासन जैसी कोई वस्तु ही नहीं रह गई है—आदि जगबीती सुनाते रहते हैं। उनकी व्यथा-कथा सुनने से ऐसा पता चलता है, मानो संसार के सारे दुःख सारी चिन्तायें इन्हीं बेचारों के भाग्य में भर दी गई हैं। संसार में इन जैसा कष्ट-ग्रस्त दूसरा कोई न होगा।

‘विचार करने की बात है कि जिस मनुष्य के मत्थे, इतनी मुसीबतें तथा चिन्तायें हों, क्या वह सामान्य मनोदशा में संसार के सारे कार्य तथा व्यापार करता रह सकता है। किसी एक वास्तविक चिन्ता के मारे तो मनुष्य का खाना-पीना, सोना-जागना हराम हो जाता है और जब तक वह उससे मुक्ति नहीं पा लेता, चैन की सांस नहीं लेता। परिश्रम और प्रयत्न में एड़ी-चोटी का पसीना एक कर देता है। तब इतनी चिन्ताओं वाले जीवन की गाड़ी ढकेलता हुआ सामान्य गति से चलता रह सकता है—ऐसी आशा नहीं की जा सकती। ऐसे व्यक्ति की केवल दो ही दशायें सम्भव हो सकती हैं—या तो उसे विक्षिप्त हो जाना चाहिये अथवा कोई महान् पुरुष। किन्तु वह इनमें से कुछ नहीं होता। एक सामान्य सा दुःखी तथा क्लान्त व्यक्ति ही बना रहता है।

.... क्रमशः जारी
 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
 अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1968 पृष्ठ 37

10 likes 7938 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

220406425



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj