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Sunday 13, July 2025

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मायावी जादू क्या है | Mayavi Jadu Kya hai | जीवन पथ के प्रदीप | श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या

मायावी जादू क्या है | Mayavi Jadu Kya hai | जीवन पथ के प्रदीप | श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या

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अमृत सन्देश:- मानवीय गरिमा और सिद्धांतों का महत्व |Manviya Garima Aur Siddhanto Ka Mehtav

अमृत सन्देश:- मानवीय गरिमा और सिद्धांतों का महत्व |Manviya Garima Aur Siddhanto Ka Mehtav

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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
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गायत्री माता - अखंड दीपक
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चरण पादुका
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चरण पादुका
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सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
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परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
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परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
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प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
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शिव मंदिर - शांतिकुंज
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हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
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आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

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आज का सद्वाक्य

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नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 13 July 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

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!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष 13 July 2025 गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

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!! गायत्री माता मंदिर Gayatri Mata Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 July 2025

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!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 July 2025

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!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 July 2025

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!! महाकाल महादेव मंदिर Mahadev_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 July 2025

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!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 July 2025

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!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 13 July 2025

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अमृतवाणी: आध्यात्मिक सफलता का रहस्य | पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

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परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



आध्यात्मिक सफलताएं आपको तब मिलेंगी जब आपका उस दिशा में मन लगेगा मन अगर नहीं है बेगार भुगतने के तरीके से लकीर पीटने के तरीके से, कोई भी भजन पूजन कर लेंगे क्या परिणाम निकलने वाला है? और क्या परिणाम कुछ परिणाम नहीं निकलने वाला है लकीर पीटने से क्या बना है? लकीर पीटने के हिसाब से अगर घर का कोई काम करते रहे, तो बेटे क्या मिलने वाला है? कुछ नहीं मिलेगा कोई सफलता नहीं मिलेगी जब तक कि आप किसी काम में अपने आप को भुला नहीं देंगे गवाँ नहीं देंगे तन्मय नहीं हो जाएंगे यह सिद्धांत बहुत देर तक राजा द्रुपद को द्रोणाचार्य समझाते रहे तो महाराज जी, यह बताइए फिर मैं कैसे जमाई तलाश करूं? और कैसे लड़की का अपनी ब्याह करूं? इसके लिए एक परीक्षा रखनी पड़ेगी कि मन लगाकर कि कोई आदमी काम कर सकता है कि नहीं तो लीजिए हमको तो मालूम नहीं है मन की परीक्षा क्या हो सकती है? उन्होंने एक मछली का इंतजाम किया नकली मछली, जो घूमती थी एक चक्कर के ऊपर चक्कर के ऊपर घूमती थी जैसे पंखा घूमता है उस पर उन्होंने यह शर्त रखी कि जो कोई मछली की आँख में तीर मार देगा बस उसको हम मान लेंगे यह मन लगाना जानता है और निशाना लगाना जानता है निशाना लगाना और मन लगाना एक ही बात है बेटे मन लगाने से और निशाना लगाने में कोई फर्क नहीं पड़ता कला नहीं है कोई मन लगाना ही कला है मन लगाना ही कला है जब दूर-दूर के राजाओं ने और राजकुमारों ने सुना द्रौपदी का स्वयंवर होने वाला है सब पहुँचे हजारों हजारों राजकुमार पहुंचे हम शादी करेंगे द्रौपदी बड़ी योग्य हैं हम शादी करेंगे तो उन्होंने इम्तहान रख दिया चलिए निशाना लगाइए निशाना लगाइए आप मछली की आँख में निशाना लगा सकते हैं तो आपका स्वयंवर हो सकता है और आपके-आपके साथ शादी हो सकती है बहुत से राजकुमार आए देखा कि यह तो बड़ी भीड़ लगाएंगे और समय खराब करेंगे पहले आप बात का जवाब दीजिए फिर हम पूछेंगे आपने निशाना लगा सकते हैं? कि नहीं? राजकुमार एक आया और उससे पूछा द्रोणाचार्य ने, बताइए इस चक्कर में घूमने वाली मछली कि आपको क्या-क्या चीज दिखाई पड़ती है? हमको मछली की टांगें दिखाई पड़ती हैं हाथ पाँव दिखाई पड़ते हैं सिर दिखाई पड़ता है तो आप भाग जाइये आप निशाना नहीं लगा सकते लगाएंगे तो लगा कर दिखाइए लगाया लगा ही नहीं आपको सारी मछली दिखाई पड़ती है भला कैसे निशाना लगा सकते हैं आप? आपको निशाना नहीं है दूसरा आया, तीसरा आया, चैथा आया सब से सवाल पूछते गए और जिन्होंने यह कहा मछली का यह हिस्सा दिखता है उसको उन्होंने मना कर दिया तुमको तीर चलाने की जरूरत नहीं है क्योंकि तुम्हें सफलता नहीं मिल सकती सब भागते चले गए एक लड़का आखिर में आया उसने कहा गुरुदेव मैं निशाना लगाने के लिए कोशिश करूंगा तब बेटे पहले निशाने से पहले यह बताओं तुमको मछली का क्या-क्या शक्ल इस पानी की छाया में  दिखाई पड़ता है? गुरुदेव हमको मछली की आँख दिखाई पड़ती है मछली की मूंछ? नहीं बिल्कुल नहीं और मछली की पूंछ? बिल्कुल नहीं आँख के अलावा हमको कुछ दिखाई नहीं पड़ता ठीक है बेटे, अपना तीर उठाओ और निशाना लगाओ उन्होंने अर्जुन ने तीर लगाया ठीक निशाने पर बैठा बेटे कोई कला नहीं है दुनिया में अच्छा काम करने की और सफलता पाने की दुनिया में कोई  कला नहीं है एक ही कला है कि आप सारा मन लगाकर के और सारी तबीयत लगा कर के किसी काम में अपने आप को खो देते हैं, वही चीज सामने रह जाए दूसरी रहे नहीं 

पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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अखण्ड-ज्योति से



कहा गया है कि “अखण्ड ज्योति” परिजन स्वयं पाँच-पाँच के मण्डलों में गठित हों और पाँच से पच्चीस बन कर मण्डल को पूर्णता तक पहुँचाएँ। साथ ही कहा गया है कि वे अपने परिवार तथा संपर्क क्षेत्र में से ढूंढ़ खोज कर पाँच प्रतिभाशाली महिलाओं की एक मण्डली बनाएँ। वे भी परस्पर संपर्क साधते हुए पाँच से पच्चीस बनने का लक्ष्य प्राप्त करें। साप्ताहिक सत्संग उनके लिए भी उसी प्रकार अनिवार्य किया गया है जैसा कि पुरुषों द्वारा सम्पन्न किया जाता है। इतना बन पड़ने पर ही यह माना जाएगा कि पुरुषों का एवं नारियों का सतयुग की वापसी के लिए खड़ा किया जाने वाला प्रथम प्रयास जड़ पकड़ गया।

पुरुषों को नैतिक, बौद्धिक, सामाजिक क्रान्ति की तैयारी करनी है। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की संरचना की भी। व्यक्ति, परिवार और समाज के तीनों ही क्षेत्रों में सत्प्रवृत्ति संवर्धन और कुरीति उन्मूलन की बहुमुखी प्रवृत्तियों को जन्म देना और मार्गदर्शन करना है। इसके लिए कार्यकर्ताओं की योग्यता और परिस्थितियों की आवश्यकता से तालमेल बिठाते हुए अनेक प्रकार के छोटे-बड़े कार्यक्रम हाथ में लिए जाने है, जिनके लिए आवश्यकता हो तो शांतिकुंज के साथ विचार विनिमय भी करते रहा जा सकता है।
                  

महिलाओं के लिए सामूहिक सत्संगों को सुनिश्चित बनाने के उपरांत शिक्षा संवर्धन, आर्थिक स्वावलम्बन सम्बन्धित गृह उद्योग, संगीत अभ्यास से मुखर होने और अभिव्यक्तियों को प्रकट कर सकने का अभ्यास, कुरीति उन्मूलन के लिए छोटे-बड़े आयोजन तथा परिवार निर्माण की समुचित योग्यता प्राप्त करना सभी महिला मण्डलों के लिए समान कार्यक्रम बना है। इससे आगे उन्हें भी ऐसा कुछ कर दिखाना है जिससे मात्र व्यक्तिगत स्थिति ही न सुधरे वरन् व्यापक नारी समस्याओं के समाधान के लिए अभीष्ट तंत्र खड़े करने का सरंजाम जुट सकें। असहाय महिलाओं को समर्थ बनाना और उन्हें लोक सेविका बनाने का कार्यक्रम भी इसी योजना को निकट भविष्य में कार्यान्वित किया जाने वाला बड़ा कदम है, जो अपने समय पर अपने ढंग से निरंतर उठते रहेंगे, गति पकड़ते रहेंगे।

क्रमशः जारी
 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1988 पृष्ठ 60

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