Monday 14, July 2025
महिला जागरण का शुभारंभ घर से करे | आदर्श के निर्वाह में नर, नारी से पीछे न रहे | Part 03
अमृतवाणी:- प्रातः काल का महत्व | Pratahakal Ka Mehtav पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 14 July 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी: अन्नमय कोष- सेहत की असली चाबी | पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
अगर आप अन्नमय कोष ठीक रखें तो आपकी सेहत अच्छी रह सकती है और लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं कल मैंने आपसे कहा था और आपको आलस्य और प्रमाद हटा देने के पश्चात आप किस तरीके से दुनिया में सफलताएं पा सकते हैं श्रम का देवता जो अपने जो अपने पसीनों की बूंदों के रूप में हीरें और मोती टपकाता रहता है आप उन हीरें और मोतियों को समेट करके रख सकते हो, तो मैं आपको यकीन दिला सकता हूँ आप मालदार हो करके रहेंगे जो भी आपकी मालदारी की इच्छा हो विद्या की दृष्टि से आप मालदार होना चाहेंगे आप विद्वान हो जाएंगे आप पैसे की दृष्टि से मालदार होना चाहेंगे आप पैसे वाले हो जाएंगे आप शरीर की दृष्टि से मालदार होना चाहेंगे आप सेहत वाले हो जाएंगे जो भी आप चाहेंगे हो जाएंगे शर्त यह है कि आप शरीर को बर्बाद न करें तबाह न करें उसको छेनी हथौड़ा लेकर के आप तोड़ने के लिए खड़े हो गए हैं कृपा कीजिए इसके ऊपर तोड़िए मत आप इसको बना नहीं सकते तो भगवान ने जो बना हुआ शरीर दिया है आप इस तरीके से रहिए, तमीज से रहिए, होशियारी से रहिए, भले मानसों के तरीके से रहिए इसको बर्बाद करने पर उतारू मत रहिए आप यह कर सकते हो तो अन्नमय कोष की प्रत्यक्ष साधना हो जाएगी परोक्ष साधना बताइए बेटे मैं बता दूँगा मेरे क्यों प्राण खाता है? नहीं साहब कोई ऐसी विधि बताइए जादू बताइए जादू इसे पूछना जादू पूछने से पहले यह देख की जो अन्नमय शरीर है उसको व्यवहारिक जीवन में उपासना कैसे की जा सकती है?
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
हर किसी को समझना और समझाया जाना है कि नारी आद्यशक्ति है। वही सृष्टि को उत्पन्न करने वाली, अपने स्तर के अनुरूप परिवार का तथा भावी पीढ़ी का सृजन करने में पूरी तरह समर्थ है। इक्कीसवीं सदी में उसी का वर्चस्व प्रधान रहने वाला है। नर ने अपनी कठोर प्रकृति के आधार पर पराक्रम भले ही कितना ही क्यों न किया हो, पर उसी की अहंकारी उद्दंडता ने अनाचार का माहौल बनाया है। स्रष्टा की इच्छा है कि स्नेह, सहयोग, सृजन करुणा, सेवा और मैत्री जैसी विभूतियों को संसार पर बरसने का अवसर मिले, ताकि युद्ध जैसी अनेकानेक दुष्टताओं को सदा सर्वदा के लिए अन्त हो सके। इस भविष्यता को स्वीकार करने के लिए लोक मानस को समझाया और दबाया जाना चाहिए कि व नारी को समता से ही नहीं, वरिष्ठता से भी लाभान्वित करें।
सतयुग की वापसी’ का शुभारम्भ करना वर्तमान जन समुदाय का काम है। ढाँचा और तंत्र खड़ा करना, सरंजाम जुटाना और वातावरण बनाना उसी का काम है। पर उन सभी उत्तरदायित्वों को अगली पीढ़ी के ही कंधों को उठाना होगा। आज जो पौधे लगाए जा रहे हैं उनके द्वारा विकसित हुए वृक्षों की शोभा सुषमा को सुरक्षित रखने का कार्य तो वे ही करेंगे, जो आज भले ही जन्में हों, जन्मने जा रहे हों, पर आवश्यकता के समय तक प्रौढ़ परिपक्व होकर रहेंगे।
ऐसा समुन्नत पीढ़ी को जन्म दे सकना तथा सुसंस्कृत बनाना उन नारियों के लिए ही सम्भव हो सकेगा जो आज के महान अभ्युदय में भागीदार बनकर नव सृजन की महती भूमिका निभाने में किसी न किसी प्रकार अपनी विशिष्टता का परिचय देंगी। आज के नारी जागरण आन्दोलन को भविष्य में अतिशय प्रभावित करने वाला बनाना भी इसका एक महान उद्देश्य है।
क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1988 पृष्ठ 60
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