Monday 13, October 2025
अमृत सन्देश:- क्या आप अब भी सोये रहेंगे ? Kya Aap Ab Bhi Soye Rahenge
कर्म की गति बड़ी गहन है | Karm Ki Gati Badi Gahan Hai | Dr Chinmay Pandya, Rishi Chintan
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 13 October 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी:- भजन करने के बाद भी फायदा क्यों नहीं पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
यह कैसा भजन है जो आदमी के जीवन को परिष्कृत नहीं कर सका? यह भजन किस काम का आएगा? यह शांति कैसे दे देगा? फिर यह मुक्ति कहाँ से मिल जाएगी? फिर भगवान से साक्षात्कार कैसे हो जाएंगे? यह कैसे हो जाएगा? फिर भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ?
रात भर मेरे मन का कोई हाहाकार करता रहा—भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ? चारों तरफ घूम रहा—भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ? भजन से क्या फायदा हुआ?
इसमें क्यों कुछ शक्ति लगाएं बेटे? फिर मैं नास्तिक जैसा हो गया, नास्तिक जैसा हो गया। सवेरे मैंने माला बंद कर दी, माला बंद कर दी और माला को एक ताख पर रख दिया। अब मैं भजन नहीं करूंगा। यह भजन! इन लोगों को इतना समय हो गया है, मुझे तो एक साल भी नहीं हुआ है। इनका कोई फायदा नहीं दिख रहा, तो मुझे कैसे फायदा कर देगा?
यह मेरा मन अनुमान करने लगा, नास्तिक होता चला गया। लेकिन फिर उस दिन वो विवेक मेरे भीतर आया, मेरा गुरु मेरे भीतर आया, जो समाधान कर दिया, जो मैं आज आपका समाधान करता हूँ। उसने यह कहा—यह कहा भजन एकांगी है। इनके पास एकांगी भजन है और एकांगी भजन के बारे में ये ख्याल करते हैं कि अकेले भजन से मेरा बेड़ा पार हो जाएगा। यह बहुत बड़ी गलती है।
यह हमने बताया था। क्या बताया था? भजन अकेला नहीं हो सकता। भजन के लिए चार चीजों की ज़रूरत है, चार चीजों की ज़रूरत है। रोटी अकेले नहीं बन सकती। रोटी के लिए अनाज चाहिए, रोटी के लिए आग चाहिए, रोटी के लिए पानी चाहिए और रोटी के लिए पकाने वाला चाहिए। अकेले रोटी नहीं बन सकेगी।
नहीं साहब, वह अनाज होगा, अनाज होगा तो हमारे चल चैके में सारी रोटी पक के तैयार हो जाए? महाराज जी, रोटी तो रखी रही। पकाने वाला था नहीं, पकाने वाला कोई नहीं था। और चूल्हे में आग, आग भी नहीं थी, और पानी, पानी भी नहीं था। तो बेटे, कैसे पकेगी फिर रोटी?
चार चीजों के बिना रोटी नहीं पकती। आत्मिक उन्नति के लिए भजन एक चीज है, एक इकाई है। महत्वपूर्ण इकाई है, मैं मानता हूँ। भजन की आवश्यकता मैं मानता हूँ। कोई आदमी अगर यह कहेगा कि अकेला भजन आदमी की जीवन की समस्याओं को और आत्मिक प्रगति की समस्या को हल कर सकता है, तो मैं कहूँगा ऐसा नहीं हो सकता। ऐसा नहीं हो सकता।
अकेली एक चीज से नहीं हो सकता। अकेला भजन, अकेला भजन काफी नहीं है। भजन के साथ-साथ में चारों चीजें होनी चाहिए—साधना, स्वाध्याय, संयम और सेवा। यह चारों सम्मिश्रित हैं मेरी क्रिया योग में, मेरी उपासना में, मेरे भजन में, जो सर्वांगीण है। सर्वांगीण है। एक अंश भजन का भी है बेटे, एक अंश है। वो भी चैथाई अंश है। भजन के लिए मैंने जितना श्रम किया है और मैंने निष्ठाएँ इकट्ठी की हैं, दिमाग खर्च किया है—यह इसके चौथाई है। तीन चौथाई नहीं है।
तीन चौथाई मेरा श्रम, मेरी उपासना जीवन की उपासना के रूप में—स्वाध्याय के रूप में, संयम के रूप में, सेवा के रूप में खर्च हुई है।
अखण्ड-ज्योति से
सदना ने अपने पूर्वजन्म के कर्म मानकर चुपचाप दंड सहा और जगन्नाथपुरी धाम की यात्रा शुरू की. धाम के निकट पहुंचे तो भगवान ने अपने सेवक राजा को प्रियभक्त सदना कसाई की सम्मान से अगवानी का आदेश दिया. प्रभु आज्ञा से राजा गाजे-बाजे लेकर अगुवानी को आया. सदना ने यह सम्मान स्वीकार नहीं किया तो स्वयं ठाकुरजी ने दर्शन दिए।
उन्हें सारी बात सुनाई- तुम पूर्वजन्म में ब्राहमण थे. तुमने संकेत से एक कसाई को गाय का पता बताया था. तुम्हारे कारण जिस गाय की जान गई थी वही स्त्री बनी है जिसके झूठे आरोपों से तुम्हारा हाथ काटा गया. उस स्त्री का पति पूर्वजन्म का कसाई बना था जिसका वध कर गाय ने बदला लिया है।
भगवान बोले- सभी के शुभ और अशुभ कर्मों का फल मैं देता हूं. अब तुम निष्पाप हो गए हो. घृणित आजीविका के बावजूद भी तुमने धर्म का साथ न छोड़ा. इसलिए तुम्हारे प्रेम को मैंने स्वीकार किया. मैं तुम्हारे साथ मांस तोलने वाले तराजू में भी प्रसन्न रहा. भगवान के दर्शन से सदनाजी को मोक्ष प्राप्त हुआ. भक्त सदनाजी की कथा हमें बताती है कि भक्ति में आडंबर नहीं भावना मायने रखती है. भगवान के नाम का गुणगान करना सबसे बड़ा पुण्य है।
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