Saturday 15, February 2025
कृष्ण पक्ष चतुर्थी, फाल्गुन 2025
पंचांग 16/02/2025 • February 16, 2025
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी, पिंगल संवत्सर विक्रम संवत 2081, शक संवत 1946 (क्रोधी संवत्सर), माघ | चतुर्थी तिथि 02:16 AM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र हस्त 04:31 AM तक उपरांत चित्रा | धृति योग 08:05 AM तक, उसके बाद शूल योग | करण बव 01:02 PM तक, बाद बालव 02:16 AM तक, बाद कौलव |
फरवरी 16 रविवार को राहु 04:39 PM से 06:02 PM तक है | चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा |
सूर्योदय 7:00 AM सूर्यास्त 6:02 PM चन्द्रोदय 9:35 PM चन्द्रास्त 9:15 AM अयन उत्तरायण द्रिक ऋतु शिशिर
- विक्रम संवत - 2081, पिंगल
- शक सम्वत - 1946, क्रोधी
- पूर्णिमांत - फाल्गुन
- अमांत - माघ
तिथि
- कृष्ण पक्ष चतुर्थी
- Feb 15 11:52 PM – Feb 17 02:16 AM - कृष्ण पक्ष पंचमी
- Feb 17 02:16 AM – Feb 18 04:53 AM
नक्षत्र
- हस्त - Feb 16 01:39 AM – Feb 17 04:31 AM
- चित्रा - Feb 17 04:31 AM – Feb 18 07:35 AM
SHRAVAN
पुण्य और तप का सही उपयोग | The proper use of virtue and austerity
गायत्री मंत्र का अधिकार किसे है | Gayatri Mantra Ka Adhikaar Kise Hai |
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! महाकाल महादेव मंदिर #Mahadev_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 February 2025 !!
!! गायत्री माता मंदिर Gayatri Mata Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 February 2025 !!
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 February 2025 !!
!! अखण्ड दीपक Akhand Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) एवं चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 February 2025 !!
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष 16 February 2025 गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 February 2025 !!
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 16 February 2025 !!
!! आज के दिव्य दर्शन 16 February 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
हमने भगवान को देखा नहीं है, हमने कहां रहता है, कैसा है, कितना लंबा-चैड़ा है, नाक, कान कैसे हैं, उसके देखे नहीं हैं, लेकिन गुरु को हमने देखा है। उसको हमने जिंदगी में तीन बार आंख से देखा है, लेकिन उसकी चैबीसों घंटे आवाज हमारे कानों में आती है, हमारे दिल में आती है। क्या करना चाहिए? उसी के मुताबिक हमने यह किया है। कौन सा वाला काम? दो वाले काम। क्या? आपसे बोलना बंद कर दिया है, और एकांत में रहना शुरू कर दिया है। मौन हम धारण करते हैं और एकांत में हम रहते हैं। यह दो काम उसी के कहने से किए हैं। फिर क्या होता है? हमारा भगवान के लिए हम करते हैं, और हमारे लिए भगवान करता है। क्या करता है? भगवान हमारे लिए बॉडीगार्ड की तरह से पीछे-पीछे फिरता रहता है। जब वह आता है, तो यह कहता है हमेशा, "तू हिम्मत मत हारना, डरना मत किसी से, हम बॉडीगार्ड हैं। जो तुझे हैरान करेगा, उसको हम ठीक कर देंगे, उसके हम नाक में दम कर देंगे, उसको हम धूल में मिला देंगे।" ऐसा है हमारा बॉडीगार्ड, और ऐसा है हमारा पायलट। रास्ता कहां से है, दिखाई नहीं पड़ता। हम सोचते हैं, हम कहां जाएं? बस, वो रास्ते में आगे-आगे बॉडीगार्ड चलता है। उन्होंने कहा, "जोखिम वाली जगह और खतरे वाली जगह को हम चलते, आगे-आगे और आप पीछे से आइए।" हम उसके बॉडीगार्ड के पीछे चलते हैं, हमारा बॉडीगार्ड आगे चलता है, हमारा पायलट आगे चलता है, और हम सुरक्षित हो करके मंत्री के तरीके से आ गए। प्रत्यक्ष हमारे सामने परोक्ष की बात कौन कहता है? गलत धारणा है। यही है हमारे जीवन का सार।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
जिनके पास अभीष्ट योग्यता, भावना और सुविधा हो उन्हें इस आपत्तिकाल में मानवता की पुकार सुनकर आगे आना चाहिए और लोभ-मोह की कीचड़ में सड़ते रहने की अपेक्षा उस आदर्शवादी महानता का वरण करना चाहिए जिसे किसी समय इस देश के प्रत्येक नागरिक द्वारा सहज स्वभाव अपनाया जाता था। परिस्थितियाँ, मनोभूमि और प्रवाह प्रचलन बदल जाने से अब इस प्रकार के कदम बढ़ाना दुस्साहस जैसा प्रतीत होता है। किसी समय, जिसमें इतनी भी जीवट न हो, उसे मृतक तुल्य माना जाता था।
आज की परिस्थितियों में जो लोग वरिष्ठ अथवा क्लिष्ट वानप्रस्थ का मार्ग अपना सकेंगे विश्व मानव और विश्व-शान्ति के लिए अपना थोड़ा-बहुत भी योगदान दे सकेंगे वे बड़भागी माने जायेंगे। इस घोर अन्धकार में उन छोटे दीपकों का साहस भी भूरि-भूरि सराहने योग्य माना जायगा।
सम्भवतः इस आह्वान को प्रत्येक जीवित और जागृत आत्मा द्वारा सुनने योग्य माना जायगा। सम्भवतः बहुतों की आन्तरिक आकाँक्षा इस दिशा में कदम बढ़ाने की होगी भी किन्तु यह सम्भव है कि वे ऐसी विषम परिस्थितियों में जकड़े हुए हो कि व्यवहारतः कुछ अधिक कर सकना उनके लिए सम्भव न हो। विधि की विडम्बना विचित्र है। कुछ की परिस्थितियाँ बहुत कुछ करने योग्य होती हैं पर मन इतना गिरा मरा होता है कि आदर्शों की तरफ बढ़ने की इच्छा तक नहीं उठती। इसे विपरीत कुछ ऐसे भी होते है कि जिनका अन्तरात्मा महामानवों के चरण-चिन्हों पर चलते हुए कुछ कर गुजरने के लिए निरन्तर छटपटाता रहता है पर परिस्थितियाँ इतनी विपरीत होती हैं कि उन्हें लाँघ सकना किसी जिम्मेदार एवं कर्त्तव्य परायण व्यक्ति के लिए सम्भव ही नहीं होता वरन् उन्हें मन मसोस कर बैठना पड़ता है।
मिशन के लिए भी वह सम्भव नहीं कि वानप्रस्थ कार्यकर्त्ताओं के घर परिवार का आर्थिक उत्तरदायित्व वहन कर सके। अधिक से अधिक इतना ही सम्भव है कि कार्यकर्त्ताओं के भोजन-वस्त्र की व्यवस्था जुटाई जाती रहे। ऐसी दशा में जिन्हें घर से बाहर जाकर कार्य-क्षेत्र में कूदने की सुविधा नहीं है उन्हें स्थानीय क्षेत्र में ही प्रकाश फल का प्रयत्न करना चाहिए। सक्रिय सदस्यों और कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी सृजन-सेना के द्वितीय मोर्चे पर लड़ने वाले सैनिक माना जाता है। नियमित रूप से कुछ घण्टे अथवा समय दे सकने वाले और अपनी आजीविका का उपयुक्त अंश इस प्रयोजन के लिए लगाने वाले व्यक्ति भी अपने क्षेत्र में इतना काम कर सकते हैं जिसे अति-महत्वपूर्ण कह कर सराहा जा सके।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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