Saturday 15, March 2025
कृष्ण पक्ष द्वितीया, चैत्र 2025
पंचांग 16/03/2025 • March 16, 2025
चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत 1946 (क्रोधी संवत्सर), फाल्गुन | द्वितीया तिथि 04:58 PM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र हस्त 11:45 AM तक उपरांत चित्रा | वृद्धि योग 02:48 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग | करण गर 04:58 PM तक, बाद वणिज 06:15 AM तक, बाद विष्टि |
मार्च 16 रविवार को राहु 04:53 PM से 06:22 PM तक है | 01:15 AM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा |
सूर्योदय 6:29 AM सूर्यास्त 6:22 PM चन्द्रोदय 8:21 PM चन्द्रास्त 7:44 AM अयन उत्तरायण द्रिक ऋतुवसंत
- विक्रम संवत - 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत - 1946, क्रोधी
- पूर्णिमांत - चैत्र
- अमांत - फाल्गुन
तिथि
- कृष्ण पक्ष द्वितीया
- Mar 15 02:33 PM – Mar 16 04:58 PM - कृष्ण पक्ष तृतीया
- Mar 16 04:58 PM – Mar 17 07:33 PM
नक्षत्र
- हस्त - Mar 15 08:54 AM – Mar 16 11:45 AM
- चित्रा - Mar 16 11:45 AM – Mar 17 02:47 PM
SHRAVAN
इस दहेज ने ही फैलाया, भारी अत्याचार है | Is Dahej Ne Hi Failaya Bhari Atyachar Hai , Pragya Geet
भगवान की कृपा कैसे पाएँ | Bhagwan Ki Kripa Kaise Paye
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 16 March 2025 !!
!! गायत्री माता मंदिर Gayatri Mata Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 March 2025 !!
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 March 2025 !!
!! अखण्ड दीपक Akhand Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) एवं चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 March 2025 !!
!! आज के दिव्य दर्शन 16 March 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष 16 March 2025 गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 March 2025 !!
!! महाकाल महादेव मंदिर #Mahadev_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 16 March 2025 !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
उपासना किसे कहते हैं? उपासना कैसी होती है? लोग मुझे पूछते रहते हैं, "हम भक्ति करते हैं या नहीं करते हैं, बताइए?" तो बेटे, मैं हमेशा उपासना के स्वरूप के बारे में तीन उदाहरण देता रहता हूं। आपको भी यह तीन उदाहरण देना चाहता हूं। भगवान मनुष्य के जीवन में कैसे आता है? बताइए। एक आता है भगवान, उदाहरण तो कुछ अच्छा नहीं है, पर मैं देना ही चाहता हूं। एक आता है बुखार जैसा। बुखार कैसा होता है? बुखार ऐसा होता है कि सामान्य जीवन से असामान्य तरह का जीवन हो जाता है। आदमी का बुखार में क्या हो जाता है? देह गरम होती है, और सब आदमी की ठंडी होती है, और बुखार वाले की गर्म होती है। सब आदमी का सिर हल्का रहता है, और बुखार वाले का सिर गर्म हो जाता है। बुखार वाले को प्यास लगती है, बुखार वाले की आंखें गरम रहती हैं। यह क्या मतलब है? आपका? मेरा मतलब यह है कि जब भगवान आता है किसी मनुष्य के जीवन में, जिसको कि आप चमत्कार कहते हैं, चमत्कार तब आएंगे जब भगवान साथ-साथ आएगा। भगवान साथ नहीं आएगा, तो चमत्कार नहीं आएगा। चमत्कार नहीं आएगा जब तक भगवान नहीं आएगा। भगवान के पीछे-पीछे चमत्कार आता है। भगवान के आगे-आगे नहीं आता। भगवान ना आए, चमत्कार आ जाए, ऐसा नहीं हो सकता। भगवान जब आता है, तो कैसे आता है? बुखार जैसे आता है। बुखार से क्या मतलब है? बुखार से मतलब, बेटे, यह है। पक्का शरीर, पक्का मन, दोनों के दोनों ही गर्म रहते हैं। लोगों से भिन्न तरीके से रहते हैं। लोगों के चिंतन के तरीके अलग होते हैं। लोग जिस तरीके से रहते हैं, वैसे नहीं रहता। उसके मन पर कुछ और तरह की छाई होती है, उसके ऊपर कुछ मस्ती, अजीब तरह की छाई होती है। उसके ऊपर कुछ नशे, अलग तरह के छाए होते हैं। उसका चिंतन कुछ अलग तरह का होता है। उसके पैर कुछ और तरीके से चलते हैं, साधारण लोगों की तरीके से नहीं चलते। साधारण लोग? साधारण लोग तो बेटे, मैं जैसे बताऊं, वैसे ही हैं। उनको मैं जितनी गालियां दूं, उतनी गालियां कम हैं। उनकी होशियारी बादल के बराबर है, और उनकी गैरतदारी, ईमानदारी मिट्टी के बराबर है। सिद्धांत इनके पास नाम को भी नहीं है, और चालाकी सिर से लेकर पैर तक भरी पड़ी है। लोग, लोगों की तरीके से, लोगों से अलग तरह से रहते हैं। कौन भगवान के भक्त?
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
धन की आवश्यकता परिवार के लिये होती है। मनुष्य जितना कमाता है उसका अपने लिये तो एक बहुत स्वल्प भाग ही काम में लाता है, शेष तो परिवार के प्रयोजनों में ही खर्च होता है। मरने के बाद भी मनुष्य अपने उपार्जन को अपने परिवार के लिये ही छोड़ जाता है। जिस परिवार के प्रति मनुष्यता की ममता धन के ही समान नहीं, वरन् उससे भी अधिक है, उसकी संतुलित उन्नति के लिए समुचित ध्यान न दिया जाए तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात ही होगी।
जेवर, कपड़ा भोजन, सवारी, जायदाद आदि के साधन लोग अपने परिजनों के लिये जुटाते हैं। उनकी बीमारी, शादी आदि के अवसरों पर भी मनमाना खर्च करते हैं, पर यह ध्यान नहीं देते कि इनकी योग्यता, शक्ति, सामर्थ्य, प्रतिभा एवं व्यक्तित्व को विकसित करने के लिये भी कुछ किया जाना चाहिये। बहुत हुआ तो स्कूल कॉलेजों की शिक्षा का प्रबंध कर दिया। इससे नौकरी तो मिल सकती है पर वे सद्गुण नहीं आते जो जीवन के वास्तविक विकास के लिए आवश्यक हैं। इन्हीं सद्गुणों को विकसित करने का प्रयत्न परिवार के प्रति सच्ची सेवा एवं ममता कही जा सकती है।
प्राचीन काल में यह देश नग-रत्नों की खान था। घर-घर में महापुरुष पैदा होते थे। उनके विचार और कार्य इतने उच्च कोटि के थे कि संसार भर में वे देव श्रेणी में गिने जाते थे। यहाँ के तैंतीस करोड़ निवासी, तैंतीस कोटि देवताओं के नाम से विख्यात थे। भारतीय समाज के इतने सुविकसित और सुसंस्कृत होने की महत्ता को सारे संसार ने स्वीकार किया था और इसी आधार पर भारत को जगद्गुरु एवं चक्रवर्ती शासक का सम्मान प्रदान किया था। ऐसे सद्गुणी कभी गरीब रह ही नहीं सकते। लक्ष्मी उनका पीछा छोड़ ही नहीं सकती यह देश स्वर्ण सम्पदाओं का स्वामी था। यहाँ के लोग सोने को पहनते ही न थे वरन् उसके भवन तक बनाते थे। बल और पुरुषार्थ में उनका कोई सानी न था।
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति -दिसंबर 1960 पृष्ठ 26
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