Saturday 19, October 2024
कृष्ण पक्ष तृतीया, कार्तिक 2081
पंचांग 20/10/2024 • October 20, 2024
कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया, पिंगल संवत्सर विक्रम संवत 2081, शक संवत 1946 (क्रोधी संवत्सर), आश्विन | तृतीया तिथि 06:46 AM तक उपरांत चतुर्थी तिथि 04:17 AM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र कृत्तिका 08:31 AM तक उपरांत रोहिणी | व्यातीपात योग 02:11 PM तक, उसके बाद वरीयान योग | करण विष्टि 06:46 AM तक, बाद बव 05:27 PM तक, बाद बालव 04:17 AM तक, बाद कौलव |
अक्टूबर 20 रविवार को राहु 04:13 PM से 05:37 PM तक है | चन्द्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा |
सूर्योदय 6:26 AM | सूर्यास्त5:37 PM | चन्द्रोदय7:46 PM | चन्द्रास्त10:41 AM | अयन दक्षिणायन | द्रिक ऋतु शरद
- विक्रम संवत - 2081, पिंगल
- शक सम्वत - 1946, क्रोधी
- पूर्णिमांत - कार्तिक
- अमांत - आश्विन
तिथि
- कृष्ण पक्ष तृतीया
- Oct 19 09:49 AM – Oct 20 06:46 AM - कृष्ण पक्ष चतुर्थी [ क्षय तिथि ]
- Oct 20 06:46 AM – Oct 21 04:17 AM - कृष्ण पक्ष पंचमी
- Oct 21 04:17 AM – Oct 22 02:29 AM
नक्षत्र
- कृत्तिका - Oct 19 10:46 AM – Oct 20 08:31 AM
- रोहिणी - Oct 20 08:31 AM – Oct 21 06:50 AM
SHRAVAN
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने हाल ही में अपने सफल यूरोप प्रवास के बाद यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में महत्वपूर्ण व्यक्तियों से मुलाकात की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध संगठन "फ्यूचर ऑफ लाइफ" के निदेशक बेन कमिंग और संस्था के समन्वयक विलियम जोन्स से वार्ता की, जिसमें भविष्य में सहयोग और महत्त्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य करने के अवसरों पर चर्चा की गई।
फ्यूचर ऑफ लाइफ संस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में हो रहे कार्यों के नियंत्रण और मानवता के कल्याण के लिए इस तकनीक के उचित नियोजन के प्रति समर्पित है। यह संगठन एआई के नैतिक उपयोग, इसके दुष्प्रभावों पर नियंत्रण और इसके मानवीय हितों में उपयोग के लिए विश्वभर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इस वार्ता के दौरान डॉ. पंड्या ने एआई के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकासों और इनका मानवता के कल्याण के लिए नियोजन करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारतीय परंपराओं और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की शिक्षा के आधार पर इस तकनीकी क्रांति का सकारात्मक दिशा में उपयोग किया जा सकता है।
यह वार्ता भविष्य में एआई और मानवता के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से की गई एक महत्त्वपूर्ण पहल थी। डॉ. पंड्या का यह दौरा इस दिशा में वैश्विक सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने का संकेत है, जिससे मानवता के कल्याण के लिए एआई जैसी शक्तियों का उपयोग नियंत्रित और नैतिक तरीक़े से किया जा सके।
आदर्श जीवन का रहस्य | Adarsh Jeevan Ka Rahasya
दहेज से लाखों घर बर्बाद हो गए | Dahej Se Lakhon Ghar Barbad Ho Gaye
जिसकी समस्त वासनाएँ ज्ञान की अग्रि में जलकर भस्म हो गई हों, जो कार्य करते हुए कभी उत्तेजित न हो तथा जिस कार्य को भी हाथ में ले उसे दिव्यता के शिखर पर ले जाए—श्री भगवान् के अनुसार वह पंडित है, ज्ञानी है, बुद्धिमान है।
जब संकल्प व्यष्टि से हटकर समष्टि से जुड़ जाते हैं, तो कामनारहित हो जाते हैं। ऐसा व्यक्ति सही अर्थों में साधक बन जाता है। मात्र वह ज्ञानी ही नहीं होता, अंदर- बाहर से पवित्रता से घनीभूत हो वह ईश्वर का सच्चापुत्र भी बन जाता है। ऐसे दिव्यकर्मी के विषय में, स्वयं प्रभु श्रीकृष्ण बीसवें श्लोक में कहते हैं—
‘‘ऐसा व्यक्ति सब प्रकार की कर्मफल आसक्ति छोड़कर सदैव प्रभु में तृप्त रहता है, प्रभु के अतिरिक्त किसी अन्य पर आश्रित न होकर वह सब प्रकार के कर्मों को करता हुआ भी वस्तुतः कुछ भी नहीं करता’’ (कर्म में अकर्म)। (कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित्करोति सः) ४/२०।
एक दिव्यकर्मी के विषय में भगवान् कह रहे हैं कि वह अपनी स्वाध्यायजनित समझ- बूझ के माध्यम से हर क्षण प्रभु में ही लीन होकर कार्य करता है। वह जो भी कार्य करता है, चूँकि उसकी उसके फल के प्रति आसक्ति नहीं है, वह करता हुआ भी उसे न करने वाला बन जाता है।
संत वस्तुतः ऐसे ही व्यक्तियों को कहा जाता है। इन्हें दुनिया में दुःखी दिखाई देते हैं। वे दुःखों के निवारण का प्रयास करते हैं। दूसरी ओर दुःखी भी वे ही होते हैं, जिनकी कामनाएँ अतृप्त होती हैं। उन्हें भोग- विलास में ही सब कुछ नजर आता है। हमारे पास यह सब साधन होते तो कितना अच्छा होता! यही सब सोच- सोचकर वे दुःखी होकर विकर्म कर बैठते हैं और फिर पाप के भागी बनते हैं।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति मार्च 1942
सभी माताओं-बहनों को भारतीय संस्कृति, परम्परा एवं अखंड सौभाग्य के पावन पर्व करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें।
करवा चौथ का व्रत रिश्तों में विश्वास, समर्पण और अटूट प्रेम की निशानी है।
ईश्वर से यही प्रार्थना है कि सभी के जीवन में प्रेम, शांति एवं सद्भाव बना रहे।
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 20 October 2024 !!
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!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
आप अपनी पात्रता साबित करे। Aap Apni Patrata Sabit Karen
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आपको देवानुग्रह की आशा तो करनी चाहिए, गुरुजी के आशीर्वाद की आशा तो करनी चाहिए, गायत्री माता की कृपा की आशा तो करनी चाहिये लेकिन उस आशा के साथ-साथ में एक जो शर्त जुड़ी हुई है, उसको भूल नहीं जाना चाहिए और शर्त ये है कि आप अगर अपनी पात्रता साबित करेंगे, तो देवता आपकी जरूर सहायता करेंगे और देवता अगर आपकी अगर आप अपनी पात्रता साबित नहीं कर सकते, तो फिर ये विश्वास रखिये आपको निराश ही होना पड़ेगा। देवता बड़े होशियार हैं। मन्त्र बहुत होशियार है इससे पहले कि आप कर्मकाण्ड करें, उससे पहले वो कर्मकाण्डों को देख कर के प्रसन्न थोड़ी होते है कर्मकाण्डों के पीछे छिपी हुई साधक की भावनाओं को देखते हैं और अगर भावना उसकी सही है तो निश्चित रूप से वही फल देते हैं, जैसे कि आपने सुना है लेकिन अगर आपने भावना को ध्यान नहीं रखा है, केवल क्रिया करने की चिन्ह पूजा को कर लिया है, तो उस बहुत सस्ती सी क्रिया के बदले में आपको वो लम्बी-चौड़ी आशायें नहीं करनी चाहिए, जो देवताओं की सहायता से मिलती थी या मिल सकती है।
अखण्ड-ज्योति से
यदि हम अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठता के ढांचे में ढालने के लिए सचमुच उत्सुक एवं उद्यत है तो अपने दैनिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट विचारधाराओं को मस्तिष्क में बैठाने का एक नियमित विभाग बना ही लेना चाहिए। मन लगे चाहे न लगे, फुर्सत मिले चाहे न मिले, इसके लिए बलपूर्वक, हठपूर्वक समय निकालना चाहिए।
नित्य नियमित ईश्वर उपासना के बारे में हम सदा से कहते रहे हैं। चरित्र निर्माण की आधारशिला ही आस्तिकता है। ईश्वर विश्वास छोड देने से मनुष्य अंकुश रहित उन्मत्त हाथी की तरह आचरण करता है, अपने लिए तथा दूसरों के लिए विपत्ति का कारण बनता है।इसलिए हममें से हर एक को किसी न किसी रूप में ईश्वर उपासना नित्य ही करनी चाहिए।
प्रत्येक पाठक को व युग निर्माण के प्रत्येक सदस्य को
1- अपने दैनिक जीवन में उपासना को स्थान देना चाहिए।
2- स्वाध्याय के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित करना चाहिए।
3- नित्य युग निर्माण सत्संकल पढना चाहिए।
4- सोते समय आत्मनिरिक्षण का कार्यक्रम नियमित रूप से चलाना चाहिए।
5- दिन में समय समय पर कुविचारो से लड़ते रहने की तैयारी करनी चाहिए।
ये पांच कार्यक्रम आत्मनिर्माण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। युग निर्माण अपने आप से ही आरंभ करना है, इसलिए ये पांच कार्य जितनी जल्दी आरंभ किए जा सके उतना उत्तम है।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अप्रैल 1963 पृष्ठ 24-25
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