Sunday 26, January 2025
आरम्भ में चन्द्रमा बहुत सुन्दर था। हर घड़ी हँसता रहता। चेहरा खिले कमल जैसा सुन्दर लगता। कुछ दिन बाद वह उदास रहने और खीजने लगा। अतएव कलाएँ घटने लगीं। चेहरा मुरझाने और सिकुड़ने तथा क्षीण होने लगा। दिन बीतते गए। अमावस्या आते-आते वह काला कुरूप हो गया। कलाएँ समाप्त हो गई और अँधेरी कोठरी में दिन काटने लगा। ब्रह्मा जी इस दुर्दशा को देखकर बोले मूर्ख! हँसना, मुस्कराना फिर आरम्भ कर। उसके बिना किसी की जिन्दगी पार नहीं होती। खीजने से तो बेमौत मरेगा। चंद्रमा ने अपनी भूल सुधारी, उसने प्रसन्नता बिखेरना आरम्भ किया और बढ़ते-बढ़ते फिर पूर्णिमा को खिले कमल जैसा हो गया।
*।। आप सभी को 76वां गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।।*
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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 26 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष 26 January 2025 गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! अखण्ड दीपक Akhand Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) एवं चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 January 2025 !!
!! गायत्री माता मंदिर Gayatri Mata Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 January 2025 !!
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 January 2025 !!
!! महाकाल महादेव मंदिर #Mahadev_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 January 2025 !!
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर Prageshwar Mahadev 26 January 2025 !!
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 January 2025 !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
चार वेदों में सब कुछ था, लेकिन पुराणों के माध्यम से उदाहरणों के बिना, दृष्टांतों के बिना, कथानकों के बिना सारी की सारी शैली को समझाएं बिना लोगों को सामान्य जनता को, जो बुद्धिजीवी नहीं है, समझदार नहीं है, जो विवेकशील नहीं है, उनको हम व्याख्यानों से नहीं समझा पाएंगे। उनको हम उदाहरणों से, दृष्टांतों से, कथानकों से, कहानियों से समझाना पड़ेगा। आपको महिलाओं का शिक्षण करना पड़ेगा कहानियों के माध्यम से, आपको पुरुषों का शिक्षण करना पड़ेगा कहानियों के माध्यम से, और आपको बच्चों का शिक्षण करना पड़ेगा कहानियों के माध्यम से। हम बच्चों को शिक्षण करने की शैली, किसानों को शिक्षण करने की शैली, बूढ़ों को शिक्षण करने की शैली, महिलाओं को शिक्षण करने की शैली के लिए जो कुछ भी हम आपको बताएंगे और सिखाएंगे, वह सब कहानियों के कथानकों के माध्यम से सुनाएंगे।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
अखण्ड-ज्योति का कलेवर छपे कागजों के छोटे पैकेट जैसा लग सकता है, पर वास्तविकता यह है कि उसके पृष्ठों पर किसी की प्राण चेतना लहराती है और पढ़ने वालों को अपने आँचल में समेटती है, कहीं-से-कहीं पहुँचाती है। बात लेखन तक नहीं सीमित हो जाती, उसका मार्गदर्शन और अनुग्रह अवतरण किसी ऊपर की कक्षा से होता है। इसका अधिक विवरण जानना हो, तो एक शब्द में इतना ही कहा जा सकता है कि
यह हिमालय के देवात्मा क्षेत्र में निवास करने वाले ऋषि चेतना का समन्वित अथवा उसके किसी प्रतिनिधि का सूत्र संचालन है, अन्यथा साधना विहीन एकाकी, व्यवहार कुशलता की दृष्टि से पिछड़ा हुआ व्यक्ति बड़े सपने तो देख सकता है; पर बड़े कामों का भार अपने दुर्बल कंधों पर नहीं उठा सकता। विशेषतया उन कामों का जिनकी कल्पनाएँ करते रहने वाले, योजनाएँ बनाते रहने वाले थोड़े बहुत कदम बढ़ाते रहने पर भी हवा में उड़ने वाले गुब्बारों की तरह कुछ ही समय में ठण्डे होते और अपने अस्तित्व को समाप्त करते देखे गये।
सोचा जाता है कि गुरुजी 80 वर्ष का आयुष्य पूरा करना चाहते है। इस दृष्टि से माताजी भी उतनी आयु का लाभ ले सकेंगी, जितनी कि गुरुदेव। इस महाप्रयाण का समय अब बहुत दूर नहीं है। हाथ के नीचे वाले वाले अनिवार्य कामों को जल्दी-जल्दी निपटाने की बात बनते ही चार्ज दूसरों के हाथों चला जायगा। सन्देह है कि उस दशा में वर्तमान प्रगति रुक सकती है और व्यवस्था बिगड़ सकती है। ऐसे लोग व्यवस्था में आने वाले उतार–चढ़ावों के आधार पर अनुमान लगाते है। उनमें ही प्रतिभावान व्यक्तियों के हट जाने पर भट्ठा बैठ जाता है और सरंजाम बिखर जाता है; पर यहाँ वैसी कोई बात नहीं। न व्यक्ति विशेष ने कुछ असाधारण किया है, और न ही उसे भूतकाल पर गर्व है। न वर्तमान को देखते हुए उत्साह और न भविष्य की गिरावट सम्बन्धी कोई आशंका। कारण स्पष्ट है।
कठपुतली न अपने अभिनय पर गर्व करती है, और न पिटारी में बन्द कर दिये जाने की शिकायत। यदि वह समझ होती, तो निश्चित ही उसकी सोच यही होती कि वह बाजीगर की उँगलियों में बँधे हुए धागों से हलचल करने वाली लकड़ी की टुकड़ी मात्र है। उसे गर्व किस बात का होना चाहिए और अपने भविष्य की चिन्ता क्यों करनी चाहिए? यह काम बाजीगर का है। वही कोई गड़बड़ी होते देखेगा और तत्परतापूर्वक सुधारेगा। आखिर लाभ-हानि तो उसी का है। लकड़ी के टुकड़े तो निर्जीव एवं निमित्त मात्र है। मिशन के भविष्य के सम्बन्ध में भी हर किसी को इसी प्रकार सोचना चाहिए और निराशा जैसे अशुभ चिन्तन को पास भी नहीं फटकने देना चाहिए।
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति जनवरी पृष्ठ 29
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