Monday 27, January 2025
आज्ञा चक्र का ध्यान | Aagya Chakra Ka Dhyan |
आओ जाने युग ऋषि को | Aao Jane Yug Rishi Ko
मन को शांत करने के लिये प्रार्थना, शान्ति कीजिए, शान्ति कीजिए | Man Ko Shant Karne Ki Prarthna
अमृतवाणी:- मेरा जीवन अखण्ड दीपक | Mera Jeevan Akhand Deepak |
दान देने की महत्व | Dan Dene Ka Mehtav
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 27 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
फ्रांस का इतिहास आपको मालूम होना चाहिए। जर्मनी ने, जर्मनी ने जब हमला किया था, तो फ्रांस, फ्रांस जो विलासी था, जिसने मुद्दतों से अय्याशी और मक्कारी की थी, जिसमें कि स्वार्थपरता, स्वार्थपरता से लेकर के व्यक्तित्व संवर्धन की बात उनके दिलो-दिमाग में ऐसी हावी हो गई थी, जो कामवासना से लेकर के शराबी और अय्याशी और दूसरी चीजों पर ही अपने आप को महत्वपूर्ण बनाए हुए थे। जर्मनी की समस्त जनता ने उस पर हमला कर दिया था, तो एक सप्ताह के भीतर फ्रांसीसी अपना देश छोड़कर के भाग गए और न जाने कहां को भाग गए, खाली कर गए। उन्होंने एक इंच के लिए लड़ाई नहीं लड़ी। जबकि रूसिया में, जर्मनी ने हमला किया, जर्मनी ने हमला किया, सेकंड वर्ल्ड वार की बात मैं बताता हूं। लेबनान के ऊपर, एक-एक इंच के ऊपर ऐसी जद्दोजहद हुई, एक-एक इंच जमीन के लिए लाखों आदमी मारे गए और खून की नदियां बह गई और जनरलों के डाँट सहते हुए, उनको यह मालूम पड़ा, रूसिया को जीत लेना सुगम नहीं है।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
जहाँ तक हम दोनों की भावी नियति के बारे में भविष्य बोध कराया गया है, वह सन्तोषजनक और उत्साहवर्धक है। कहा गया है कि पिछले पचास वर्ष से हम दोनों “दो शरीर-एक प्राण” बनकर नहीं, वरन एक ही सिक्के के दो पहलू बनकर रहे है। शरीरों का अन्त तो सभी का होता है; पर हम लोग वर्तमान वस्त्रों को उतार देने के उपरान्त भी अपनी सत्ता में यथावत बने रहेंगे और जो कार्य सौंपा गया है, से तब तक पूरा करने में लगे रहेंगे, जब तक कि लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाती। युग परिवर्तन एक लक्ष्य है जनमानस की परिष्कार और सत्प्रवृत्ति सम्वर्धन उसके दो कार्यक्रम।
अगली शताब्दी इक्कीसवीं सदी अपने गर्भ में उन महती सम्भावनाओं को संजोये हुए है, जिनके आधार पर मानवी गरिमा को पुनर्जीवित करने की बात सोची जा सकती है। दूसरे शब्दों में इसे वर्तमान विभीषिकाओं का आत्यंतिक समापन कर देने वाला सार्वभौम कायाकल्प भी कह सकते है। इस प्रयोजन के लिए हम दोनों की साधना स्वयंभू मनु और शतरूपा जैसी वशिष्ठ-अरुन्धती स्तर की .... जिसका इन दिनों शुभारम्भ किया गया हैं पौधा लगाने के बाद माली अपने उद्यान को छोड़कर भाग नहीं जाता। फिर हमीं क्यों यात्रा छोड़कर पलायन करने की बात सोचेंगे और क्यों उस के लिए उत्सुकता प्रदर्शित करेंगे?
इस बीच छोटे से व्यवधान की आशंका रहती है, जो यथार्थ भी है। प्रकृति के नियम नहीं बदले जा सकते। पदार्थों का उद्भव, अभिवर्धन और परिवर्तन होते रहना एक शाश्वत क्रम है। इस नियति चक्र से हम लोगों के शरीर भी नहीं बच सकते। बदन बदलने के समय में अब बहुत देर नहीं है। पर वस्तुतः यह कोई बड़ी घटना नहीं है। अविनाशी चेतना के रूप में आत्मा सदा अजर-अमर है।
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति 1988 जनवरी पृष्ठ 29
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