Saturday 27, September 2025
Maa Skandmata
नवरात्री स्पेशल आदर्श कुमार प्रज्ञा गीत भजन संध्या Navratri Special Bhajan Sandhya | Rishi Chintan
अमृत सन्देश:- हमारी उपासनाएँ कैसी होनी चाहिए ? | Hamari Upasana Kaisi Honi Chahiy
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 27 September 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
अखण्ड-ज्योति से
सूर्य के उदय और अस्त होते समय आकाश में लालिमा छाई रहती है और उस अवधि के समाप्त होते ही वह दृश्य भी तिरोहित होते दिखता है। इसे काल प्रवाह का उत्पादन कह सकते हैं। ज्वारभाटे हर रोज नहीं अमावस्या, पूर्णमासी को ही आते हैं उमंगों के संबंध में भी ऐसी ही बात है कि वे मनुष्य की स्वउपार्जित ही नहीं होती वरन् कभी-कभी उनके पीछे किसी अविज्ञात उभार का ऐसा दौर काम करता पाया गया है कि चिंतन ही नहीं कर्म भी किसी ऐसी दशा में बहने, बढ़ने लगता है जिसकी इसके पूर्व वैसी आशा या तैयारी जैसी कोई बात नहीं थी।
ऐसे अप्रत्याशित अवसर तो यदा-कदा ही आते हैं पर नवरात्रि के दिनों अनायास ही अंतराल में ऐसी हलचलें उठती हैं जिनका अनुसरण करने पर आत्मिक प्रगति की व्यवस्था बनने में ही नहीं, सफलता मिलने में भी ऐसा कुछ बन पड़ता है मानो अदृश्य से अप्रत्याशित अनुदान बरसा हो।
ऐसे ही अनेक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तत्वदर्शी, ऋषियों, मनीषियों ने नवरात्रि में साधना का अधिक महात्म्य बताया है और इस बात पर जोर दिया है कि अन्य अवसर पर न बन पड़े सही पर नवरात्रि में आध्यात्मिक तप साधना का सुयोग बिठाने का प्रयत्न तो करना ही चाहिए। तंत्र विज्ञान के अधिकाँश कौलकर्म उन्हीं दिनों सम्पन्न होते हैं। वाममार्गी साधक अभीष्ट मंत्र सिद्ध करने के लिए इस अवसर की प्रतीक्षा करते रहते हैं।
नवरात्रि देव पर्व है। उसमें देवत्व की प्रेरणा और दैवी अनुकम्पा बरसती है। जो उस अवसर पर सतर्कता बरतते हैं और प्रयत्नरत होते हैं, वे अन्य अवसरों की अपेक्षा इस शुभ मुहूर्तों का लाभ ही अधिक उठाते हैं। भौतिक लाभों को सिद्धियों के नाम से जाना जाता है। संकटों के निवारण और प्रगति के अनुकूलन में सिद्धियों की आवश्यकता पड़ती है। उस आधार पर जो मिलता है उसे वरदान कहा जाता है। नवरात्रियाँ वरदानों की अधिष्ठात्री कही जाती है, पर इस शुभावसर का वास्तविक लाभ है-देवत्व की विभूतियों का जीवनचर्या में समावेश । वह जिसे जितनी मात्रा में मिलता है वह उतना ही कला क्षमता का नरदेव कहलाता है।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1996
| Newer Post | Home | Older Post |
