Wednesday 29, January 2025
Lok Seviyon Ko Kaisa Hona Chahiye | लोक सेवियों को कैसा होना चाहिये
भाईचारे और रिश्तों की शिक्षा | Bhaichare Aur Rishto Ki Siksha
गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ सरल कर्मकांड विधि | Grihe- Grihe Gayatri Yagya Saral Karmkand Vidhi
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 29 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
मित्रों, यह हमको तलाश करना पड़ेगा अवश्य कि धार्मिक वृत्ति वाले लोग कहां हैं, और धार्मिक जीवन कहां है, और धार्मिक विचारधारा कहां है। उनको हम दोबारा शिक्षण करेंगे, आपको भी हम दोबारा शिक्षण करेंगे, और हम नवीन योजना बनाएंगे। दो-दो, चार-चार, छः-छः महीने के लिए आपको बुलाएंगे, शिक्षण करेंगे। यह तो आपका प्राथमिक प्रैक्टिस है, यह अभी तो पीएम किया है, आप मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के लायक कौन-कौन लोग हो गए, और बर्खास्त करने लायक कौन-कौन लोग हो गए, यह हम देखेंगे। उसको हम फिर शिक्षण करेंगे। आपको ज्यादा दिन का शिक्षण करेंगे। हमने छापा था, हम 6 महीने के लिए शिक्षण करेंगे, हम जरूर करेंगे। 6 महीने के लिए इकट्ठा नहीं करेंगे तो दो-दो महीने के लिए, तीन बार में करेंगे, और तीन-तीन महीने के लिए दो बार में करेंगे। जैसे- जैसे भी हम समझेंगे, आपको सुयोग्य बनाने के लिए और जनता का इतना बड़ा काम करने के लिए, मेडिकल कॉलेज का शिक्षण करने के लिए 5 साल की जरूरत पड़ती है, और इंजीनियरिंग कॉलेज का शिक्षण करने के लिए 5 साल की जरूरत पड़ती है। और आपको जनता की बौद्धिक, भावनात्मक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक सारी की सारी समस्याओं के समाधान करने की जिम्मेदारी हम साथ निभा रहे हैं। क्या आप समझते हैं, एक महीने के भीतर सारे का सारा शिक्षण हो जाएगा? बिल्कुल गलत बात है, अब नहीं हो सकता। यह तो आपकी प्राथमिक नारी परीक्षा है, नारी परीक्षाओं में जो उत्तीर्ण हो जाएंगे, हम फिर सिखाएंगे, आपको। जब तक हम जिंदा हैं, तब तक सिखाएंगे, तो आपके आप एक सुयोग्य लोकसेवी और सुयोग्य धर्म प्रचारक और सुयोग्य अध्यात्मवेत्ता और सुयोग्य अध्यात्म के और भगवान के उपासक तब मैं समझ करके शिक्षण का क्रम आगे बढ़ाएंगे।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
बड़े कार्यों के लिए बड़ी तैयारी करनी पड़ती है और बड़े साधन जुटाने पड़ते हैं। विवाहों में अपव्यय की कुरीति काफी व्यापक है, उसकी जड़ें काफी गहराई तक घुसी हुई हैं। उन्हें उखाड़ने में काफी खोद-बीन और उखाड़-पछाड़ करनी पड़ेगी। लोग आसानी से उस पुरानी रूढ़ि को छोड़ने का साहस न कर सकेंगे। औचित्य को स्वीकार करते हुए भी सामाजिक दबाव, घर वालों और रिश्तेदारों का विरोध, कंजूस या मूर्ख कहलाने का उपहास आदि अनेकों बाधाएं सामने रहेंगी। फिर उपयुक्त लड़की लड़के खोज निकालना और उनके अभिभावकों का वैसा ही विवेकशील एवं साहसी होना भी तो सरल कार्य नहीं है। इन अड़चनों को पार करने के लिए बहुमुखी योजना बनानी पड़ेगी और उसकी पूरी तैयारी करनी पड़ेगी। उथले कार्यक्रमों से काम न चलेगा।
सामाजिक क्रान्ति की दिशा में यह एक अत्यन्त ही व्यापक एवं महत्वपूर्ण कदम है। यह मोर्चा फतह हो गया तो अन्य रूढ़ियों का शमन-शोधन सर्वथा सरल हो जायगा। जिस कुरीति से सारा समाज दुखी है और जिसका नाश हर विचारशील व्यक्ति चाहता है उसके लिए आवश्यक वातावरण तो तैयार है पर उखाड़ फेंकने की क्रिया फिर भी काफी कष्ट-साध्य रहेगी। इस कठिन कार्य को करने के लिए उन व्यक्तियों की आवश्यकता है जिनमें शौर्य, साहस, तप, त्याग, लगन और उत्साह की समुचित मात्रा विद्यमान हो। ऐसे लोग आज कमजोर जरूर हैं पर उनका सर्वथा अभाव नहीं है। उपयुक्त सैनिकों की ही इस मोर्चे पर अड़ने के लिये सबसे प्रथम आवश्यकता पड़ेगी। प्रयत्न यह करना होगा कि जिनमें साहस हो वे मानवता की इस पुकार की पूर्ति करने के लिये बढ़ कर आगे आवें। हिन्दू-समाज पर लगे हुए इस भारी कलंक को अपने रक्त से धोने की हिम्मत कर सकें।
प्रगतिशील जातीय सभाओं का संगठन इन्हीं उत्साही और साहसी, प्रतिभाशाली, लोक-सेवकों के कंधों पर खड़ा किया जा सकेगा। नाम के भूखे, आलसी बातूनी और लम्बे-चौड़े सपने देखने वाले ऐसे अनेक व्यक्ति पाये जाते हैं जो घर बैठे ही तीनों लोकों के सुधारने की कल्पना करते और मन-मोदक खाते रहते हैं। ऐसे लोगों की सद्भावना एवं समर्थन मिले तो उसका भी कुछ उपयोग ही है पर उनसे वह प्रयोजन पूरा नहीं हो सकता जो समाज की गति-विधियों को लौट पलट कर डालने जैसे महान कार्य को सम्पन्न करने के लिये आवश्यक हैं।
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति मार्च1964 पृष्ठ 50-51
| Newer Post | Home | Older Post |
