Monday 29, September 2025
साधना के बारह तप | Sadhna Ke Barah Tap | Dr Chinmay Pandya
क्या माँ गायत्री वास्तव में हमें प्राणवान बना सकती हैं? डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी
लंदन में डॉ. चिन्मय पंड्या जी का प्रेरक उद्बोधन | शताब्दी वर्ष की तैयारियाँ एवं दीक्षा समारोह
असंतुलन असफलता का मूल कारण है | Asantulan Asafalta ka Mool Karan Hai
Maa Kalratri
अमृत सन्देश:- जो तुम करोगे वही लौटेगा | Jo Tum Karoge Wahi Lautega
है यह बात सखे, स्थिर हम-तुम सबके मन में | Hai Yah Baat Shakhe | Mata Bhagwati Devi Bhajan
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 29 September 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी: गाँव-गाँव में प्रौढ़ शिक्षा का अभियान पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
10 सूत्रीय कार्यक्रम हमारे हैं। कौन-कौन से हैं आपके 10 सूत्रीय कार्यक्रम?
एक हमारा है — शिक्षा का विस्तार।
शिक्षा के विस्तार का काम अमूमन गवर्नमेंट के जिम्मे समझा जाता है, पर गवर्नमेंट पूरा कर नहीं पाएगी। इसको कैसे? कैसे नहीं कर पाएगी?
उनके यहाँ स्कूल खुलते हैं, कॉलेज खुलते हैं, सब खुलते हैं, पर जितने खुलते हैं, उससे जनसंख्या ज्यादा हो जाती है।
पहले जितने निरक्षर थे, अगले साल उतने नए स्कूल खुले, उतने नए अध्यापक रखे गए, तो ज्यादा बढ़ने चाहिए।
ज्यादा नहीं बढ़ते, बल्कि वह जो है, शिक्षा और कम हो जाती है क्योंकि नए आदमी पैदा हो जाते हैं।
इसीलिए हमने यह निश्चय किया है कि गाँव-गाँव में हम प्रौढ़ शिक्षा का प्रचार करेंगे।
गाँव-गाँव के लोगों से यह प्रतिज्ञा यज्ञ पर कराएंगे कि हम समय देंगे और समयदान देकर के बाकी गाँव के लोगों को पढ़ाने का प्रयत्न करेंगे।
प्रौढ़ शिक्षा की हमने जिम्मेदारी ली है।
बाल संस्कार शाला की हमने जिम्मेदारी ली है।
महिला शिक्षा की हमने जिम्मेदारी ली है।
बाल संस्कार शाला क्या है?
बाल संस्कार शाला एक और हमारा कार्यक्रम है।
वह कार्यक्रम यह है कि बच्चे जो स्कूलों में जाया करते हैं, उनकी पढ़ाई में कमी रह जाती है।
उस पढ़ाई को पूरा कराएं, इस तरीके से कि जैसे ट्यूशन देकर बच्चे पढ़ते हैं, उसी तरीके से हम लोगों को पढ़ाएं — बिना मूल्य, बिना कुछ लिए।
और साथ-साथ में उनको नैतिक शिक्षाएँ, सामाजिक शिक्षाएँ, शिष्टाचार, नागरिकता वगैरह-वगैरह सिखाते चलें।
तो ये बच्चों का भी शिक्षण का क्रम चलता है, मर्दों का भी शिक्षण चलता है, बिना पढ़ों का भी शिक्षण चलता है, शिक्षितों का भी शिक्षण चलता है।
जहाँ कहीं भी हम जाते हैं, वहाँ कोई न कोई शिक्षा योजना हम ज़रूर बनाते हैं।
हमारे जीवन के साथ में शिक्षा जुड़ी हुई है।
हम यह समझते हैं — गरीबी दूर करना देश के लिए आवश्यक भले ही हो, लेकिन जब तक साक्षरता का विस्तार न होगा, तब तक गरीबी दूर नहीं हो सकती।
क्योंकि आदमी की समझ में बात नहीं आएगी।
कुछ बात करेगा नहीं, समझेगा नहीं, जानेगा नहीं, बूझेगा नहीं, हाट की बात नहीं सुनेगा, सहकारिता समिति की बात नहीं सुनेगा, परिवार नियोजन उसकी समझ में नहीं आएगा।
तो फिर किस तरीके से गरीबी दूर करेगा?
इसीलिए गरीबी दूर करना जहाँ आवश्यक है, यह गवर्नमेंट का काम है।
गरीबी दूर करें — आप कर सकते हैं, हम कैसे करेंगे? बताइए।
खेती हम नहीं कर सकते, कुछ और हम नहीं करा सकते, नहरें हम नहीं बना सकते।
लेकिन हम लोगों में शिक्षा का विस्तार कर सकते हैं।
पहला कार्यक्रम हमारा — शिक्षा का है।
अखण्ड-ज्योति से
मशीनों के संबंध में भी यही बात है। उनकी क्षमता एवं गतिशीलता उनकी संधियों के सही गलत होने पर ही निर्भर रहती है। इन दिनों युगसंधि चल रही है और अपना शाँतिकुँज पच्चीसवें वर्ष के पूरा करने पर रजत जयंती वर्ष मना रहा है। अतएव जाग्रत आत्माओं को आपत्तिकालीन व्यवस्था की तरह युग धर्म के निर्वाह में जुटना पड़ रहा है। ऋतु संध्या आश्विन और चैत्र में जिन दिनों आती है। उन नौ-नौ दिनों की अवधि को नवरात्रि कहते हैं।
ऋतुओं में ऋतुमती होने और वातावरण में नये-नये अनुदान भर देने का दृश्य सूक्ष्म जगत में इन्हीं दिनों दृष्टिगोचर होता है। ऐसे-ऐसे अनेकों कारण हैं जिनके कारण अध्यात्म क्षेत्र में साधना प्रयोजनों के लिए यह समय विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है। जिस प्रकार प्रभात काल की उपासना अधिक फलवती होती है और संध्या के नाम से पुकारी जाती है। उसी प्रकार नवरात्रियों का समय भी दोनों संध्याओं के समतुल्य माना गया है।
नवरात्रियों की नौ दिवसीय साधना, चौबीस हजार जप का लघु अनुष्ठान के साथ सम्पन्न करनी चाहिए। यदि जप प्रातः पूरा नहीं हो सकता है तो सायंकाल उसे पूरा कर लेना चाहिए। उपासना क्षेत्र में नर-नारी को एक समान अधिकार है। ईश्वर के लिए पुत्र-पुत्री दोनों समान हैं।
.........क्रमश: जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1996
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