Tuesday 30, September 2025
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Maa Mahagauri
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 30 September 2025 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
नंबर दो कार्यक्रम आपका क्या है? दूसरा कार्यक्रम हमारा वृक्षारोपण है। वृक्षारोपण — देश में वृक्ष कम हो गए हैं, लेकिन वृक्षों के लिए अभी जगह इतनी है कि जिसको लगाएं जाएं। खेत की मेड़ के ऊपर यूकेलिप्टिस के पेड़ लगाए जा सकते हैं, जो कागज में काम आ सकते हैं, बिक्री हो सकती हैं, जलावन के भी काम आ सकते हैं और बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं, बहुत जल्दी काम आ जा सकते हैं।
इसके लिए साहब, आप पीपल का पेड़ लगाने में और आम का पेड़ लगाने में कहेंगे — "जगह घिरेगी, हमारी खेती नुकसान हो जाएगी, तो हम कैसे पेड़ लगाएंगे?" — नहीं लगाएंगे।
तो इस तरह के पेड़, जो कि जलावन के काम आ सकते हैं या किसी और काम आ सकते हैं, उस तरह के पेड़ लगवाना हमारा काम है।
घर में साग वाटिकाएं — साग आजकल कितने महंगे हैं। कुपोषण की वजह से साग ना मिलना है। तो उसके लिए गांव-गांव में, घर-घर जाकर के हम लोगों के यहां पौध बिना कीमत के वितरण करते हैं और ये कहते हैं — "आप साग वाटिका लगाइए। डिब्बे में रख लीजिए, टोकरी में बना लीजिए, गमले में बना लीजिए। आपके आंगन में जगह है तो वहां बना लीजिए, छप्पर पे बेलें चढ़ा दीजिए, छत पे रख लीजिए।"
ये हमारा वृक्षारोपण वाला दूसरा कार्यक्रम है।
हमारे तीसरे कार्यक्रम में जो है, वो ये है कि व्यायामशालाओं की स्थापना करना।
व्यायामशालाएं — स्वास्थ्य संरक्षण के लिए गवर्नमेंट भी करती है, पर वो गवर्नमेंट की स्वास्थ्य शिक्षा ऐसी है जो एनसीसी है, कॉलेजों में सिखाई जाती है, अमुक को सिखाई जाती है और ओलंपिक खेल होते हैं, वहां बड़े-बड़े स्टेडियम बने हुए हैं।
लेकिन गांव में कहां है बेचारों के लिए? गांव में कहां? गांव की व्यायामशालाएं स्थापित करना हमारा काम है, जिससे कि शरीर बल बढ़े और मनोबल भी बढ़े।
मनोबल भी बढ़ेगा, उसका शरीर बल भी बढ़ेगा। गुंडे और बदमाश इसलिए ज्यादा हावी होते हैं कि उनको ये मालूम पड़ता है — "कमजोर आदमी है, बहादुर आदमी नहीं है।"
बहादुरी सिखाना वास्तव में हमारा उद्देश्य है। बहादुरी सिखाने के लिए लोगों को व्यायाम करना सिखाना है, लाठी चलाना सिखाना है।
लाठी का क्या होगा? अब तो बंदूकें चलती हैं! अरे, मारने को थोड़ी सिखाते हैं बाबा। कोई गांव का कुत्ता आ जाए, पागल कुत्ता आ जाए, कोई और झगड़ा-टंटा हो जाए, चोर है, कोई और बात है — तो अपनी लाठी से धमका तो सकते हैं।
इसीलिए व्यायामशालाएं — स्वास्थ्य का संरक्षण।
स्वास्थ्य में क्या-क्या खराबी हो जाती है? शरीर का विज्ञान क्या है? किस तरह का है? फ़र्स्ट एड क्या होती है? रोगियों का, बीमारों का परिचर्या कैसे की जाती है? और सफाई कैसे रखी जाती है? — ये सब बातें उसी में, हमारे स्वास्थ्य कार्यक्रम में शुमार हो जाती हैं।
तो स्वास्थ्य कार्यक्रम को हम तीसरा वाला काम मानते हैं।
अखण्ड-ज्योति से
अनुष्ठान काल में जप तो पूरा करना ही पड़ता है, कुछ विशेष तपश्चर्याएँ भी इन दिनों करनी पड़ती हैं, जो इस प्रकार हैं-
नौ दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य से रहा जाय। यदि स्वप्नदोष हो जाये तो दस माला प्रायश्चित की अधिक की जाएँ।
नौ दिन उपवास रखा जाय। उपवास कई स्तर का हो सकता है- फल-दूध पर, शाकाहार, खिचड़ी दलिया आदि। आलू, टमाटर, लौकी आदि शाक में नमक भर डालना चाहिए। मसाला इन दिनों छोड़ दिया जाय। बिना नमक या शक्कर का साधारण भोजन भी एक प्रकार का उपवास ही है। जिनसे जैसा बन पड़े उन्हें अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार उपवास का क्रम बना लेना चाहिए। फलाहार-शाकाहार दो बार किया जा सकता है। अन्नाहार लेना हो तो एक बार ही लेना चाहिए। प्रातःकाल खाली पेट जिससे न रहा जाय, वे दूध, छाछ, नींबू पानी, शरबत कोई पतली चीज ले सकते हैं।
भूमि शयन, चारपाई का त्याग। पृथ्वी या तख्त पर सोना।
अपनी सेवाएँ स्वयं करना। हजामत, कपड़े धोना, स्नान आदि दैनिक कार्य बिना दूसरों के श्रम का उपयोग किये स्वयं ही करना चाहिए। भोजन बाजार का बना नहीं खाना चाहिए। स्वयं पकाना संभव हो तो सर्वोत्तम अन्यथा पत्नी, माता आदि का बना भोजन लेना चाहिए। घनिष्ठ परिजनों की सेवा ही ली जा सकती है।
चमड़े की बनी वस्तुओं का त्याग। चूँकि इन दिनों शत-प्रतिशत चमड़ा पशुओं की हत्या करके ही प्राप्त किया जाता है और वह पाप उन चमड़ा उपयोग करने वालों को भी लगता है। इसलिए चमड़े के जूते, पेटी, पट्टे आदि का उपयोग उन दिनों न करके रबड़, कपड़ा आदि के बने जूते-चप्पलों से काम चलाना चाहिए।
.........क्रमश: जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1996
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