Friday 31, January 2025
खाने का सही समय और आदतें | Khane Ka Sahi Samay Aur Aadate
गायत्री मंत्र की व्याख्या भाग 3 | गायत्री महाविज्ञान का संकलन और शोध
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! आज के दिव्य दर्शन 31 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आपको नहीं मालूम, ये कालेज में से निकलने वाले लड़के कैसे अहंकारी और कैसे दुष्ट हो करके निकलते हैं, आपको नहीं मालूम है, हमको मालूम है, इसलिए क्या करना पड़ेगा, आज के मां-बाप हमसे ज्यादा समझते हैं कि हमने अपने बच्चे को अय्याश बनाने के लिए और सुविधा और साधन देने के लिए इतने साधन मुहैया कर दें, तो काफी हो गया, बस बात खत्म हो गई, ज्यादा से ज्यादा किसी के उमंग और दिमाग में आया, उसे भेज दिया पढ़ाने के लिए, ट्यूशन मखोल उतार दिया, यह भी एक फैशन है आजकल, कि हर बच्चे के लिए ट्यूशन तो रहना चाहिए, ट्यूशन न होगा तो बड़ा आदमी काहे बात का और अमीर काहे बात का, और उसको बढ़िया वाला पेंट सिलवा दिया, और बढ़िया वाले कपड़े सिलवा दिए, और खाने के लिए बढ़िया चीजें दे दी, और जेब खर्च के लिए बढ़िया चीजें दे दी, बाप की जिम्मेदारी खत्म, खत्म, बस, और कुछ नहीं, और सब जिम्मेदारी खत्म हो गई, जेब खर्च के पैसे ज्यादा दे दिए, कपड़े बढ़िया वाले सिलवा दिए, उसके लिए शिक्षण के साधन इकट्ठा कर दिए, एक ट्यूशन लगवा दिया, बढ़िया वाले स्कूल में खर्च कर दिया, और कोई जिम्मेदारी रह गई, और कोई जिम्मेदारी नहीं रह गई, आज, आज की अपेक्षा लोगों के मुंह के विचार करने की शैली और सोचने के तरीके बदल देने पड़ेंगे।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
बुद्ध धर्म के शून्यवाद ने जब वैदिक परम्पराओं को ग्रस लिया था तब साँस्कृतिक दुर्दशा पर महल के झरोखे में बैठी आँसू बहाती हुई राजकुमारी की आँखों का पानी सड़क पर चलते हुए कुमारिल भट्ट के ऊपर पड़ा। उसने ऊपर आँख उठा कर देखा और कारण पूछा तो राजकुमारी ने कहा-को वेदान् उद्धरस्यसि? अर्थात् वेदों का उद्धार कौन करेगा? कुमारिल का पौरुष इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया। उसने कहा कि मैं करूंगा?
और सचमुच उस कर्मठ युवक ने वैदिक सभ्यता की रक्षा के लिए वह सब कुछ कर दिखाया जो कोई निष्ठावान व्यक्ति कर सकता है। आज विवाहों के अपव्यय ने भारतीय संस्कृति को उस घृणित एवं मरणोन्मुख परिस्थितियों में ला पटका है जिसमें कुछ दिन वह और पड़ी रही तो उसे अपनी मौत आप मर जाने के लिए ही विवश होना पड़ेगा। कुमारिल भट्ट की इस कुसमय की घड़ी में जितनी आवश्यकता है उतनी पहले कभी नहीं रही।
यज्ञों के नाम पर होने वाली पशु हिंसा के नाम पर चारों ओर व्याप्त नृशंसता का उन्मूलन करने के लिए गौतम बुद्ध की आत्मा विद्रोह कर उठी थी, उनने तप करके जो शक्ति प्राप्त की, उसे समाज की तत्कालीन प्रवृत्तियों को बदलने में लगा दिया। आज यज्ञों के नाम पर होने वाली पशु हिंसा से बढ़ कर विवाहों के नाम पर होने वाले अपव्यय की क्रूर बलिवेदी लाखों कन्याओं के रक्त स्नान से अभिषिक्त होती रहती है। इस नृशंसता का उन्मूलन करने के लिए सहस्रों युद्धों की आवश्यकता अनुभव की जा रही है पर सब ओर सन्नाटा देख कर ‘वीर विहीन मही’ होने की आशंका दिखाई पड़ने लगती है और भारतीय गौरव का मस्तक लज्जा से नीचा झुक जाता है।
युग-निर्माण के उपयुक्त अभिनव समाज रचना का महान अभियान आरम्भ करते हुए सबसे प्रथम यही आवश्यकता अनुभव की जा रही है कि प्रत्येक जाति में ऐसे तेजस्वी युवक निकलें जो संगठन की प्रारम्भिक भूमिका का ढाँचा खड़ा करने में अपना समय लगावें और साहसपूर्वक कुछ काम कर गुजरने की लगन लेकर आगे बढ़ें। इसके लिए घर छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। आजीविका कमाते हुए, बच्चों का पालन करते हुए भी कोई व्यक्ति थोड़ा समय पारमार्थिक कामों में लगाता रहे तो उतने में भी सामाजिक क्रान्ति का उद्देश्य बहुत हद तक पूरा हो सकता है। पूरा समय दे सकने वाले प्रतिभाशाली लोग वानप्रस्थों की तरह देश धर्म, समाज और संस्कृति की सेवा के लिए मिल सकें तब तो कहना ही क्या है?
.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति मार्च1964 पृष्ठ 51-52
| Newer Post | Home | Older Post |
