माताजी का जीवन स्नेह, ममता और त्याग की साकार प्रतिमूर्ति : शैफाली पंड्या
शांतिकुंज 30 सितंबर।
परम वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा के अवतरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्मवादिनी बहनों ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। इसके पश्चात महिला मंडल अध्यक्षा आदरणीया शैफाली पंड्या दीदी जी ने प्रेरणापद उद्बोधन में माताजी के जीवन एवं उनके वात्सल्यपूर्ण व्यक्तित्व को स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि परम वंदनीया माताजी स्नेह, ममता और करुणा की साकार प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने अपने आत्मीय व्यवहार से विशाल गायत्री परिवार को एक सूत्र में बांधे रखा। गुरुदेव कहा करते थे कि माताजी के बिना इतने बड़े परिवार को संभालना कठिन था। माताजी सबके दुःख-दर्द को अपना समझती थीं और उनका प्रेम सभी को संबल देता था।
शैफाली दीदी ने कहा कि माताजी के जीवन को अनुभव करने पर सहज ही अनुभूति होती है कि वे साक्षात् जगत जननी मां दुर्गा का स्वरूप थीं। उनका आश्वासन था— “इस बात की चिंता मत करना कि हम छोड़कर चले गए, मैं हमेशा आपके साथ हूँ।” यही विश्वास आज भी गायत्री परिवार के साधकों को निरंतर शक्ति देता है।
उन्होंने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव को प्रखर प्रज्ञा और परम वंदनीया माताजी को सजल श्रद्धा का स्वरूप माना जाता है। माताजी ने अपने त्याग एवं तप से अनेक सामाजिक रूढ़ियों को दूर करने का कार्य किया। उन्होंने नारी को गायत्री मंत्र जप का अधिकार दिलाने और नारी जागरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा “इक्कीसवीं सदी नारी सदी” का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव एवं माताजी के सपनों को साकार करने का मार्ग साधना, सेवा और आत्मनिर्माण से होकर जाता है। माताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं और समाज निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएं।
प्रस्तुत है कुछ छायाचित्र ।