आत्म-विश्वास
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बोबी का यह कथन बिलकुल सत्य है कि “जिन्हें अपने ऊपर विश्वास नहीं, वे चाहे कितने ही बलवान् क्यों न हों, यथार्थ में सबसे निर्बल हैं।” हमें उसी आदमी पर विश्वास करना चाहिए, जो अपने ऊपर विश्वास करता है। जो खुद अपनी योग्यता पर भरोसा नहीं करता, दूसरा कोई उस पर कैसे यकीन कर सकता है?
जब शत्रुओं ने कालोना के स्टीफेन को कैद कर लिया तो उससे कहा- “बताओ, अब तुम्हारा किला कहाँ है?” उसने हृदय पर हाथ रखते हुए उत्तर दिया- “यहाँ”। एक बार एक नाव में सीजर कहीं जा रहा था, रास्ते में तूफान आया और नाव डगमगाने लगी। यह देख कर मल्लाह घबराने लगे। तब सीजर ने कहा था- “घबराओ मत, तुम्हारी नाव में सीजर और उसका भाग्य भी है।” ऐसे ही साहसी वीरों के दुनिया चरण चूमती है, जो संपत्ति और विपत्ति सब दशा में अपने ऊपर विश्वास रखते हैं।
कई मनुष्य नम्रता या विनय के नाम पर अपना आत्म-सम्मान खो देते हैं। विनय का अर्थ यदि अपनी योग्यता प्रकट करने में असमर्थ होना होता हो और नम्रता का अर्थ किसी के सामने नाक रगड़ना हो, तो यह दोनों ही दुर्गुण कहलावेंगे। स्वाभिमानी ही नम्रता का ठीक पालन कर सकते हैं। झूठी खुशामद करने वाले बुजदिलों को भला कौन विनयी कहेगा? दुनिया के पास इतनी फुरसत नहीं है, कि वह हर आदमी की विद्वत्त या योग्यता की जाँच करें। मनुष्य का चुनाव उसके मुँह से बतलाई हुई योग्यता से ही किया जाता है। जो अपने सद्गुणों पर विश्वास करता है और साहसपूर्वक प्रकट करता है, उसी को उपयुक्त मिलता है। कहते हैं कि सोते हुए शेर से भोंकने वाला कुत्ता अधिक अच्छा है।
सेचलिग कहता है- ‘जो मनुष्य जानता है कि मैं क्या हूँ, वह यह भी जान लेगा कि मुझे क्या होना चाहिए।’ माइकेल रेनाल्डस ने कहा है, विश्वास, आचरण का एक मूल्यवान तत्व है विद्वान का कथन है, जो आत्मा का निरादर है, परमात्मा उसका निरादर करता है।

