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Magazine - Year 1957 - Version 2

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First 15 17 Last
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इस वर्ष की साधना

इस वर्ष सूक्ष्म-वातावरण में जो अनुपयुक्त तत्व प्रचुरमात्रा में फैले हुए हैं उनके कारण तीव्र साधना एवं तपश्चर्या में साधकों का मन न लगेगा। बहुधा साधनाएं अधूरी रहेंगी। इसलिए इस वर्ष व्यक्तिगत-एकाँकी नहीं, गायत्री परिवार के सदस्यों को सामूहिक साधनाओं पर ही बल देना चाहिए। सन् 57 के लिए निर्धारित अष्टसूत्री संकल्प जिसमें नित्य 24 लक्ष गायत्री जप, 24 हजार गायत्री चालीसा पाठ, 24 हजार मंत्र लेखन, 24 हजार आहुतियाँ मुख्य हैं, पूरा करने के लिए सामुदायिक आयोजनों की व्यवस्था पर अधिक जोर देना चाहिए। गायत्री परिवार की शाखाएं बनाकर वह कार्य संगठित रूप से सरलतापूर्वक हो सकता है। गायत्री उपासकों की मनोदिशा इस वर्ष यही संगठित साधन करने में लगानी चाहिए।

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शाखाओं के समाचार

विलासपुर (बम्हनी बाजार) में-अक्षय नवमी के शुभ पर्व पर सैकड़ों गायत्री उपासकों ने वनभोज का उत्सव, सिद्धेश्वरनाथ के वन निकुँजों में हंसदा नदी के पुनीत तट पर मनाया। यहाँ गायत्री माता की पूजा-अर्चना के बाद आरती एवं संकीर्तन हुआ। फिर साँस्कृतिक उत्थान और विश्व कल्याण में गायत्री उपासना का स्थान-इस विषय पर भाव पूर्ण भाषण हुए।

-मोहन लाल गुप्ता

सोनपुर के गायत्री उपासकों ने मिल कर गंगा के तट पर खूब उत्साह से गीता-रामायण समारोह मनाया और जनता को साँस्कृतिक भाव एवं विचारों को अपनाने के लिए अनुकूल प्रेरणा प्रदान की।

-डॉ. गोवर्धन

लखनऊ के गायत्री परिवार ने रविवार को एकत्रित होकर उपासना के उपराँत सामूहिक रूप से हवन किया तथा साँस्कृतिक उत्थान करने के लिए सत्संकल्प लिया।

-मदन मोहन शुक्ल

वानप्रस्थाश्रम पवई में (बम्बई) सूर्य ग्रहण के अवसर पर भगवान कृष्ण के वचनानुसार- ‘गुण कर्म विभागशः’ के आधार पर विशाल सामूहिक यज्ञ हुआ, जिसमें अत्यन्त उल्लास और उत्साह से नर-नारियों ने भाग लिया।

-श्रीधर नारायण पराँजपे

उमरिया (शहडोल) में गायत्री परिवार की ओर से अति उत्साह से यज्ञ कार्य सम्पन्न किया गया। जनता ने प्रेमपूर्वक उसमें सहयोग दिया।

-रामकुमार त्रिपाठी

मकड़ोन (उज्जैन) गायत्री परिवार ने सवालक्ष की जप संख्या पूरी करके विशाल रूप में यज्ञ करने का संकल्प किया है। योजना पूर्ण करने का प्रयत्न हो रहा है। -धूलजी पटेल

वासन (महेसाना) में गायत्री परिवार की ओर से दो यज्ञ सुसम्पन्न हुए।

-साँकलेश्वर पी. पुरोहित

सागोनवाड़ी (काला हाँडी) में सवा पाँच लाख गायत्री जप पूरा कर सामूहिक रूप से सवा पाँच हजार की आहुति दी गयी। जनता की साँस्कृतिक भावना और प्रेम दर्शनीय था।

-विनायक प्रसाद शर्मा

पूर्णिमा के पुनीत अवसर पर भुसावल के गायत्री परिवार की ओर से सहारोह पूर्वक यज्ञ सम्पन्न।

-वेद भूषण भटनागर

नया मन्दिर, जीरापुर (म.प्र.) में गीता जयंती के पावन अवसर पर अखण्ड पारायण, प्रार्थना के उपरान्त यज्ञ सम्पन्न किया गया। इसके उपरान्त विश्व के कल्याण के लिए सन्तगणों के सदुपदेश हुए।

-रामचन्द्र शर्मा

गायत्री तपोभूमि मथुरा के निर्देश और प्रेरणा से मैसूर में गायत्री यज्ञ सम्पन्न करके तर्पण-मार्जन एवं ब्रह्मभोज हुआ। वातावरण के सात्विक प्रभाव से जनता ओत-प्रोत हो रही थी।

-एच.वी. नारायण राव

रीनोक (सिक्किम) में शिव मन्दिर तथा श्री दमयन्ती देवी के निवास स्थान पर यज्ञ मण्डप निर्मित कर खूब समारो से 4000 आहुतियों का यज्ञ पूर्णिमा के अवसर पर हुआ। कुमारी कन्याओं ने उपवास पूर्वक यज्ञ में आहुतियाँ प्रदान कीं तथा सारे समारोहों को सफल बनाने में आवश्यक सहयोग दिया।

-वृन्दा देवी प्रधान

नागपुर के गायत्री परिवार की ओर से योगाभ्यासी महात्मा श्री जनार्दन जी का गायत्री विज्ञान पर भाषण देने का आयोजन हुआ। श्रोतागणों ने अति शाँति से सुन कर गायत्री उपासना करने की प्रेरणा ग्रहण की तथा सम्मिलित रूप से शुक्लपक्ष के रविवार को गायत्री यज्ञ सम्पन्न किया गया।

-रजनी कान्त

सटई (छतरपुर) में प्रति रविवार को संध्या समय गायत्री की ओर से आयोजन होता है, जिसमें धर्म एवं नीति पूर्ण आचरण करने-फैलाने की प्रेरणा दी जाती है। अन्य सम्प्रदाय वाले भी इसमें भ्रातृत्व भाव से सम्मिलित होते हैं। -शिव प्रसाद शर्मा

जमशेदपुर के गायत्री परिवार ने कार्तिक पूर्णिमा में खूब उत्साह से 2400 आहुतियों का सामूहिक यज्ञ किया। यज्ञ से फैले सात्विक प्रभाव से सभी पुलकित हो रहे थे। -रामराज पाण्डेय

माता की कृपा से सवालक्ष जप पूरा होकर खूब समारोह पूर्वक कल्याण में यज्ञ हुआ। यज्ञ के उपरान्त कई महान आत्माओं के सम्भाषण के बाद प्रसाद वितरण करके लगभग एक सहस्र व्यक्तियों का ब्रह्म-भोज सुसम्पन्न हुआ।

-मोरेश्वर वामन ढ़ोसर

मर्दसा (बुलन्द शहर) में गायत्री परिवार की ओर से दो बार कार्तिक एवं मार्ग-शीर्ष पूर्णिमा में सामूहिक गायत्री यज्ञ हुआ, जिसमें स्थानीय जनता ने बड़े प्रेम से भाग लिया।

-हृदय प्रकाश

बरेली के गौरीशंकर मन्दिर गुलाब नगर में प्रति गुरुवार 1200 आहुतियों का गायत्री यज्ञ नियमित रूप से होता रहता है। साँस्कृतिक भाव के साथ गायत्री उपासकों की संख्या भी बढ़ रही है।

-यशोदानन्दन अग्निहोत्री

सूर्य ग्रहण के अवसर पर व्यावर गायत्री परिवार की ओर से विभिन्न धर्म कृत्यों के साथ 1100 आहुतियों का गायत्री यज्ञ सम्पन्न हुआ।

-घीसूलाल बंसल

जोवट गायत्री परिवार ने सम्मिलित रूप से सूर्य ग्रहण के पुनीत अवसर पर जप एवं 2500 आहुतियों का यज्ञ सम्पन्न किया।

-चन्द्रशेखर चतुर्वेदी

भिलाड़ियाँ कलाँ (होशंगावाद) में श्री नर्वदा प्रसाद पाठक के यहाँ गायत्री परिवार की ओर से सामूहिक यज्ञ हुआ। भविष्य में 24 लाख का सामूहिक पुरश्चरण पूर्ण कर विशाल यज्ञ करने की आयोजना हो रही है। -गुलाब सिंह रघुवंशी

आसिकपुर (मुँगेर) में 18 से 26 नवम्बर तक सुसज्जित यज्ञ मण्डप में विशाल गायत्री यज्ञ सम्पन्न हुआ। सभी ऋत्विजों की भोजन व्यवस्था एवं सभी दर्शकों में प्रसाद वितरण व्यवस्थित रूप से किया गया।

-राजपति प्रसाद

वागली में गायत्री परिवार की ओर से सुव्यवस्थित रूप से यज्ञ सम्पन्न किया गया, जिसमें ब्रह्मसमाज ने अति प्रसन्नता से भाग लिया।

-रामचन्द्र व्यास

आरंग में मार्ग शीर्ष के प्रारम्भ से पुरुष सूक्त का पाठ करने का क्रम चलाते हुए पूर्णिमा में सांगोपांग हवन सम्पन्न किया गया।

-विद्या प्रसाद मिश्रा

मार्गशीर्ष अमावस्या में सूर्य ग्रहण के अवसर पर खामगाँव के सभी गायत्री उपासकों ने सामूहिक रूप में 25000 गायत्री मन्त्रों से साँगोपाँग सस्वर उच्चारण पूर्वक आहुति प्रदान की। घी और शाकल्य की मात्रा जनता की श्रद्धा से पर्याप्त मात्रा में एकत्रित हो रही थी।

-जय नारायण ब्रह्मचारी

खूँटी में गायत्री उपासकों ने अति-उत्साहपूर्वक सम्मिलित रूप से लगभग एक हजार आहुतियों का गायत्री यज्ञ सम्पन्न किया। परिवार के प्रयत्न से जनता में साँस्कृतिक-चेतना बढ़ रही है।

-बनवारी लाल

उदईपुर चपुन्ना (इटावा) के आस-पास ग्रामों में 24 यज्ञ कराये गये थे। उनकी सम्मिलित पूर्णाहुति ता.15-16-17 दिसम्बर को बड़े आनन्द और समारोहपूर्वक पाँच कुण्डों की यज्ञशाला में हो गई। मथुरा से श्री आचार्य जी, स्वामी प्रेमानन्द जी तथा श्री नत्थासिंह पधारे थे। जिस भूमि पर यज्ञ हुआ था उस खेत को श्री पातीराम जी ने गायत्री माता को अर्पण कर दिया है। यह स्थान पक्की सड़क से बिल्कुल सटा होने के कारण बड़े मौके का है। यहाँ एक सुन्दर गायत्री आश्रम बनाने का विचार हो रहा है।

-विश्वेश्वर दयाल दुबे

करवाड, पीपलदा (राजस्थान) में माघ सुदी 13, 14, 15, को 25 कुण्डों की यज्ञ शाला में एक विशाल यज्ञ करने का निश्चय हुआ है, इसके लिए 501 रु. श्री नंदलाल जी ने दिये हैं, जनता से भी सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। तैयारी में संयोजक सज्जन उत्साह पूर्वक जुट गये हैं।

नई शाखाओं की स्थापना

गायत्री शाखाओं की स्थापना हमारे ऋषियों की अमर संस्कृत का ज्ञापक है। भारत के हृदय में अविरल रूप से उसके प्रति श्रद्धा की धारा बहती रही है, इसीलिए जगह-जगह गायत्री परिवारों का संगठन क्रमशः बढ़ता ही जा रहा है। इस मास की नयी स्थापित शाखाओं के नाम दिये जा रहे हैं।

फतहपुर सीकरी (आगरा), खेरालु (महेसाना), इटैलिया (हमीरपुर), शमशपुर (कोटा), हाथरस (अलीगढ़), सुकेत (कोटा), बागडोद (गुजरात), दन्या (अलमोड़ा), बसन्तपुर (अलमोड़ा), कल्ली (सीतापुर), निगोही (शाहजहाँपुर), बड़ोखर बुजुर्ग (बाँदा), महेश्वर (निमाड़), नंदापुर (फतेहपुर), कलेनापुर (कानपुर), नवागाँव (लखीमपुर), बहरायच (उ.प्र.) करसरा (सतना), राजापुर (खीरी), सोनपुर (दरभंगा), अतर्रा (हमीरपुर), मेरीगंज (पुर्णियाँ), मनैतापुर (बस्ती), बाँदा (उ.प्र.), बेथर (उन्नाव), रावतपुर (उन्नाव), मौदहा (हमीरपुर), गोरखमढ़ी (सौराष्ट्र), हसनपुर (मुरादाबाद), रिसिया (बहरायच), देवास (म.प्र.), सोनीवाड़ा (पाटण) कोतसा (शहडोल), उरई (जालौन), अमरावती (बरार), मेरमाचाह (कोटा), ओखापोर्ट (काठियावाड़), मेवा नगला (अलीगढ़), भगौनापुर (फतेहपुर), जगदल (24 परगना), राजोद (धार), अनूपशहर (बुलन्दशहर), झालावाड़ (राजस्थान), बहेड़ी (बरेली), बेगुर्ले (रत्नागिरी), जिटफिरी (हमीरपुर), रायपुर (खीरी लखीमपुर), खरियार (कालाहाँडी), रायगढ़ (म.प्र.)

पकड़ी हटख बसंत (बलिया), खानपुर (झालावाड़), चतरखेड़ा (होशंगाबाद), धामपुर (बिजनौर), टनायल (शाजापुर), सिवनीं मालवा (होशंगाबाद), बलरामपुर (गोण्डा), केराकत (जौनपुर), नरबल (शाजापुर), लालास (नागोर)।

गायत्री आन्दोलन के फलस्वरूप देश भर में धार्मिक और साँस्कृतिक सामूहिक चेतना का आशाजनक एवं उत्साह वर्धक विकास हो रहा है। धार्मिक विचारधारा के लोग नैतिकता एवं मानवीय मण्डलियों को बढ़ाने के उद्देश्य से अनेक प्रकार के आयोजन स्थान-स्थान पर कर रहे हैं। गायत्री परिवार के संगठन बनाये जा रहे हैं। जहाँ अभी तक संगठन नहीं बन पाए हैं, वहाँ के लोग भी इस युग के लिए ‘संघ शक्ति’ की सर्वोपरि उपयोगिता को समझ कर परिवार की शाखा स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील हैं। अब तक लगभग 350 शाखाएं बन चुकी हैं। आगे इनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी।

गायत्री आन्दोलन के फलस्वरूप देश भर में धार्मिक और साँस्कृतिक सामूहिक चेतना का आशाजनक एवं उत्साह वर्धक विकास हो रहा है। धार्मिक विचारधारा के लोग नैतिकता एवं मानवीय मण्डलियों को बढ़ाने के उद्देश्य से अनेक प्रकार के आयोजन स्थान-स्थान पर कर रहे हैं। गायत्री परिवार के संगठन बनाये जा रहे हैं। जहाँ अभी तक संगठन नहीं बन पाए हैं, वहाँ के लोग भी इस युग के लिए ‘संघ शक्ति’ की सर्वोपरि उपयोगिता को समझ कर परिवार की शाखा स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील हैं। अब तक लगभग 350 शाखाएं बन चुकी हैं। आगे इनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी।

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