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Magazine - Year 1962 - Version 2

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प्रशिक्षण संबंधी व्यापक योजना

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युगनिर्माण योजना की पृष्ठभूमि का परिचय पाठक इस वर्ष की अखंड ज्योति के पृष्ठों में प्राप्त कर चुके हैं। उसे प्रत्यक्ष और व्यावहारिक रूप से समझने और हृदयंगम करने की आवश्यकता है। केवल पढ़ना मात्र ही पर्याप्त नहीं है। इस संबंध में सुनने−समझने और परस्पर विचार करने की भी आवश्यकता है, ताकि व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हर व्यक्ति अपने ढंग से अपने जीवन में योजना को कार्यान्वित करने की रूपरेखा बना सके। हर आदमी की परिस्थितियाँ भिन्न हैं, इसलिए उसके सोचने और करने का ढंग भी भिन्न हो सकता है, एक ही लक्ष्य की दिशा में अनेक व्यक्ति, अनेक स्थानों पर पैर रखते हुए चलते हैं। युग निर्माण के लिए हर किसी का योगदान एक तरह का नहीं हो सकता, उसमें भिन्नता रहेगी और उस भिन्नता के संबंध में हम लोग पारस्परिक विचार−विनिमय करके अधिक उपयुक्त तरीका खोज सकते हैं। इसी प्रकार शंका−अशंका और मतभेद के अनेक स्थल हो सकते हैं, उनका समाधान और समन्वय भी पारस्परिक विचार−विनिमय से ही संभव हो सकता है।

इसके लिए एक क्रमबद्ध प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ेगी। अखंड ज्योति परिवार के हर व्यक्ति को केंद्रीय विचारधारा के अधिक निकट संपर्क में आना होगा; इसलिए योजना के प्रत्येक सदस्य को, अखण्ड ज्योति के प्रत्येक ग्राहक का यह निमंत्रण दिया गया है कि वह एक महीना मथुरा आकर हमारे संपर्क में रहने और शिक्षा, साधना, चिकित्सा और सत्संग वाले, अक्टूबर अंक में पृष्ठ 54 पर छपे कार्यक्रम में सम्मिलित होने की तैयारी करें। कुछ लोग अधिक कार्यव्यस्त हो सकते हैं, जिनके लिए एक महीना कठिन है। उनके लिए दस दिन वाला शिक्षणक्रम रखा जाया करेगा। जो बात एक महीने में की जाती थी, वह सभी संक्षिप्त रूप से दस दिन में की जाया करेगी। 'अधिक गुड़ डालने से अधिक मीठा' वाली कहावत के अनुसार लाभ तो अधिक समय देने वालों को ही मिलेगा, पर विवशता में दस दिन की बात से भी काम चल सकता है।

माघ, बैसाख, श्रावण और कार्तिक यह चार महीने धार्मिक दृष्टि से अधिक पवित्र और जप, साधना आदि के अधिक उपयुक्त माने गये हैं; इसलिए चांद्रायण व्रत द्वारा आत्मशोधन, तपश्चर्या, प्रायश्चित्त, पुरश्चरण करने का कार्यक्रम वर्ष में इन चार महीने गायत्री तपोभूमि में रहा करेगा। साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा एवं अरोग्य-रक्षा का कार्यक्रम रहेगा। जिन्हें छोटे−मोटे रोग हों, वे उनका चांद्रायणकल्प भी इसी महीने की अवधि में करके रोगमुक्त बनने का प्रयत्न करेंगे। इन्हें स्वास्थ्य−शिविर भी कह सकते हैं। जो समुचित शिक्षण प्राप्त कर सकेंगे, वे प्राकृतिक चिकित्सालय द्वारा दूसरों की चिकित्सा कर सकने की क्षमता भी इसी एक महीने में प्राप्त कर लेंगे।

दस−दस दिन के शिविर वर्ष में तीन बार हुआ करेंगे। आश्विन सुदी प्रतिपदा से विजयादशमी तथा चैत्र सुदी प्रतिपदा से दशमी तक, जेष्ठ सुदी प्रतिपदा से दशमी (गायत्री जयंती) तक, दस−दस दिन के तीन शिविरों में आने वाले लोगों को भी संजीवन विद्या के तत्त्वज्ञान पर आवश्यक विचार−विमर्श करने का अवसर मिलेगा और वे आगंतुक अपनी जीवन-दिशा को सीधी करने और शांतिमय बनाने के संबंध में बहुत कुछ सुन-समझ सकेंगे।

दस−दस सदस्यों के एक ग्रुप लीडर (शाखा संचालक) नियुक्त करके अखण्ड ज्योति परिवार के सदस्यों को संघबद्ध करने की योजना कार्यान्वित की जा रही है। दस−दस शाखासंचालकों का अर्थात सौ सदस्यों का एक क्षेत्रीय संगठन रहेगा। इन क्षेत्रीय संगठनों के तीन−तीन दिन के शिक्षण शिविर रहें। विचार−विनिमय का इन संक्षिप्त शिविरों में भी इन सौ सदस्यों को अवसर मिल सकता है। मथुरा से कोई व्यक्ति पहुँचकर विचारगोष्ठी के रूप में युगनिर्माण योजना को जीवन में ढालने संबंधी समस्याओं पर आवश्यक प्रेरणा और परामर्श दे सकता है। बन पड़ेगा तो हम स्वयं भी ऐसे कुछ शिविरों में पहुँचने का प्रयत्न किया करेंगे। शिक्षण पाए हुए अन्य व्यक्ति भी इन शिविरों का संचालन कर सकते हैं। इस प्रकार एक प्रकार से अखण्ड ज्योति परिवार के सभी सदस्यों को एक बार मथुरा आकर या अपने स्थानीय शिविरों में शिक्षण प्राप्त करना चाहिए। जब साधारण कार्यों के लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है, हर जगह ट्रेंड व्यक्तियों को महत्त्व मिलता है, तो फिर युगनिर्माण योजना की महान प्रक्रिया का उत्तरदायित्व वहन करने वालों के लिए यह सब क्यों आवश्यक न होगा? संगठन कार्ययोजना का प्रथम चरण पूरा होते ही हमें द्वितीय चरण की तैयारी में लगना होगा। चांद्रायण व्रत संबंधी एक महीने का प्रथम सत्र पौष सुदी पूर्णिमा से माघ सुदी पूर्णिमा तक (9 जनवरी से 8 फरवरी 63 तक) चलेगा। जिन्हें एक महीने का अवकाश हो, वे इसके लिए तैयारी करें और जिन्हें 10 दिन का अवकाश हो वे चैत्र की नवरात्रि में (26 मार्च से 4 अप्रैल 63 तक) आने का प्रयत्न करें। तीन−तीन दिन के शिविरों की रूपरेखा भी अगले अंक में छपेगी। संगठन कार्य पूरा होने पर इस योजना को कार्यान्वित किया जाएगा।

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