परम् पूज्य गुरुदेव वृहत जीवन परिचय
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परम् पूज्य गुरुदेव ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में मूर्धन्य राजनेताओं जितना बढ़-चढ़ कर कार्य किया। उ.प्र. सरकार के सूचना विभाग ने आगरा जिले के स्वाधीनता “संग्राम का इतिहास “में उसका उल्लेख किया है, पर वह निताँत संक्षिप्त है। पहली बार शाँतिकुँज से उनके इस योगदान पर ऐसी पुस्तिका प्रकाशित की गई। पर जिसे संपूर्ण न भी कहा जायें तो अपर्याप्त भी नहीं कहा जायेगा।
यह पुस्तिका जिन हाथों में गई, उन सभी ने अनुरोध किया है कि प.पू. गुरुदेव के व्यक्तित्व और कर्तव्य पर एक समग्र पुस्तक उपलब्ध होनी चाहिए। अभी तक जो भी कुछ लिखा गया है वह सिंधु में बिंदु से अधिक नहीं है, यद्यपि अब तक उन पर तीन पी.एच.डी. हो चुकी हैं। संकल्प श्रद्धाँजलि समारोह के समय विशेषाँक भी प्रकाशित हो चुका है। कोई एक ऐसी समग्र पुस्तक का अभाव निःसंदेह खटकने वाली बात है। जिसमें उनकी साधना, तपश्चर्या, स्वाधीनता संग्राम, पत्रकारिता, हिमालय प्रवास, विशिष्ट यात्रायें, हिमालय दर्शन, पत्राचार, पत्रिकाओं का संपादन, साहित्य सृजन, गायत्री तपोभूमि, शाँतिकुँज, ब्रह्मवर्चस् और गायत्री शक्तिपीठों, प्रज्ञा संस्थानों की स्थापना, देशव्यापी प्रव्रज्या, बड़ों से भेंट, विशिष्ट सम्मान, विदेश प्रवास, पारिवारिक परिचय, विलक्षण कार्य, अतीन्द्रिय क्षमतायें, अभूतपूर्व उल्लेखनीय घटनायें, संस्मरण, साहस-संघर्ष, संगठन, सम्पन्न कार्यक्रमों का विवरण, महाप्रयाण उसके पश्चात् के निर्धारण तथा पूर्ति प्रबंध आदि सभी सुविस्तृत क्रमबद्ध, प्रामाणिक दस्तावेजों सहित प्रकाशित हों, अभी तक यह प्रश्न था, इसे लिखे कौन?कैसे लिखा जाये?अतएव यह कार्य उनके संपूर्ण वाङ्मय के साथ-साथ जिनके चालीस भाग (वाल्यूम्स) सम्पादन का कार्य प्रारंभ हो गया। यह जीवन चरित भी चिर-प्रतीक्षित था। उनके लिए भी उचित व्यवस्था हो गई है। पर जितनी सामग्री संकलित कर ली गई है। जोड़ने और प्रकाशन योग्य सामग्री उससे भी अनेक गुना अधिक अनुपलब्ध है। इस जीवन परिचय में समग्रता आ जाये अतएव स्वजनों, संबंधियों, पाठकों तथा उन सभी परिजनोँ से, जिनके पास कुछ न कुछ संस्मरण, सामग्री उनसे संबद्ध है। वे उसे हमारे पते पर रजिस्टर्ड पोस्ट से भिजवाने की कृपा करें। जिसकी जो भी सामग्री होगी उन योग के पश्चात् सादर लौटा दी जायेगी।
वंदनीय माताजी, प.पू. गुरुदेव के जीवन का अविच्छिन्न अंग रही है। उनकी सहभागिता से ही उनके जीवन और मिशन की पूर्णता है। पू. गुरुदेव के जीवन काल में उन्होंने जो योगदान दिया है, वह उनके कर्तव्य से कम नहीं। महाप्रयाण के पश्चात् तो पू. गुरुदेव का संपूर्ण व्यक्तित्व उन्हीं में समाहित हो गया है, अतएव सभी संस्मरण संदर्भ वंदनीय माताजी के भी भेजे जायें।
क्या-क्या सामग्री भेजी जाये उसका विवरण निम्नानुसार है-
1-ऐसे व्यक्तिगत पत्र जिन्होंने जीवन के किसी भाग को स्पर्श किया हो, प्रभावित किया है, स्वगत तथ्य का अपना लेख उनकी लेखनी से लिखे पत्र के साथ अवश्य जोड़ें। ऐ से परिजन उपलब्ध फोटो भी साथ भेजें।
2-जहाँ कार्यक्रम संपन्न हुए हों उनका विस्तृत विवरण फोटोग्राफ सहित।
3-सभी शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों, चरणपीठों के फोटोग्राफ, बनने का इतिहास, वर्तमान परिस्थितियाँ और उनसे जुड़े हुए परिजनोँ के पते, परिचय सामूहिक फोटोग्राफ।
4-अन्य पत्र-पत्रिकाओं में छपे उनके लेख-संस्मरण
5-उनके मित्रों, संबंधियों, कुटुम्बियों, से संबंधित परिचय-संस्मरण, फोटोग्राफ बाल्यावस्था के।
6-समाचार पत्रों में छपे उनसे संबंधित कार्यक्रमों, जीवन परिचय आदि की कतरने।
7-उनसे संबंधित किसी भी तरह के दस्तावेज, प्रमाण पत्र, प्रशस्ति-पत्र, अभिनंदन पत्र आदि।
8-उनके संपर्क में आने के बाद आये जीवन में
परिवर्तनों का उल्लेख, साधनाजन्य अनुभूतियाँ।
9-अन्य मंचों, संस्थानों, विद्यालयोँ आदि में संपन्न कार्यक्रमों, भाषणोँ, गोष्ठियों के उल्लेख।
10-किसी के पास उनसे संबंधित जो कुछ भी कहने, सुनने, दिखाने योग्य हो, वह सभी सामग्री।
11-जिनके पास फोटोग्राफ के साथ नेगेटिव उपलब्ध हों वे कृपया फोटोग्राफ के साथ नेगेटिव भी भेजें। नेगेटिव रंगीन या श्वेत श्याम जो भी हों वहीं भेजना चाहिए।
यह मिशन उन सभी का हृदय से आभारी रहेगा, जो इस महान् कार्य में थोड़ा भी योगदान देगा।

