Quotation
मनुष्य तभी दुःख में ग्रसित हाता है जब उसके आन्तरिक विचारों और परिस्थितियों में मेल नहीं खाता। *****
इन्द्रिय निग्रह में बल है, सद्विचारों में विजय है और शान्ति में शक्ति है। *****
मूर्ख और बुद्धिमान दोनों ही हानि जनक नहीं होते केवल अर्द्ध मूर्ख ही डरने की चीज है।

