उज्ज्वल भविष्य की एक और बानगी
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प्रसुप्त क्षमताएँ मनुष्य में असीम मात्रा में भरी पड़ी हैं। ऋषि स्तर के व्यक्ति प्रयास-पुरुषार्थ से इन्हें जगा लेते हैं । कुछ में पूर्व जन्मों की संचित सम्पदा का प्रभाव बलशाली होने से वे सहज ही उभर आती हैं । ऐसी क्षमताओं में पूर्वाभास, भविष्य कथन पूर्वानुमान जैसे घटनाक्रम अधिक देखने को मिलते हैं । टेनी हेल नामक एक अमरीकन महिला में इसी स्तर की उपलब्धियाँ पायी गयी हैं व उसके द्वारा बतायी गयी भविष्यवाणियों में से अधिकाँश को सच पाया गया है । एक धर्मनिष्ठ चर्च के पादरी की पुत्री हेल में ये क्षमताएँ एक दिन चर्च में उपदेश सुनने के तुरन्त बाद उभरीं व फिर यह क्रम सतत् चलता ही रहा है ।
कम उम्र में ही पहली भविष्यवाणी जो हेल ने की वह थी अमेरिकी क्षितिज में बहुचर्चित राजनीतिक घटना वाटरगेट काँड एवं तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन का राजनीतिक पतन । यह दोनों घटनाएँ बाद में शब्दशः सत्य सिद्ध हुई । इसके उपरान्त उनके द्वारा व्यक्ति विशेष से लेकर राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक परिवर्तनों के बारे में की गई घोषणाएँ अक्षरशः सत्य निकलती गई । उसने कहा था कि सन् 1976 वहाँ के प्रमुख राजनेता हार्वर्ड ह्यूज के लिए निराशा एवं विशेष सावधानी बरतने का वर्ष है, जो सत्य निकला और एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई ।
दस वर्ष पहले उनकी घोषणा थी कि सन् 1976 में राष्ट्रीय चुनाव होंगे, इसमें रोनाल्ड रीगन को अपने राजनीतिक स्थिति को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो जायेगा । 1976 आने पद परिस्थितियाँ वैसी ही बन गई और उन्हें जेराल्ड फोर्ड से हारना पड़ा । उन्होंने विश्व संबंधी भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि 1976 विश्व व्यवस्था के लिए एवं प्राकृतिक पर्यावरण के लिए अत्यन्त नाजुक समय है । इस अवधि में अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अति शीत, तीव्र गर्मी से ऐसा असंतुलन बनेगा, जिसके कारण विश्व के अधिकाँश देशों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जायेगी, फलस्वरूप मृत्यु दर इस वर्ष अपनी चरम सीमा पर रहेगी । यह घटना मात्र अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए एक संकट लेकर आयी ।
टेनी हेल को भविष्य की बातें स्वयमेव ही दीखतीं और उन्हें ऐसी लिखतीं जैसे घटनाओं को सामने घटित होती देख रहीं हों । आगे चलकर पैसिफिक उत्तर पश्चिम के मनोविज्ञान केन्द्र में लू जाली प्रोडक्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया ।
उन्होंने 1980 से 2000 के समय को महत्वपूर्ण मानकर उसके बारे में भी काफी कुछ कहा है । वे लिखती हैं ।
आने वाले 20 वर्षों से दौरान हमें स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है कि वाह्य नियमों मान्यताओं एवं विभिन्न देशों के संविधानों में मानवहित को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर परिवर्तन होंगे । अनेकों विनाशकारी क्षेत्रीय क्रान्तियाँ अनायास ही होंगी, जिनका सम्बन्ध विश्व व्यवस्था स्थापित करने से होगा, भले ही इसमें जनहानि हो, लेकिन इसके बाद की परिस्थितियाँ अत्यन्त सुखद होंगी ।
आणविक शक्ति को बढ़ाने की अपेक्षा सम्पूर्ण वैज्ञानिक समुदाय रोगों के निदान के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक देंगे । इस अवधि में चिकित्सा के क्षेत्र में अद्भुत क्राँति होगी, जिसका लक्ष्य रहेगा “अक्षुण्ण स्वास्थ्य ।”
(3) इस सदी के अन्त तक एड्स , कैंसर जैसे भयावह रोगों का जिससे सम्पूर्ण मनुष्य जाति डरी हुई है अस्तित्व ही नहीं रहेगा, लोगों के जीवन क्रम में आमूल चूल परिवर्तन हो से डायनोसौर जैसे ये रोग स्वतः अदृश्य हो जायेंगे । इस अवधि में प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा ही अपनी चरमसीमा पर रहेगी । अथवा यों कहने मात्र इनका ही अस्तित्व रहेगा ।
(4) विभिन्न अखबारों एवं पुस्तकों की संख्या कम हो जायेगी, क्योंकि कागज बनाने के लिए लकड़ी एवं रसायन उपलब्ध नहीं होगे । अतः ऐसी व्यवस्था बनेगी, जिसमें केवल मानवीय मूल्यों से संबंधित मात्रा में ही पुस्तकें लिखी जायेंगी।
(5) युद्ध नहीं, बल्कि आणविक महाविपत्ति उन समस्त औद्योगिक केन्द्रों को बन्द करने पर विवश कर देगी जिनमें खतरनाक रसायनों का उत्पादन होता है, किन्तु संश्लेषित खाद्य पदार्थ एवं जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन का क्रम बन्द नहीं होगा ।
(6) पुरातत्ववेत्ताओं को प्राचीनकाल के ऐसे हस्तलिखित ग्रंथ मिलेंगे, जिससे धार्मिक क्षेत्र में अद्भुत क्राँति होगी और सभी धर्मों में भेदभाव समाप्त हो जाएगा । एक लक्ष्य एवं दिशा रखकर सभी एक जुट होकर कार्य करेंगे एवं संकीर्ण बातों को लेकर होने वाले देंगे, फसाद का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा । भाई चारा ही सबका धर्म होगा।
(7) भविष्य में मनोविश्लेषण एवं मनोविज्ञान का सर्वोपरि स्थान होगा । सम्पूर्ण विश्व की व्यवस्था में यह विशिष्ट योगदान देगा । यहाँ तक कि पुलिस एवं न्याय स्तर पर भी इसका उपयोग होगा । इससे अपराधियों की संख्या स्वयमेव घट जायेगी ।
(8) क्रोमोज़ोम के क्षेत्र में नई खोज, अनेकों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगी । एवं ऐसे जीवों को उत्पन्न करने का सूत्र हस्तगत होगा, जो प्राचीन ग्रंथ में वर्णित हैं और जो अपने आप में आश्चर्ययुक्त हैं ।
(9) मनुष्य का मस्तिष्क पूर्णतः उदात्त विचार चेतना से संचालित होगा । व्यक्तिगत अधिकार न होंगे । उस काल में लोग युग के सामूहिक अवचेतन स्तर पर ही नियंत्रित होगे, जिसका स्वरूप टेलीपैथी (दूरश्रवण) होगा । इस आधार पर स्वार्थी एवं संकुचित विचारों का प्रवाह ही प्रायः समाप्त सा हो जायेगा और विधेयात्मक विचार ही वातावरण में छाया रहने के कारण यही लोगों को आप्लावित करेगा ।
(10) जनसंख्या नियन्त्रण के लिए व्यक्तिगत स्तर पार अनुत्पादक चक्र के लिए नये तकनीक उभर कर आयेंगे । इसका संचालन भी वैचारिक प्रवाह से होगा । इसके बारे में हर व्यक्ति स्वयं ही जिम्मेदारी अनुभव करेगा इस और विवेकपूर्ण कदम बढ़ायेगा ।
(11) सन् 2000 आते ही भाई चारा ममता, समता से आप्लावित ऐसे मानवतावादी धर्म का स्वरूप दिखाई देगा, जिसके प्रभाव में रूप और चीन जैसे साम्यवादी राष्ट्र भी आ जायेंगे और ऐसी सुखद परिस्थितियाँ निर्मित करने का क्रम चल पड़ेगा , जो पिछले दो हजार वर्षों की कमी को सौ वर्ष में पूरा कर देगा । इस काल को एक शब्द में कहना हो ता ‘गोल्डन सेंचुरी’ के नाम से पुकार सकते हैं।
भविष्य के संबंध में यह उद्गार प्रख्यात भविष्यवक्ता टेरी हेल के हैं । हम आज उस कथित संधिकाल से गुजर रहें हैं, जिसके बाद आने वाले समय को उनने
"गोल्डन एज- स्वर्णयुग“ नाम से सम्बोधित किया है । अतः इस स्वर्णयुग के नींव की जिम्मेदारी पूर्णतः हम पर है । हम जैसा स्वरूप उस नींव को देंगे वैसी ही आने वाले समय की इमारत उस पर खड़ी हो सकेगी । हम स्वयं उस इमारत की सुदृढ़ और उत्कृष्ट बन सकें, अतः परिवर्तन क्रम स्वयं से आरंभ करें, तभी उस स्वर्णयुग के प्रभात पर्व को हम इक्कीसवीं सदी उज्ज्वल भविष्य के रूप में देख सकेंगे ।

