• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • सृजन शिल्पी की आचार संहिता
    • पहला मोर्चा—अपना आपा
    • दूसरा मोर्चा—स्वजनों का
    • तीसरा मोर्चा—जनमानस का शोधन
    • कार्य के अनुरूप व्यक्तित्व
    • स्वभाव की शालीनता
    • प्रामाणिकता अनिवार्य
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Books - सृजन शिल्पी की आचार संहिता

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN


सृजन शिल्पी की आचार संहिता

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last

इमारतों का सृजन सीधा-सादा सा होता है। पुल, सड़कों, बांधों का निर्माण निर्धारित नक्शे के आधार पर चलता रहता है। पर युगों के नव सृजन ने अनेकानेक पेचीदगियां और कठिनाइयां आ उड़ेली हैं। कार्य का स्वरूप ही ऐसा है, जिसमें प्रवाह के उलटने के प्रयास, जूझने की विद्या ही प्रमुख बन जाती हैं। विचारक्रान्ति, युग-परिवर्तन, जनमानस का परिष्कार ऐसे संकल्प हैं, जिनकी पूर्ति में प्रायः उन सभी से टकराना पड़ता है; जो अब तक स्वजन, संबंधी, हितैषी, निकटवर्ती एवं अपने प्रभाव क्षेत्र के अन्तर्गत माने जाते थे। इसमें मार-काट न होने पर भी इसे भूतकाल में सम्पन्न हुए महाभारत के समतुल्य माना जा सकता है, भले ही उस टकराहट को दृश्य रूप में न देखा जा सकता हो।
अभिमन्यु चक्रव्यूह में अकेला ही घिरा पड़ा था, सब दिशाएं शत्रुओं से अवरुद्ध थीं। ऐसी दशा में भी अर्जुन पुत्र ने समय की महती आवश्यकता और न्याय-नीति को विजयी बनाने की ललक में वह सब कुछ किया, जो उसके बलबूते में था। इस संदर्भ में उसे प्राण गंवाने पड़े, पर विजय दुंदुभी इतिहासकार अनन्त काल तक उसी के यशगान की बजाते रहेंगे। इसी स्तर का साहस उन्हें भी अर्जित करना पड़ेगा, जो अवांछनीयता, मूढ़-मान्यता, लोभ-लिप्सा, संकीर्ण-स्वार्थपरता और निकृष्टता के व्यामोह को चीर कर नवसृजन का मार्ग बनाना चाहें।
2 Last


Other Version of this book



सृजन शिल्पी की आचार संहिता
Type: TEXT
Language: HINDI
...

सृजन शिल्पी की आचार संहिता
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books



अंतरंग जीवन का देवासुर संग्राम
Type: SCAN
Language: HINDI
...

बड़े आदमी नहीं महामानव बनें
Type: TEXT
Language: HINDI
...

बड़े आदमी नही महामानव बनें
Type: SCAN
Language: EN
...

જીવન સાધનાનાં સોનેરી સૂત્રો
Type: SCAN
Language: EN
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: TEXT
Language: EN
...

தவ வாழ்க்கைக்கான
Type: SCAN
Language: EN
...

जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
Type: SCAN
Language: EN
...

మానసిక సంతులనం
Type: SCAN
Language: TELUGU
...

Mental Balance
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

மன சமநிலை
Type: SCAN
Language: TAMIL
...

जीवन को सार्थक बानाये
Type: SCAN
Language: HINDI
...

चेतना का सहज स्वभाव स्नेह सहयोग
Type: TEXT
Language: HINDI
...

चेतना सहज स्वभाव स्नेह-सहयोग
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मस्तिष्क प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मस्तिष्क प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष
Type: TEXT
Language: HINDI
...

युग की माँग प्रतिभा परिष्कार
Type: TEXT
Language: EN
...

युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग १
Type: TEXT
Language: EN
...

कालाची गरज प्रतिभा परिष्कार भाग 2
Type: SCAN
Language: MARATHI
...

Refinement of Talents: Need of the present Era
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग-१
Type: SCAN
Language: EN
...

युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग २
Type: TEXT
Language: EN
...

कालाची गरज प्रतिभा परिष्कार भाग 1
Type: SCAN
Language: MARATHI
...

युग की माँग प्रतिभा परिष्कार
Type: TEXT
Language: EN
...

Jivan Sadhana A Noble Art of Living
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

Articles of Books

  • सृजन शिल्पी की आचार संहिता
  • पहला मोर्चा—अपना आपा
  • दूसरा मोर्चा—स्वजनों का
  • तीसरा मोर्चा—जनमानस का शोधन
  • कार्य के अनुरूप व्यक्तित्व
  • स्वभाव की शालीनता
  • प्रामाणिकता अनिवार्य
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj