सांस्कृतिक संध्या में सजी शताब्दी की चेतना, कला, साधना और संस्कारों का भावविभोर संगम
हरिद्वार, 20 जनवरी 2026
परम वंदनीया माताजी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह के अंतर्गत आज के दिन का समापन एक भव्य एवं भावविभोर कर देने वाली सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। इस संध्या का कुशल संयोजन एवं मार्गदर्शन आदरणीया शेफाली जीजी के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसने कार्यक्रम को गरिमा और आत्मीयता से भर दिया।
इस अवसर पर आदरणीया शेफाली जीजी ने अपने उद्बोधन में परम वंदनीया माताजी के जीवन प्रसंगों को अत्यंत आत्मीयता से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार माताजी ने समर्पण, संगठन और करुणा के साथ प्रत्येक उत्तरदायित्व का निर्वहन किया तथा गुरुदेव उन्हें किस श्रद्धा और विश्वास के साथ युग-निर्माण के प्रत्येक कार्य का आधार मानते थे। उनके शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
सांस्कृतिक संध्या में देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर संगीत एवं भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ की महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोकनृत्य ने क्षेत्रीय संस्कृति की सुगंध बिखेरी, वहीं मध्यप्रदेश के सेंधवा स्थित गायत्री शक्तिपीठ के नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव एवं मलखंब की अद्भुत प्रस्तुतियाँ दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गईं।
कला, साधना और संस्कारों से सुसज्जित इस सांस्कृतिक संध्या ने यह स्पष्ट कर दिया कि गायत्री परिवार की सांस्कृतिक चेतना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मूल्यबोध और जीवन निर्माण का सशक्त माध्यम है।
