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Reading: सत्य की अकूत शक्ति पर विश्वास कीजिए। · Page 1

सत्य की अकूत शक्ति पर विश्वास कीजिए।

जो अपनी आत्मा के आगे सच्चा है, जो अपनी अन्तरात्मा की आवाज के अनुसार आचरण करता है, जो बनावट, धोखेबाजी, चालाकी को तिलाँजलि देकर ईमानदारी को अपनी जीवन नीति अपनाये हुए है वह इस दुनिया का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति है। क्योंकि सत्य को अपनाने से मनुष्य शक्ति का पुँज बन जाता है। महात्मा कन्फ्यूशियस कहा करते थे कि सत्य में हजार हाथियों के बराबर बल है। परन्तु वस्तुतः सत्य में अपार बल है। उसकी समता भौतिक सृष्टि के किसी भी बल से नहीं हो सकती।

स्मरण रखिए, झूठ आखिर झूठ ही है। वह आज नहीं तो कल जरूर खुल जायगा। असत्य का जब भण्डाफोड़ होता है तो उससे मनुष्य की सारी प्रतिष्ठा नष्ट हो जाती है। उसे अविश्वासी, टुच्चा और ओछा आदमी समझा जाने लगता है। झूठ बोलने में तात्कालिक थोड़ा लाभ दिखाई पड़े तो भी आप उसकी ओर ललचाइए मत, क्योंकि उस थोड़े लाभ के बदले में अन्ततः अनेक गुनी हानि होने की संभावना है।

आप अपने वचन और कार्यों द्वारा सचाई का परिचय दीजिए। सत्य उस बीज के समान है जो आज छोटा दीखता है पर अन्त में फल फूल कर विशाल वृक्ष बन जाता है। जो ऊंचा, प्रतिष्ठायुक्त और सुख−शांति का जीवन बिताने के इच्छुक हों उनका दृढ़ निश्चय होना चाहिए कि हमारे वचन और कार्य सचाई से भरे हुए होंगे।