• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • शान्ति तो अन्दर ही खोजनी पड़ती है।
    • ईश्वर प्राप्ति की साधना
    • केवल सत्य ही जीतता है।
    • Quotation
    • जीवन का कुछ उद्देश्य भी तो हो
    • ज्ञान की उपासना कीजिए
    • अपने स्वामी आप बनिए?
    • Quotation
    • गुलाब और आम के पेड़
    • गौरव, निरन्तर चलते रहने में है।
    • हजरत इब्राहीम
    • जीवन साधना के साधक—अरविन्द
    • Quotation
    • झूठे मित्र
    • हिन्दू-धर्म की अगणित विशेषताएँ
    • ईश्वर प्राप्ति
    • जीवन में सादगी की आवश्यकता और उपयोगिता
    • फूल और पत्थर
    • नारी समस्या का आध्यात्मिक हल
    • सन्त रैदास की साधना
    • डार्विन
    • चिन्ता में डूबे रहने से क्या फायदा?
    • शारीरिक स्वच्छता की उपेक्षा न करें
    • हनुमान जी को पूजिए पर वैसे ही बनिए भी
    • सत्याग्रह की लड़ाई
    • कुरूप और फिसड्डी-ईसप
    • Quotation
    • बूंद का अस्तित्व
    • किसी से भी ईर्ष्या मत किया करें
    • स्वावलम्बी बालक
    • मधु-संचय
    • मधु-संचय (Kavita)
    • धर्मपत्नी के प्रति पति के कर्तव्य
    • काला कौआ
    • शिक्षकों का महान उत्तरदायित्व
    • तीन पथिक
    • गायत्री का भावनात्मक एवं वैज्ञानिक महत्व
    • अन्नमय कोश की साधना
    • मनोमय कोश का परिष्कार
    • प्राणमय कोश का अनावरण
    • विज्ञानमय कोश का जागरण
    • आनंदमय कोश का आनंद
    • अखण्ड-ज्योति परिजनों के लिए पाँच आवश्यक सूचनाएं
    • पुस्तकालय को प्रणाम
    • पुस्तकालय को प्रणाम (Kavita)
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Magazine - Year 1964 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
SCAN TEXT


अखण्ड-ज्योति परिजनों के लिए पाँच आवश्यक सूचनाएं

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 42 44 Last
कार्तिक मास का गीता शिविर

कार्तिक का गीता शिविर उन सब स्वजनों के लिए आवश्यक है जो लोक सेवा के क्षेत्र में उतर कर जनजागृति के लिए ठोस कार्य करना चाहते हैं। आगे परिवार में सर्वत्र भागवत सप्ताहों की तरह गीता सप्ताहों की शृंखला चलाई जाने वाली है। शाखाएं अपना वार्षिकोत्सव उसी आधार पर किया करेंगी। इसके लिए युगनिर्माण की विचारधारा एवं कार्य पद्धति से परिचित प्रशिक्षित प्रचारकों की आवश्यकता पड़ेगी। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए इन शिविरों में सम्मिलित होना आवश्यक है। आत्म-कल्याण की दृष्टि से यह शिक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्थानीय संगठन एवं रचनात्मक कार्यों के लिए इसकी भारी उपयोगिता है। जो लोग आजीविका की कठिनाई के कारण योग्यता रहते हुए भी बाहर भ्रमण करते हुए लोक-निर्माण करने में असमर्थ रहते हैं उनके लिए भी एक उत्तम हल इस माध्यम से हो सकता है।

जन-जागृति के महान अभियान में सक्रिय भाग लेने के इच्छुक प्रत्येक परिजन को कार्तिक मास में (ता0 21 अक्टूबर से 19 नवम्बर तक) होने वाले गीता शिविर में सम्मिलित होने के लिए इन पंक्तियों द्वारा आमंत्रित किया जाता है। शिक्षार्थियों को अपने भोजन व्यय तथा मार्ग व्यय का प्रबंध स्वयं करके आना चाहिए।

युग-निर्माण पत्रिका की आवश्यकता

अखण्ड-ज्योति जिस विचारधारा का प्रतिपादन सैद्धान्तिक रूप से करती है, उसका व्यावहारिक स्वरूप क्या हो सकता है, इसका क्रियात्मक मार्ग दर्शन करने के लिए ‘युगनिर्माण’ पाक्षिक पत्रिका निकाली गई है। परिवार के प्रत्येक सदस्य को यह दोनों ही पढ़नी चाहिएं ताकि अध्यात्मवाद के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक दोनों ही पक्ष समझने की आवश्यकता पूरी हो सके। एकांगी शिक्षण अधूरा रह जाता है। परिवार के सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिए तो यह एक अनिवार्य आवश्यकता है। वे युग निर्माण की दिशा में कुछ सक्रिय कदम इस माध्यम से उठा सकेंगे। अस्तु युग-निर्माण पत्रिका प्रत्येक परिजन को पढ़नी ही चाहिए । कई सदस्य मिलकर भी उसका वार्षिक चंदा 6)भेज सकते हैं।

नवरात्रि में उपासना तथा आयोजन

आश्विन मास की नवरात्रियाँ ता0 6 अक्टूबर मंगलवार से आरंभ होकर ता0 14 अक्टूबर बुधवार को पूर्ण होंगी । गायत्री उपासना के लिए यह समय बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिनसे बन पड़े, वे इन दिनों 24 हजार का लघु अनुष्ठान करने का प्रयत्न करें। अन्यथा कुछ तो उपासना बढ़ा ही देनी चाहिए। जो बिलकुल न करते हों, वे इन 9 दिनों प्रतिदिन 12 माला तो जपने का प्रयत्न कर ही देखें। प्रयोग की दृष्टि से भी यदि इतना किया जा सके तो उससे भी आत्मिक प्रगति में योग दान मिलेगा। अनुष्ठान से रहने वाली त्रुटियों का दोष परिमार्जन और संरक्षण किया जाता रहेगा जो अपने संकल्प की सूचना समय पर भेज देंगे।

नवरात्रि के अन्त में जहाँ जो सामूहिक आयोजन हों, उनका समाचार ‘युग-निर्माण’ पत्रिका में छपने भेज देना चाहिए। सामूहिक आयोजनों से जन-जागृति में बड़ी सहायता मिलती है, इसलिए यथा संभव छोटे बड़े आयोजन इस अवसर पर सर्वत्र ही किये जाने चाहिएं।

छः महीने के लिए ग्राहक

इन दिनों अखण्ड-ज्योति के जो नये ग्राहक बन रहे हैं, उन्हें छह महीने के लिए जुलाई से दिसम्बर तक के लिए ही बनाया जा रहा है। अस्तु छह महीने का चंदा 2) ही भेजना चाहिए। यों नियमानुसार एक वर्ष से कम के ग्राहक नहीं बनायें जाते, पर बीच में ग्राहक नहीं बनायें जाने पर बीच में ग्राहक बनने से नये वर्ष का हिसाब रखने में जो असुविधा होती है उसे देखते हुए इस वर्ष यह विशेष व्यवस्था की गई है।

दस-दस सदस्यों के संगठन

अखण्ड-ज्योति परिवार के सब सदस्यों को दस-दस सदस्यों के छोटे-छोटे संगठनों में संगठित कर देने का जो क्रम चलाया गया है, वह बहुत ही उपयोगी एवं आवश्यक है। प्रसन्नता की बात है कि सभी जगह उत्साही सदस्यों यह संगठन कार्य आरंभ कर दिया है । जहाँ अभी उस ओर ध्यान नहीं दिया गया है वहाँ तुरन्त ही अपना संगठन पूरा कर लिया जाना चाहिए।

First 42 44 Last


Other Version of this book



Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...

Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • शान्ति तो अन्दर ही खोजनी पड़ती है।
  • ईश्वर प्राप्ति की साधना
  • केवल सत्य ही जीतता है।
  • Quotation
  • जीवन का कुछ उद्देश्य भी तो हो
  • ज्ञान की उपासना कीजिए
  • अपने स्वामी आप बनिए?
  • Quotation
  • गुलाब और आम के पेड़
  • गौरव, निरन्तर चलते रहने में है।
  • हजरत इब्राहीम
  • जीवन साधना के साधक—अरविन्द
  • Quotation
  • झूठे मित्र
  • हिन्दू-धर्म की अगणित विशेषताएँ
  • ईश्वर प्राप्ति
  • जीवन में सादगी की आवश्यकता और उपयोगिता
  • फूल और पत्थर
  • नारी समस्या का आध्यात्मिक हल
  • सन्त रैदास की साधना
  • डार्विन
  • चिन्ता में डूबे रहने से क्या फायदा?
  • शारीरिक स्वच्छता की उपेक्षा न करें
  • हनुमान जी को पूजिए पर वैसे ही बनिए भी
  • सत्याग्रह की लड़ाई
  • कुरूप और फिसड्डी-ईसप
  • Quotation
  • बूंद का अस्तित्व
  • किसी से भी ईर्ष्या मत किया करें
  • स्वावलम्बी बालक
  • मधु-संचय
  • मधु-संचय (Kavita)
  • धर्मपत्नी के प्रति पति के कर्तव्य
  • काला कौआ
  • शिक्षकों का महान उत्तरदायित्व
  • तीन पथिक
  • गायत्री का भावनात्मक एवं वैज्ञानिक महत्व
  • अन्नमय कोश की साधना
  • मनोमय कोश का परिष्कार
  • प्राणमय कोश का अनावरण
  • विज्ञानमय कोश का जागरण
  • आनंदमय कोश का आनंद
  • अखण्ड-ज्योति परिजनों के लिए पाँच आवश्यक सूचनाएं
  • पुस्तकालय को प्रणाम
  • पुस्तकालय को प्रणाम (Kavita)
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj